विकसित भारत-2047: जल सुरक्षित राजस्थान की ओर कदम; संशोधित PKC लिंक के लिए 25 हजार करोड़ के कार्यादेश जारी
Rajasthan Water Security 2047: जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने NIH रूड़की की बैठक में 25,000 करोड़ की PKC परियोजना और यमुना जल समझौते पर दी बड़ी जानकारी।
जयपुर/रूड़की | 12 मई, 2026
मंगलवार को केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NIH), रूड़की की 43वीं वार्षिक बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राजस्थान के जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने प्रदेश की महत्वाकांक्षी जल परियोजनाओं और तकनीकी नवाचारों का रोडमैप प्रस्तुत किया।
राजस्थान वाटर ग्रिड और संशोधित PKC परियोजना
जल संसाधन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में राजस्थान वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन की स्थापना की गई है।
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बड़ा निवेश: संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल (PKC) लिंक परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए 25 हजार करोड़ रुपए के कार्यादेश (Work Orders) जारी किए जा चुके हैं।
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प्रभाव: यह परियोजना पूर्वी राजस्थान के जिलों के लिए वरदान साबित होगी, जिससे न केवल पेयजल बल्कि सिंचाई की व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी।
शेखावाटी और पश्चिमी राजस्थान के लिए मास्टरप्लान
बैठक के दौरान श्री रावत ने प्रदेश की अन्य प्रमुख परियोजनाओं पर भी प्रकाश डाला:
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यमुना जल समझौता: शेखावाटी क्षेत्र (झुंझुनू, सीकर, चुरू) तक यमुना का पानी पहुँचाने के लिए कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है।
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जल अपवर्तन: पश्चिमी राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में जल के बेहतर प्रबंधन और अपवर्तन (Water Diversion) की योजनाओं पर तकनीकी अध्ययन जारी हैं।
NIH की तकनीकी भूमिका और सहयोग का आग्रह
श्री सुरेश सिंह रावत ने राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की सराहना करते हुए इसे केवल अनुसंधान केंद्र नहीं, बल्कि 'नीति और विज्ञान का अग्रणी केंद्र' बताया।
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राष्ट्रीय हाइड्रोलॉजी परियोजना: डेटा प्रबंधन, बाढ़ पूर्वानुमान और भू-जल संरक्षण में NIH का सहयोग राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण रहा है।
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विशेष आग्रह: मंत्री ने केंद्र सरकार से मांग की कि राजस्थान की भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए वैज्ञानिक संस्थानों, नीति-निर्माताओं और राज्य सरकार के बीच सतत सहयोग बढ़ाया जाए ताकि प्रदेश जल आत्मनिर्भर बन सके।
बैठक में मुख्य उपस्थिति
इस उच्च स्तरीय बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी, अंडमान और निकोबार के उप राज्यपाल एडमिरल डी.के जोशी, जल शक्ति सचिव श्री वी.एल. कांथा राव और आईआईटी रूड़की के निदेशक डॉ. के.के. पंत सहित देश के जाने-माने वैज्ञानिक और विशेषज्ञ शामिल हुए।
निष्कर्ष
राजस्थान अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जल संकट से जूझता रहा है, लेकिन 25 हजार करोड़ के नए निवेश और तकनीकी संस्थानों के सहयोग से 'जल सुरक्षित राजस्थान' का सपना अब हकीकत में बदलता दिख रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह रिपोर्ट जल संसाधन विभाग राजस्थान और NIH रूड़की की आधिकारिक बैठक की कार्यवाही पर आधारित है।
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