यूएई की नई रणनीति: हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता होगी कम; 2027 तक फुजैरा पोर्ट की क्षमता दोगुनी करने का लक्ष्य
यूएई 2027 तक फुजैरा पोर्ट की क्षमता दोगुनी करने के लिए नई पाइपलाइन बना रहा है। जानें पीएम मोदी की यूएई यात्रा और भारत के साथ हुए नए समझौतों की पूरी जानकारी।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपनी तेल निर्यात रणनीति में एक बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। यूएई अपनी कच्चा तेल निर्यात क्षमता को दोगुना करने के लिए एक नई पाइपलाइन परियोजना पर तेजी से काम कर रहा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सामरिक रूप से संवेदनशील 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को बायपास करना है, जो वर्तमान में काफी हद तक ईरान के नियंत्रण में है।
फुजैरा पोर्ट बनेगा नया हब: 2027 तक पूरा होगा काम
यूएई के मीडिया कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) ओमान की खाड़ी में स्थित अपने फुजैरा पोर्ट की क्षमता बढ़ाने के लिए एक नई पाइपलाइन का निर्माण कर रही है। सरकार ने इस परियोजना के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं ताकि 2027 तक निर्यात क्षमता को दोगुना किया जा सके। वर्तमान में, एडनॉक की पाइपलाइन क्षमता लगभग 15 लाख बैरल प्रति दिन है, जो कंपनी की कुल निर्यात क्षमता के आधे से भी कम है।
हॉर्मुज संकट और पड़ोसी देशों की स्थिति
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा नियंत्रित करता है। मौजूदा युद्ध की स्थिति में इस जलमार्ग के बाधित होने से कुवैत, इराक, कतर और बहरीन जैसे देशों के लिए निर्यात करना कठिन हो गया है, क्योंकि वे पूरी तरह इसी मार्ग पर निर्भर हैं। यूएई और सऊदी अरब ही ऐसे देश हैं जिन्होंने वैकल्पिक मार्गों के माध्यम से निर्यात जारी रखने में सफलता हासिल की है। हाल ही में ओपेक (OPEC) से अलग होने के बाद, यूएई अब अपनी तेल उत्पादन और निर्यात नीतियों को स्वतंत्र रूप से लागू कर रहा है।
पीएम मोदी की यूएई यात्रा: ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में बड़े समझौते
इसी बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई की एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण यात्रा की। इस दो घंटे की यात्रा के दौरान भारत और यूएई ने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए:
-
ऊर्जा सुरक्षा: एलपीजी (LPG) आपूर्ति और पेट्रोलियम रिजर्व के लिए प्रमुख पैक्ट साइन किए गए।
-
रक्षा सहयोग: दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
-
शिप रिपेयर: गुजरात के वाडिनार में एक 'शिप रिपेयर क्लस्टर' स्थापित करने के लिए भी समझौता हुआ।
यह यात्रा भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और पश्चिम एशिया में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक बयानों और 15 मई 2026 तक की मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। तेल बाजार और कूटनीतिक समझौतों की अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक सरकारी पोर्टल देखें।
अंग्रेजी (English) में ख़बर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें:
What's Your Reaction?