अडाणी समूह को बड़ी राहत: अमेरिकी अदालत ने गौतम अडाणी और सागर अडाणी के खिलाफ आपराधिक मामला किया खारिज
अमेरिकी अदालत ने उद्योगपति गौतम अडाणी और सागर अडाणी के खिलाफ लगे सभी आपराधिक धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज किया। अडाणी समूह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली बहुत बड़ी कानूनी राहत।
न्यूयॉर्क / नई दिल्ली।
अडाणी समूह (Adani Group) के चेयरमैन गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है। अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice - DOJ) ने प्रतिभूति (Securities) और वायर धोखाधड़ी से जुड़े एक कथित मामले में दोनों उद्योगपतियों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक आरोपों को वापस ले लिया है।
न्यूयॉर्क की ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दाखिल की गई आधिकारिक कानूनी प्रतियों के अनुसार, न्याय विभाग ने अडाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को स्थायी रूप से निरस्त करने का अनुरोध किया था। इसके बाद अदालत ने मामले को 'विथ प्रेजुडिस' (Dismissed with Prejudice) खारिज करने का आदेश दिया। अमेरिकी कानून में इसका सीधा मतलब यह होता है कि अब भविष्य में इन्हीं आधारों पर इस मामले को दोबारा नहीं खोला जा सकता।
अमेरिकी अभियोजकों ने लिया 'प्रॉसिक्यूटोरियल डिस्क्रीशन' का सहारा
अदालत के समक्ष सौंपे गए दस्तावेजों में अमेरिकी न्याय विभाग ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस पूरे मामले की गहन समीक्षा की है और अब वे इस पर आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करना चाहते हैं।
विभाग की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया, "न्याय विभाग ने इस मामले की समीक्षा की है और अपने विवेक (Prosecutorial Discretion) का इस्तेमाल करते हुए यह निर्णय लिया है कि इन व्यक्तिगत प्रतिवादियों के खिलाफ आपराधिक आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए और अधिक संसाधनों को लगाने की आवश्यकता नहीं है।"
यह घटनाक्रम उन आरोपों के कुछ महीनों बाद आया है, जिसमें अमेरिकी अभियोजकों ने अडाणी और अन्य लोगों पर भारत में नवीकरणीय ऊर्जा (रिनेवेबल एनर्जी) के अनुबंधों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया था। अडाणी समूह शुरू से ही इन सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और बेबुनियाद बताता रहा था।
बचाव पक्ष ने क्षेत्राधिकार और सबूतों पर उठाए थे सवाल
न्यायालय में गौतम अडाणी और सागर अडाणी का प्रतिनिधित्व कर रही कानूनी टीम ने दलील दी थी कि अभियोजन पक्ष कथित रिश्वतखोरी की योजना से जुड़ा कोई भी ठोस या विश्वसनीय सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा है।
इसके साथ ही, बचाव पक्ष ने अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) के क्षेत्राधिकार को भी चुनौती दी थी। वकीलों का तर्क था कि अमेरिकी कानून के तहत निवेशकों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाने या किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष कदाचार का कोई प्रमाण मौजूद नहीं है। अडाणी समूह ने पहले भी यह स्पष्ट किया था कि उनके किसी भी अधिकारी या इकाई पर अमेरिकी फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट (FCPA) के तहत कोई आरोप नहीं लगाया गया है, और फंड जुटाने वाली मुख्य कंपनी 'अडाणी ग्रीन एनर्जी' इस आपराधिक कार्यवाही में सीधे तौर पर पक्षकार नहीं थी।
SEC और अन्य मामले भी सुलझे, लेकिन एक नया समझौता भी आया सामने
आपराधिक मामला खारिज होने से ठीक एक हफ्ते पहले अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) ने भी गौतम अडाणी और सागर अडाणी के खिलाफ चल रहे दीवानी (Civil) आरोपों को बिना किसी गलती की स्वीकारोक्ति के आपसी सहमति से सुलझा लिया था। इस ताजा अदालती आदेश के बाद, अडाणी समूह से जुड़े अमेरिका के लगभग सभी बड़े कानूनी और नियामक मामले पूरी तरह बंद या सेटल हो चुके हैं।
हालांकि, इसी हफ्ते अडाणी समूह से जुड़ा एक और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम भी सामने आया। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के 'ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल' (OFAC) ने तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) आयात से जुड़े कथित प्रतिबंधों के उल्लंघन के मामले में अडाणी एंटरप्राइजेज के साथ एक समझौते की घोषणा की है।
LPG आयात को लेकर OFAC के साथ समझौता
OFAC के आधिकारिक बयान के मुताबिक, ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के "स्पष्ट उल्लंघन" से जुड़े संभावित दीवानी दायित्वों को निपटाने के लिए अडाणी एंटरप्राइजेज 27.5 करोड़ डॉलर (USD 275 Million) का भुगतान करने पर सहमत हुआ है। एजेंसी का आरोप था कि नवंबर 2023 से जून 2025 के बीच कंपनी ने दुबई स्थित एक ट्रेडर के माध्यम से एलपीजी की खेप खरीदी थी, जो कथित रूप से ईरानी मूल की आपूर्ति से जुड़ी थी।
नियामक का दावा था कि इन लेन-देन के कारण अमेरिकी वित्तीय संस्थानों के माध्यम से लगभग 19.2 करोड़ डॉलर के 32 डॉलर-मूल्यवर्ग (US dollar-denominated) के भुगतानों को प्रोसेस किया गया था। अडाणी समूह ने इस समझौते के संबंध में सार्वजनिक रूप से किसी तरह की गड़बड़ी की बात स्वीकार नहीं की है। बहरहाल, अमेरिकी अदालत द्वारा आपराधिक धोखाधड़ी के मामले को पूरी तरह खारिज किए जाने से अडाणी समूह के वैश्विक व्यापार संचालन और भविष्य में फंड जुटाने की योजनाओं के सामने खड़ी एक बहुत बड़ी कानूनी बाधा अब दूर हो गई है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह समाचार लेख सार्वजनिक जागरूकता और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। लेख में दी गई सामग्रियां और तथ्य अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों की फाइलिंग, आधिकारिक बयानों और प्रामाणिक मीडिया रिपोर्ट्स (IANS इनपुट्स सहित) पर आधारित हैं। इस मंच का उद्देश्य किसी भी व्यावसायिक घराने या कानूनी प्रक्रिया का पक्षपोषण करना नहीं है।
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