ग्राम विकास चौपाल: गांवों की समस्याओं का मौके पर समाधान बन रहा है मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संकल्प
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ग्राम विकास चौपाल: बांसवाड़ा और डूंगरपुर दौरे पर सीएम, गांवों की समस्याओं का मौके पर हो रहा समाधान। जानें पूरा कार्यक्रम।
जयपुर: 'ग्रामोदय से अंत्योदय' के लक्ष्य को साकार करने के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 'ग्राम विकास चौपाल' के रूप में एक नई पहल शुरू की है। यह मंच न केवल ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने का जरिया बन रहा है, बल्कि महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों को तुरंत धरातल पर उतारने का एक सशक्त माध्यम भी साबित हो रहा है।
संवाद से समाधान तक: चौपाल की कार्यशैली
मुख्यमंत्री की इन चौपालों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें सरकारी फाइलें अटकती नहीं हैं, बल्कि फैसले हाथों-हाथ लिए जाते हैं। हाल ही के उदाहरण देखें तो, सीकर के जाजोद गांव में छात्राओं की मांग पर विद्यालय में विज्ञान संकाय (Science Faculty) को रातों-रात मंजूरी देना हो या अजमेर के कड़ेल गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के रूप में क्रमोन्नयन, मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता और तत्परता की मिसाल पेश की है। अब तक वे प्रतापगढ़, सीकर, अजमेर, जालोर और जयपुर सहित पांच जिलों के गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद कर चुके हैं।
वागड़ दौरे का कार्यक्रम
ग्राम विकास चौपाल की इसी कड़ी में, मुख्यमंत्री अब वागड़ क्षेत्र की ओर रुख कर रहे हैं:
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20 मई: बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ स्थित चुड़ादा गांव में मुख्यमंत्री का आगमन होगा। यहां वे चौपाल में संवाद करेंगे और ग्रामीणों के बीच रात्रि विश्राम करेंगे।
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21 मई: सुबह चुड़ादा गांव में पैदल भ्रमण कर मुख्यमंत्री घर-घर जाकर फीडबैक लेंगे। इसके बाद बांसवाड़ा कलेक्ट्रेट में जिला अधिकारियों की बैठक लेंगे।
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21 मई (दोपहर बाद): डूंगरपुर आगमन और कलेक्ट्रेट में बैठक के बाद मुख्यमंत्री चौरासी के धम्बोला गांव पहुंचेंगे।
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22 मई: धम्बोला में रात्रि विश्राम और सुबह जनसंवाद के बाद मुख्यमंत्री विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
पर्यावरण और मितव्ययिता का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल की बचत की अपील का पालन करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव किए हैं। वे न केवल अपने काफिले में वाहनों की संख्या सीमित रख रहे हैं, बल्कि यात्रा के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (EV) का उपयोग कर रहे हैं। वागड़ दौरे के दौरान भी मुख्यमंत्री इसी पर्यावरण-अनुकूल पद्धति को अपनाएंगे।
मुख्यमंत्री का यह जमीनी दौरा इस बात का प्रमाण है कि सरकार अब लोगों के द्वार जाकर उनकी परेशानियां सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति और तेज हो सके।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह समाचार लेख राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट और मुख्यमंत्री के निर्धारित दौरों की जानकारी पर आधारित है। इसे सार्वजनिक सूचना और जनहित के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
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