आज का पंचांग: 20 मई 2026 - विनायक चतुर्थी का विशेष महत्व और शुभ मुहूर्त
20 मई 2026 आज का पंचांग: ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी, विनायक चतुर्थी, राहुकाल और शुभ मुहूर्त की संपूर्ण जानकारी। दिल्ली और भारत के लिए सटीक पंचांग अपडेट।
20 मई 2026, बुधवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज का दिन आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत पावन माना गया है, क्योंकि आज 'विनायक चतुर्थी' (वरदा चतुर्थी) का पर्व मनाया जा रहा है। भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के लिए यह दिन अत्यंत फलदायी है।
पंचांग के मुख्य बिंदु (दिल्ली आधारित)
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वार: बुधवार
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तिथि: ज्येष्ठ मास, शुक्ल चतुर्थी (प्रातः 11:07 बजे तक), इसके उपरांत शुक्ल पंचमी।
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नक्षत्र: आर्द्रा (प्रातः 6:11 बजे तक), तत्पश्चात पुनर्वसु नक्षत्र का संचार रहेगा।
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योग: शूल योग (दोपहर 2:09 बजे तक), उसके बाद गंड योग।
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करण: विष्टि (प्रातः), फिर बव और बालव करण।
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पक्ष: शुक्ल पक्ष
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संवत: विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थी), शक संवत 1948।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
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सूर्योदय: लगभग प्रातः 05:30 बजे से 05:47 बजे के मध्य (स्थान अनुसार)।
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सूर्यास्त: लगभग सायंकाल 07:00 बजे के आसपास।
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चंद्रोदय: प्रातः 08:58 बजे के आसपास।
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चंद्रास्त: रात्रि 11:05 बजे के आसपास।
आज का राहुकाल और शुभ मुहूर्त
ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल के दौरान किसी भी मांगलिक या नए कार्य को शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है:
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राहुकाल: दोपहर 12:00 बजे से 01:30 बजे तक।
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यमगंड काल: प्रातः 07:30 बजे से 09:00 बजे तक।
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शुभ समय: किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के लिए अभिजीत मुहूर्त का चयन करना शुभ होता है। आज प्रातःकाल के समय (राहुकाल से पहले) का उपयोग महत्वपूर्ण कार्यों हेतु किया जा सकता है।
विनायक चतुर्थी का महत्व
आज विनायक चतुर्थी पर विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा करने से जीवन के समस्त विघ्नों का नाश होता है। भक्तगण गणेश जी को दूर्वा और मोदक का भोग लगाकर अपने दिन की सकारात्मक शुरुआत कर सकते हैं। चतुर्थी व्रत रखने वालों के लिए आज का दिन अत्यंत कल्याणकारी है।
विशेष सलाह: राहुकाल के समय महत्वपूर्ण व्यावसायिक निर्णयों या यात्रा से बचना उचित रहता है। आज के दिन गणेश पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ मानसिक शांति और ऊर्जा प्रदान करने वाला सिद्ध होगा।
अस्वीकरण (Disclaimer): प्रस्तुत पंचांग की गणना सामान्य ज्योतिषीय सिद्धांतों और विभिन्न विश्वसनीय पंचांग स्रोतों पर आधारित है। समय और तिथियों में स्थान (स्थानिक अक्षांश-देशांतर) के अनुसार मामूली अंतर हो सकता है। किसी भी बड़े धार्मिक अनुष्ठान या महत्वपूर्ण कार्य हेतु स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
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