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राजस्थान

पुलिस प्रशासन का नकारात्मक रवैया बन रहा है कमजोर समाज के लोगों में आत्महत्या का बड़ा कारण बोले धर्मेन्द्र कुमार जाटव

द्वारा News Room 📅 06 May 2025 👁️ 96 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
पुलिस प्रशासन का नकारात्मक रवैया बन रहा है कमजोर समाज के लोगों में आत्महत्या का बड़ा कारण बोले धर्मेन्द्र कुमार जाटव

हाल ही में हुए एक घटना को लेकर आजाद समाज पार्टी राजस्थान के सह प्रभारी लिखते है कि बीते कुछ वर्षों में कमजोर समाज के लोगों में आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण, पुलिस प्रताड़ना या पुलिस द्वारा उनकी पीड़ा की अनदेखी करना, उभर कर आया है। साफ नजर आता है कि यथास्थितिवाद की पोषक हमारी पुलिस मशीनरी, गरीब कमजोर समाज के बीच अपने अधिकारों को लेकर आ रही चेतना को स्वीकार नहीं कर पा रही है। 

मजबूत समाज (आवश्यक रूप से सवर्ण या लठैत वर्ग) के रसूखदार लोगों के सामने मिमियाती हमारे देश की पुलिस, उनके इशारे पर कमजोर समाज को दबा कर रखने में उनकी भरसक मदद करती है। इसके लिए वो कमजोर वर्ग के लोगों के साथ किसी भी हद्द तक अन्याय और क्रूरता करने को तैयार रहती है।

कमजोर समाज के लोग, उन पर हो रहे अन्याय अत्याचार को लेकर काफी गुस्से में है, एक तरफ तो पुलिस प्रशासन के रवैए के चलते उनमें न्याय की उम्मीद खत्म होती जा रही है, दूसरी तरफ यदि वे स्वयं शोषकों का प्रतिकार करने का प्रयास करते है तो वो पुलिस इन रसूखदार शोषक लोगों के इशारे पर, उनका बुरी तरह से दमन करने उतारू हो जाती है। ऐसे में उन्हें डबल मार पड़ती है। पहले अन्याय अत्याचार सहो और उसके बाद पुलिस की मार और कानूनी पचड़े। 

इसके चलते कमजोर वर्ग के अधिकतर लोग अन्याय अत्याचार को बर्दाश्त करने को मजबूर हो जाते है। और लगातार अपने सम्मान स्वाभिमान को कुचलते हुए देख रहे है। 

और जो अपने सम्मान को कुचलते नहीं देख सकते, वे आत्महत्या कर मौत को गले लगा रहे है। राजस्थान प्रदेश में बीते दिनों में ओम प्रकाश रैगर, कविता चौहान और ना जाने कितने अनगिनत लोगों ने पुलिस की अनदेखी से त्रस्त होकर मौत को गले लगा लिया। 

पुलिस प्रशासन के इस गिराव से कमजोर समाज के लोगों के बीच लगातार, न्याय प्रणाली के प्रति मोह भंग हो रहा है। क्या यह हमारे लोकतंत्र के लिए अच्छे संकेत है ? 

सरकार की गलत फहमी है कि वो डंडे और बंदूक के दम पर लोकतंत्र को लंबे समय तक चला सकेगी। 

सरकारों को जितना जल्दी हो सके पुलिस सुधारों को लागू करने की जरूरत है।

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