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मध्य पूर्व तनाव: यूएई के परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर ड्रोन हमला, एयर डिफेंस ने २ ड्रोन मार गिराए; अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध में गतिरोध बरकरार

यूएई के बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Barakah Nuclear Power Plant) पर ड्रोन हमला हुआ है। यूएई वायु सेना ने २ ड्रोन मार गिराए। जानें आईएईए का अलर्ट और ईरान युद्ध की ताजा स्थिति।
द्वारा News Room 📅 17 May 2026 👁️ 291 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
मध्य पूर्व तनाव: यूएई के परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर ड्रोन हमला, एयर डिफेंस ने २ ड्रोन मार गिराए; अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध में गतिरोध बरकरार

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष और कूटनीतिक गतिरोध के बीच खाड़ी क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों ने रविवार को पुष्टि की कि देश के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Barakah Nuclear Power Plant) को निशाना बनाकर एक ड्रोन हमला किया गया है। यूएई रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defence Systems) ने पश्चिमी सीमा से प्रवेश करने वाले तीन ड्रोनों को ट्रैक किया, जिनमें से दो को सफलतापूर्वक हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जबकि तीसरा ड्रोन संयंत्र के बाहरी हिस्से में जा गिरा।

रेडियोलॉजिकल सुरक्षा पर कोई असर नहीं; आईएईए (IAEA) की नजर

अबू धाबी मीडिया ऑफिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस ड्रोन ने अल धफरा स्थित बराकाह परमाणु संयंत्र के आंतरिक सुरक्षा घेरे (Inner Perimeter) से बाहर स्थित एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर को टक्कर मारी, जिससे वहां मामूली आग लग गई। इस घटना में किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान या किसी के घायल होने की खबर नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संयंत्र के भीतर रेडियोलॉजिकल सुरक्षा स्तर (Radiological Safety Levels) पूरी तरह सामान्य और अप्रभावित हैं।

इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने बयान जारी कर बताया कि संयंत्र की 'यूनिट 3' को बिजली की आपूर्ति सुचारू रखने के लिए आपातकालीन डीजल जनरेटरों को सक्रिय कर दिया गया है। आईएईए ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए परमाणु केंद्रों के आसपास सभी पक्षों से "अधिकतम सैन्य संयम" बरतने की अपील की है।


तनावपूर्ण युद्धविराम के बीच कूटनीतिक गतिरोध

28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ यह युद्ध पिछले पांच हफ्तों से एक नाजुक युद्धविराम के सहारे रुका हुआ था, लेकिन हालिया घटनाओं ने इसे फिर से खतरे में डाल दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तेल और गैस परिवहन के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) को खुलवाने के लिए एक नौसैनिक मिशन की घोषणा के बाद ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमले तेज कर दिए हैं।

दोनों पक्षों की शर्तें और कड़े रुख:

  • अमेरिका की मांग: वाशिंगटन ने तेहरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर से अपना नियंत्रण हटाने की शर्त रखी है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो हमले दोबारा शुरू किए जा सकते हैं।

  • ईरान का पलटवार: ईरान ने युद्ध से हुए नुकसान के मुआवजे, अपनी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी को खत्म करने और लेबनान सहित सभी मोर्चों पर इजरायली सैन्य कार्रवाई को रोकने की मांग की है। ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता अबोलफजल शेकारची ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका ने अपनी धमकियां जारी रखीं, तो उसे "आक्रामक और औचक रणनीतियों" का सामना करना पड़ेगा।


वैश्विक ऊर्जा बाजार और ब्लॉकहेड का संकट

शिपिंग रूट बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतिहास का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति संकट पैदा हो गया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा पैनल के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने संकेत दिया है कि तेहरान जल्द ही स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के माध्यम से यातायात को प्रबंधित करने के लिए एक वैकल्पिक तंत्र की घोषणा करेगा। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि देश की संप्रभुता, स्थिरता और रणनीतिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए उनकी सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं और इस 'आतंकवादी हमले' के स्रोत की जांच पूरी होने के बाद वे कड़ी प्रतिक्रिया देने का पूरा अधिकार रखते हैं।


डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट यूएई रक्षा मंत्रालय, अबू धाबी मीडिया कार्यालय और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) द्वारा 17 मई 2026 को जारी आधिकारिक बयानों और रॉयटर्स व खलीज टाइम्स की ग्राउंड मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। खाड़ी क्षेत्र के ताजा घटनाक्रमों, आधिकारिक जांच के नतीजों और भू-राजनीतिक सुरक्षा दिशा-निर्देशों की सटीक जानकारी के लिए संबंधित देशों के विदेश मंत्रालयों या संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक बुलेटिन को देखें।

अंग्रेजी (English) में ख़बर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें: missionkiawaaz.com

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