प्रशासनिक और पुलिस समन्वय की नई मिसाल: प्रोबेशनर आईएएस अधिकारियों ने जाना राजस्थान पुलिस का 'स्मार्ट मॉडल'
जयपुर में प्रोबेशनर आईएएस अधिकारियों ने पुलिस मुख्यालय का दौरा किया, जहां डीजीपी राजीव कुमार शर्मा और वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें साइबर क्राइम, महिला सुरक्षा, यातायात और पुलिस-प्रशासनिक समन्वय के गुर सिखाए।
जयपुर। प्रशासनिक सेवा में कदम रख रहे युवा अधिकारियों को जमीनी स्तर की चुनौतियों से रूबरू कराने के लिए बुधवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के प्रोबेशनर अधिकारियों के एक उच्च स्तरीय दल ने राजस्थान पुलिस मुख्यालय का आधिकारिक दौरा किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत आयोजित इस दौरे का मुख्य उद्देश्य कानून व्यवस्था के व्यावहारिक पहलुओं को समझाना और पुलिस व प्रशासन के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करना था।
इस अवसर पर पुलिस मुख्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में महानिदेशक पुलिस (DGP) श्री राजीव कुमार शर्मा के साथ युवा अधिकारियों का एक विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया।
फील्ड में सफलता के लिए पुलिस-प्रशासन का तालमेल जरूरी: DGP
संवाद के दौरान डीजीपी श्री राजीव कुमार शर्मा ने युवा आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि फील्ड में एक सफल प्रशासनिक नेतृत्व के लिए पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर और मजबूत समन्वय बेहद जरूरी है। दोनों विभागों का संयुक्त प्रयास ही कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बना सकता है।
इस दौरे के दौरान विभिन्न सत्रों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए:
-
जिला स्तर पर संयुक्त भूमिका: महानिदेशक पुलिस (स्पेशल ऑपरेशन्स) श्री आनंद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जिला स्तर पर शांति व्यवस्था बनाए रखने में जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) की संयुक्त भूमिका कितनी अहम होती है।
-
राजस्थान पुलिस का ढांचा: अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कार्मिक) श्री बीजू जॉर्ज जोसेफ ने एक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राजस्थान पुलिस की संरचना, कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी।
सड़क सुरक्षा, ड्रग्स नेटवर्क और साइबर क्राइम पर मंथन
युवा अधिकारियों को वर्तमान समय की बड़ी चुनौतियों, जैसे साइबर अपराध और ड्रग्स तस्करी से निपटने के व्यावहारिक तौर-तरीके सिखाए गए:
-
यातायात प्रबंधन: महानिदेशक पुलिस (प्रशिक्षण एवं यातायात) श्री अनिल पालीवाल ने राज्य में सड़क सुरक्षा के मौजूदा परिदृश्य और जिला सड़क सुरक्षा समितियों की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला।
-
नारकोटिक्स पर लगाम: महानिरीक्षक पुलिस (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) श्री विकास कुमार ने बताया कि जिला स्तर पर नार्को कोऑर्डिनेशन समिति (NCORD) के माध्यम से मादक पदार्थों के नेटवर्क को कैसे ध्वस्त किया जा सकता है।
-
साइबर सुरक्षा: उप महानिरीक्षक पुलिस (साइबर क्राइम) श्री शांतनु कुमार सिंह ने डिजिटल खतरों और साइबर अपराधों के बारे में ब्रीफ किया। इस दौरान प्रोबेशनर्स ने 1930 साइबर कंट्रोल रूम का सीधा अवलोकन किया और देखा कि वित्तीय ठगी के मामलों में त्वरित तकनीकी कार्रवाई कैसे की जाती है।
-
महिला एवं बाल सुरक्षा: उप महानिरीक्षक पुलिस (सिविल राइट्स) श्रीमती श्वेता धनखड़ ने महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए पुलिस द्वारा चलाई जा रही विशेष योजनाओं और विधिक अधिकारों के बारे में जानकारी दी।
अभय कमांड सेंटर पर स्मार्ट पुलिसिंग का लाइव डेमो
दौरे के अंतिम चरण में सभी प्रोबेशनर अधिकारियों ने जयपुर कमिश्नरेट स्थित अत्याधुनिक 'अभय कमांड सेंटर' का दौरा किया। यहाँ जयपुर पुलिस कमिश्नर श्री सचिन मित्तल ने शहर की डिजिटल निगरानी, सीसीटीवी सर्विलांस, ई-चालान और आपातकालीन रेस्पॉन्स सिस्टम की कार्यप्रणाली का सजीव (Live) प्रदर्शन कर आधुनिक स्मार्ट पुलिसिंग मॉडल से अधिकारियों को परिचित कराया।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। लेख में दी गई जानकारी आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग और पुलिस मुख्यालय के इनपुट्स पर आधारित है। किसी भी प्रशासनिक संदर्भ के लिए आधिकारिक सरकारी पोर्टल से पुष्टि अवश्य करें।
To read this article in English, please visit
ताजा खबरों के लिए हमारे ग्रुप से जुड़ें: