राजस्थान बनेगा 'क्रिटिकल मिनरल्स' का प्रमुख केंद्र: खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और विकास पर सरकार का विशेष जोर
राजस्थान बनेगा क्रिटिकल मिनरल्स का प्रमुख केंद्र। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए बनाई कार्ययोजना।
जयपुर।
राजस्थान अपनी खनिज संपदा के लिए देश में पहले से ही अग्रणी है, लेकिन अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश 'क्रिटिकल मिनरल्स' (Critical Minerals) के हब के रूप में अपनी पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में केंद्रीय खान एवं कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी की उपस्थिति में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में खनन क्षेत्र की अपार संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है।
खनन क्षेत्र में नवाचार और पारदर्शिता
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान में 82 प्रकार के खनिज उपलब्ध हैं, जिनमें से 57 खनिजों का दोहन किया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता खनन क्षेत्र में नीतिगत सुधार, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे का विकास करना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खनन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच नियमित समन्वय बनाया जाए।
सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स: भविष्य की ऊर्जा और तकनीक की चाबी
बैठक में बाड़मेर और बालोतरा जिले में फैले 'सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स' के महत्व पर विशेष चर्चा हुई। यह क्षेत्र 'रेयर अर्थ एलिमेंट्स' (Rare Earth Elements) और 'हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स' का बड़ा स्रोत है, जो आधुनिक तकनीकी और स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं।
केंद्र-राज्य समन्वय: परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार
केंद्रीय खान एवं कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खनन क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की 'प्रो-एक्टिव' अप्रोच की सराहना करते हुए कहा कि:
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राजस्थान रक्षा, सौर ऊर्जा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों के लिए आवश्यक 'क्रिटिकल मिनरल्स' की बढ़ती मांग को पूरा करने की क्षमता रखता है।
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भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा चिन्हित साइट्स की जानकारी राज्यों के साथ साझा की जाएगी, ताकि संरक्षण वाली भूमि का गलत आवंटन न हो।
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नीलामी हो चुके खनिज ब्लॉक्स में शीघ्र उत्पादन शुरू करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
भविष्य की राह: वैज्ञानिक दोहन और निवेश
बैठक में केवल खनन ही नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित विषयों पर भी मंथन हुआ। इसमें कोल इंडिया-आरवीयूएनएल संयुक्त उपक्रम, सौर ऊर्जा परियोजनाएं, डीएमएफ फंड और पर्यावरणीय स्वीकृतियों जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी गई। राज्य सरकार की पारदर्शी नीतियों के चलते निवेश और खनिज उत्पादन में वृद्धि के नए द्वार खुलेंगे।
यह बैठक राजस्थान को खनन के क्षेत्र में न केवल एक आर्थिक केंद्र बनाने, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह समाचार लेख आधिकारिक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति और बैठक के दौरान दी गई जानकारी पर आधारित है। इसे सार्वजनिक सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
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