दृश्यम 3 रिव्यू: रोमांच और पारिवारिक भावनाओं का बेजोड़ संगम, क्या जॉर्जकुट्टी इस बार भी पुलिस को चकमा दे पाएगा?
दृश्यम 3 मूवी रिव्यू: मोहनलाल और जीथू जोसेफ की जोड़ी क्या 'Drishyam 3' में दोबारा रच पाई इतिहास? जानें फिल्म की कहानी, कलाकारों का अभिनय और दर्शकों का फर्स्ट डे रिव्यू।
मनोरंजन डेस्क। भारतीय सिनेमा इतिहास की सबसे सफल सस्पेंस-थ्रिलर फ्रेंचाइजी में से एक 'दृश्यम' का तीसरा भाग यानी 'दृश्यम 3' (Drishyam 3) 21 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुका है। लेखक और निर्देशक जीथू जोसेफ (Jeethu Joseph) के निर्देशन में बनी इस फिल्म को लेकर दर्शकों और समीक्षकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। जहां 'दृश्यम 2' को कोरोना काल की अनिश्चितताओं के बीच ओटीटी पर रिलीज किया गया था, वहीं 'दृश्यम 3' ने सिनेमाघरों में बड़े पर्दे पर दस्तक दी है। आइए जानते हैं कि मोहनलाल (Mohanlal) की यह बहुप्रतीक्षित फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरी है।
फिल्म की कहानी (Plotline)
'दृश्यम 3' की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है जहां दूसरा भाग खत्म हुआ था। पिछले भाग में हमने देखा था कि जॉर्जकुट्टी (मोहनलाल) अपने जीवन की वास्तविक घटना पर एक फिल्म बनाने की तैयारी कर रहा था। तीसरे भाग में वह फिल्म लेखक विनयचंद्रन के सहयोग के बिना आखिरकार पूरी होने की कगार पर है। जॉर्जकुट्टी अब अपने पुराने अतीत को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है और उसका पूरा ध्यान अपनी बड़ी बेटी अंजू (अंसीबा हसन) की शादी पर केंद्रित है।
अंजू के लिए नए रिश्तों की तलाश के दौरान जॉर्जकुट्टी को अचानक एहसास होता है कि कुछ गुप्त ताकतें और लोग अब भी उसके और उसके परिवार के पीछे पड़े हैं। पुलिस की ओर से कोई सीधी कार्रवाई न होने के बावजूद, जॉर्जकुट्टी अपने परिवार को बचाने के लिए उन लोगों का पता लगाने की कोशिश करता है जो उसकी जासूसी कर रहे हैं। यही चूहे-बिल्ली का खेल फिल्म की मुख्य कहानी को आगे बढ़ाता है।
निर्देशन और पटकथा (Direction and Screenplay)
निर्देशक जीथू जोसेफ अच्छी तरह जानते हैं कि पहली दो फिल्मों के बाद दर्शक उनके 'ट्विस्ट और टर्न' के पैटर्न को समझ चुके हैं। इसलिए इस बार उन्होंने एक पारंपरिक थ्रिलर बनाने के बजाय जॉर्जकुट्टी के मनोवैज्ञानिक स्तर (Psyche) और एक पिता की असुरक्षा को गहराई से टटोला है। फिल्म केवल इस बात पर केंद्रित नहीं है कि जॉर्जकुट्टी पुलिस को कैसे बेवकूफ बनाता है, बल्कि यह एक ऐसे पिता की कहानी है जो कानून की तलवार लटकने के बावजूद अपनी बेटियों के व्यावहारिक भविष्य को सुरक्षित करना चाहता है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी भावनात्मक गहराई है। इस बार पटकथा में जॉर्जकुट्टी को थोड़ा कमजोर और बैकफुट पर दिखाया गया है, जहां वह खुद चालें चलने के बजाय सामने वाले के हमलों का सामना कर रहा है। फिल्म का क्लाइमेक्स पारंपरिक 'सीटी मार' सिनेमाई ट्विस्ट नहीं है, बल्कि एक ऐसा इमोशनल शॉक (भावनात्मक झटका) देता है जो दर्शकों को हैरान कर देता है। हालांकि, जीथू जोसेफ की संवाद लेखन (Dialogue Writing) शैली कुछ जगहों पर बेहद व्याख्यात्मक और नाटकीय लगती है, जो फिल्म की रफ्तार को थोड़ा धीमा करती है।
