राजस्थान बनेगा सेमीकंडक्टर हब: भिवाड़ी में देश की पहली SME फैसिलिटी के साथ हाईटेक अर्थव्यवस्था की ओर कदम

राजस्थान अब बनेगा सेमीकंडक्टर हब! भिवाड़ी में देश की पहली SME सेमीकंडक्टर फैसिलिटी शुरू। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन से राजस्थान की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार। जानें पूरी डिटेल।

May 19, 2026 - 16:18
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राजस्थान बनेगा सेमीकंडक्टर हब: भिवाड़ी में देश की पहली SME फैसिलिटी के साथ हाईटेक अर्थव्यवस्था की ओर कदम
Rajasthan Semiconductor Mission

जयपुर।

अपनी गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत और खनिज संपदा के लिए मशहूर राजस्थान अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में एक नई औद्योगिक क्रांति की दहलीज पर खड़ा है। सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में राज्य की सक्रिय भागीदारी इसे 'विकसित राजस्थान-2047' के संकल्प की ओर तेजी से अग्रसर कर रही है। भिवाड़ी में प्रदेश के पहले सेमीकंडक्टर क्लस्टर की शुरुआत राजस्थान के लिए केवल एक औद्योगिक उपलब्धि नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को पारंपरिक मॉडल से निकालकर उच्च तकनीक आधारित दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक कदम है।

औद्योगिक इतिहास में एक नया अध्याय

15 मई 2026 को राजस्थान ने तकनीकी क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। भिवाड़ी के सलारपुर-खुशखेड़ा क्षेत्र में एल्सीना इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर विकसित यह ग्रीनफील्ड क्लस्टर देश की पहली 'एसएमई सेमीकंडक्टर फैसिलिटी' बन गया है।

इस क्लस्टर की मुख्य विशेषताएं:

  • भारी निवेश: अब तक 1,200 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।

  • रोजगार सृजन: 11 कंपनियों ने 900 करोड़ रुपये के निवेश के साथ संचालन शुरू कर दिया है, जिससे 2,700 से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिला है।

  • क्षमता विस्तार: वर्तमान में 6 करोड़ यूनिट प्रतिवर्ष की पैकेजिंग क्षमता को अगले 2-3 वर्षों में 40 से 60 करोड़ यूनिट तक ले जाने का लक्ष्य है।

'सेमीकंडक्टर नीति-2026' और युवाओं के लिए अवसर

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा मार्च 2026 में जारी 'राजस्थान सेमीकंडक्टर नीति' ने प्रदेश को निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है। इस नीति के तहत जोधपुर-पाली-मारवाड़ और कांकणी औद्योगिक क्षेत्रों को 'सेमीकंडक्टर कॉरिडोर' के रूप में विकसित किया जा रहा है।

युवाओं के लिए भी यह एक सुनहरा अवसर है। 'चिप्स टू स्टार्टअप' कार्यक्रम के अंतर्गत राजस्थान के 9 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में विश्व-स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इससे प्रदेश का युवा अब चिप डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग का व्यावहारिक अनुभव अपने गृह राज्य में ही प्राप्त कर रहा है।

वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की मजबूत दस्तक

आज मोबाइल से लेकर मिसाइल तक और इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर एआई (AI) तक, सेमीकंडक्टर हर आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं। भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत राजस्थान इस वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी मजबूत जगह बनाने के लिए तैयार है। केंद्रीय बजट में मिशन 2.0 के लिए 1,000 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ, राजस्थान न केवल निवेश आकर्षित कर रहा है, बल्कि मशीन ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे उच्च-कुशल क्षेत्रों में मानव संसाधन भी तैयार कर रहा है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह दूरदर्शी विजन राजस्थान को पर्यटन की पहचान से आगे बढ़ाकर एक वैश्विक 'इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर हब' के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। आने वाले समय में राजस्थान न केवल तकनीकी विकास की मुख्यधारा में शामिल होगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की नई धुरी भी बनेगा।


अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों और सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल आम जनता को राजस्थान के औद्योगिक विकास और सेमीकंडक्टर मिशन से जुड़ी जानकारी प्रदान करना है।

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