राजस्थान विधायी इतिहास का ऐतिहासिक क्षण: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने किया विधानसभा के नए 'प्रतीक चिन्ह' का विमोचन; 13 द्वारों का हुआ नामकरण
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने विधानसभा के नए प्रतीक चिन्ह (लोगो) का विमोचन किया और 13 द्वारों का नामकरण किया। जानें इस नए लोगो और 1913 के विधायी इतिहास का महत्व।
जयपुर | 18 मई 2026
राजस्थान लोकतांत्रिक और विधायी इतिहास में सोमवार, 18 मई 2026 का दिन एक बड़े मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। राजस्थान विधानसभा के गौरवमयी 75 वर्ष पूर्ण होने (अमृत महोत्सव) के ऐतिहासिक अवसर पर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने विधानसभा भवन के नवनिर्मित आधिकारिक 'प्रतीक चिन्ह' (Logotype) का भव्य विमोचन किया। इस गरिमामयी समारोह के दौरान राज्यपाल ने विधायी परिसर के विभिन्न 13 द्वारों (Gates) का औपचारिक रूप से नामकरण भी किया, जो राजस्थान की शौर्यगाथा और सांस्कृतिक चेतना को प्रदर्शित करते हैं।
नया प्रतीक चिन्ह: राजस्थान की जीवटता और 'वृक्ष संस्कृति' का द्योतक
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सबसे पवित्र मंदिर है। उन्होंने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी की अनूठी पहल पर तैयार किया गया यह नया 'लोगो' (Logo) राजस्थान के जनमानस की मूल सोच और सांस्कृतिक विरासत का सटीक प्रतिनिधित्व करता है।
प्रतीक चिन्ह (Logo) की मुख्य विशेषताएं:
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विधानभवन की छवि: कलात्मक रूप से निर्मित इस लोगो के केंद्र में राजस्थान विधानसभा भवन के स्थापत्य (Architecture) को दर्शाया गया है।
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राज्य वृक्ष खेजड़ी (Kalpavriksha): लोगो में राजस्थान के कल्पवृक्ष 'खेजड़ी' को प्रमुखता दी गई है। राज्यपाल ने ऐतिहासिक खेजड़ली बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि खेजड़ी यहाँ की पर्यावरण-समर्पित 'वृक्ष संस्कृति' का प्रतीक है, जो विषम परिस्थितियों में भी हरा-भरा रहना सिखाती है।
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राज्य पुष्प रोहिड़ा: खेजड़ी के साथ रेगिस्तान के गौरव 'रोहिड़ा' के पुष्प का समावेश किया गया है। यह समन्वय, सुंदरता और विपरीत परिस्थितियों में भी उत्सवधर्मिता से जीवन जीने वाले राजस्थानी समाज की जीवटता को प्रदर्शित करता है।
1913 से जुड़ा है राजस्थान का विधायी इतिहास
राज्यपाल ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया। उन्होंने कहा:
राज्यपाल का ऐतिहासिक वक्तव्य: "यद्यपि स्वतंत्र भारत में लोकतांत्रिक रूप से पहली राजस्थान विधानसभा का गठन वर्ष 1952 में हुआ था, परंतु इस मरुधरा में विधायी परंपरा की नींव स्वतंत्रता से पूर्व ही पड़ चुकी थी। वर्ष 1913 में बीकानेर के तत्कालीन महाराजा गंगा सिंह ने 'प्रतिनिधि सभा' की स्थापना कर राजस्थान में विधायी प्रणाली का बीजारोपण कर दिया था। इस समृद्ध इतिहास के आलोक में अमृतकाल के दौरान इस नए प्रतीक चिन्ह का लोकार्पण अत्यधिक गौरवमयी है।"
मावलंकर जी का संस्मरण: आचरण, व्यावहारिक शिक्षा और प्रबंधन पर जोर
अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल ने भारत की पहली लोकसभा के अध्यक्ष श्री गणेश वासुदेव मावलंकर से जुड़ा एक प्रेरक संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे मावलंकर जी ने अपनी थाली में भोजन का अपव्यय करने वाले एक अर्थशास्त्र के विद्वान को प्रबंधन की सीख दी थी। श्री बागडे ने कहा कि जब तक व्यक्ति अपने व्यक्तिगत जीवन में आदर्श आचरण और व्यवहार को नहीं उतारता, तब तक वह समाज का प्रबंधन नहीं कर सकता।
भावी पीढ़ी और शिक्षा नीति पर विचार:
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पिछड़े और वंचितों की शिक्षा: राज्यपाल ने समाज के पिछड़े और गरीब तबके के बच्चों के लिए शिक्षा प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल दिया।
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व्यावहारिक शिक्षा (Practical Education): उन्होंने कहा कि देश बच्चों की प्रतिभा से आगे बढ़ता है, इसलिए केवल किताबी ज्ञान के बजाय स्कूलों में व्यावहारिक शिक्षा देने की जरूरत है।
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कर्तव्य बोध: महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि लोकतंत्र तभी मजबूत हो सकता है जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ संवैधानिक कर्तव्यों (Duties) के प्रति भी पूरी तरह सजग रहें।
अंत में, राज्यपाल ने विधानसभा के 13 द्वारों के नामकरण में राजस्थान की शौर्य, वीरता और आध्यात्मिक चेतना से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को शामिल करने के निर्णय की मुक्त कंठ से सराहना की।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह विधायी मामलों, सांस्कृतिक विरासत और प्रशासनिक कार्यक्रमों से संबंधित समाचार रिपोर्ट सार्वजनिक सूचना के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस लेख में शामिल ऐतिहासिक संदर्भ, प्रतीक चिन्ह के विवरण और प्रशासनिक घोषणाएं 18 मई 2026 को राजभवन जयपुर और राजस्थान विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों और राज्यपाल के उद्बोधन पर आधारित हैं। विधानसभा के 13 द्वारों के विशिष्ट नामों की सूची, स्थापना इतिहास या विधायी नियमों की प्रमाणित जानकारी के लिए राजस्थान विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट (assembly.rajasthan.gov.in) का अवलोकन करें।
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