कलाकारों का अभिनय (Performances)
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मोहनलाल (Lalettan): मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मोहनलाल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जॉर्जकुट्टी के किरदार को उनसे बेहतर कोई नहीं निभा सकता। स्क्रिप्ट के भारी और नाटकीय संवादों को भी उन्होंने बेहद सहजता और स्वाभाविकता के साथ पर्दे पर उतारा है। इस भाग में उनके किरदार की संवेदनशीलता और तनाव को उन्होंने अपनी आंखों और बॉडी लैंग्वेज से बखूबी व्यक्त किया है।
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मीना और अन्य कलाकार: रानी के रूप में मीना (Meena) ने अपने किरदार की घबराहट और निरंतरता को बनाए रखा है। अंजू के रूप में अंसीबा हसन पहले से कहीं अधिक शांत और परिपक्व नजर आई हैं, जबकि अनु के किरदार में एस्तेर अनिल को इस बार पारिवारिक निर्णयों में अधिक महत्व दिया गया है।
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सहयोगी कलाकार: सिद्दीकी (Siddique) ने प्रभाकर के रूप में अपने विकसित होते हुए चरित्र को बहुत ही संजीदगी से निभाया है, जो फिल्म के भावनात्मक ग्राफ को ऊपर ले जाता है। मुरली गोपी और इर्शाद ने पुलिस अधिकारियों के रूप में सराहनीय काम किया है।
फर्स्ट डे ऑडियंस और क्रिटिक्स रिव्यू (Mixed Reactions)
रिलीज के पहले दिन सोशल मीडिया और क्रिटिक्स की ओर से फिल्म को मिले-जुले से लेकर सकारात्मक रिव्यू मिल रहे हैं:
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सकारात्मक पहलू: कई प्रशंसकों का मानना है कि 'दृश्यम 3' एक परिपक्व और धीमी गति से बढ़ने वाली (Slow-burning) इमोशनल थ्रिलर है, जो बिना वजह के जबरन ट्विस्ट डालने से बचती है। फिल्म का इंटरवल ब्लॉक और क्लाइमेक्स काफी सरप्राइजिंग है।
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कमजोर पहलू: कुछ दर्शकों का यह भी कहना है कि फिल्म की रफ्तार काफी धीमी है और यह कुछ हद तक दूसरे भाग के ढर्रे पर ही चलती है, जिससे कहानी कई जगहों पर प्रेडिक्टेबल (अनुमानित) हो जाती है।
अंतिम निष्कर्ष (Conclusion)
यदि आप 'दृश्यम 3' से केवल 'दृश्यम 1' जैसी तेज तर्रार सस्पेंस या जासूसी की उम्मीद कर रहे हैं, तो शायद आपको थोड़ी निराशा हो सकती है। लेकिन अगर आप एक ऐसे परिवार की दास्तान देखने में रुचि रखते हैं जो अपने अतीत के मनोवैज्ञानिक बोझ और न्याय प्रणाली के डर के साए में जी रहा है, तो जीथू जोसेफ की यह पेशकश आपको बेहद पसंद आएगी। अनिल जॉनसन का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के थ्रिलर फैक्टर को अंत तक बांधे रखता है।
Disclaimer (अस्वीकरण): यह लेख विभिन्न फिल्म समीक्षकों, सोशल मीडिया पर दर्शकों की त्वरित प्रतिक्रियाओं और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मनोरंजन समाचारों के विश्लेषण पर आधारित है। फिल्म के प्रति हर व्यक्ति का दृष्टिकोण और पसंद भिन्न हो सकती है। यह समीक्षा किसी भी व्यावसायिक लाभ या पूर्वाग्रह से प्रेरित नहीं है।
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