सितंबर में दिल्ली आएंगे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन: BRICS शिखर सम्मेलन 2026 की बढ़ेगी अहमियत

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सितंबर में भारत दौरे पर आएंगे। नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी की तैयारी, जानें क्या है इस दौरे का कूटनीतिक महत्व।

May 19, 2026 - 16:52
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सितंबर में दिल्ली आएंगे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन: BRICS शिखर सम्मेलन 2026 की बढ़ेगी अहमियत
Vladimir Putin India Visit

नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति के केंद्र में इस समय भारत है। क्रेमलिन की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सितंबर 2026 में भारत का दौरा करेंगे। यह यात्रा नई दिल्ली में आयोजित होने वाले बहुप्रतीक्षित 'ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन' के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 12 और 13 सितंबर को होने वाले इस सम्मेलन में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्ष एक साथ जुटेंगे।

कूटनीतिक संबंधों की नई ऊंचाइयां

रूसी राष्ट्रपति का एक वर्ष के भीतर यह दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले, दिसंबर 2025 में उन्होंने 23वें 'भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन' के लिए नई दिल्ली की यात्रा की थी। उस दौरान रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी पर दोनों देशों के बीच गहरी चर्चा हुई थी। जानकारों का मानना है कि बदलती वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत और रूस का यह लगातार संवाद दोनों देशों के बीच दशकों पुराने भरोसेमंद रिश्तों को और मजबूती प्रदान कर रहा है।

ब्रिक्स 2026: उभरती अर्थव्यवस्थाओं का शक्ति केंद्र

इस वर्ष का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब यह समूह विस्तार के नए दौर से गुजर रहा है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका द्वारा स्थापित इस समूह में अब मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे नए सदस्य भी शामिल हो चुके हैं।

सम्मेलन के मुख्य बिंदु:

  • वैश्विक संस्थानों में सुधार: ब्रिक्स सदस्य देश लगातार संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में ढांचागत सुधारों की मांग कर रहे हैं।

  • विकल्पों की तलाश: यह समूह पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाली संस्थाओं के विकल्प के रूप में उभर रहा है, जो विकासशील देशों को एक स्वतंत्र मंच प्रदान करता है।

  • 'ग्लोबल साउथ' का एजेंडा: नई दिल्ली इस सम्मेलन में 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) के हितों, व्यापारिक संबंधों और सतत विकास पर विशेष जोर देगी।

रणनीतिक साझेदारी का प्रभाव

हाल ही में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का भारत दौरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी उच्च-स्तरीय चर्चाएं इस शिखर सम्मेलन की सफलता की पृष्ठभूमि तैयार कर चुकी हैं। ब्रिक्स का प्रतिनिधित्व दुनिया की एक बड़ी आबादी और आर्थिक संसाधनों पर है, इसलिए नई दिल्ली में होने वाली बातचीत वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक दिशा बदलने की क्षमता रखती है।

जैसे-जैसे सितंबर करीब आ रहा है, वैश्विक समुदाय की नजरें नई दिल्ली पर टिकी हैं। यह सम्मेलन न केवल आपसी सहयोग को बढ़ाएगा, बल्कि आने वाले समय में वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में विकासशील राष्ट्रों की आवाज को और बुलंद करेगा।


अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। किसी भी आधिकारिक नीतिगत जानकारी के लिए संबंधित सरकारी स्रोतों का संदर्भ लें।

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