ईरान युद्ध का कोहराम: चांदी ₹2.28 लाख के रिकॉर्ड स्तर पर, सोने की कीमतों में गिरावट ने सबको चौंकाया
नई दिल्ली/जयपुर, 5 अप्रैल 2026: वैश्विक राजनीति में मचे उथल-पुथल ने भारतीय सराफा बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध के बीच आज चांदी की कीमतों ने एक ऐसा इतिहास रच दिया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। भारतीय बाजार में चांदी की कीमत ₹6,166 की छलांग लगाकर ₹2,28,450 प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। लेकिन इस खबर के साथ ही एक और हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है—जहां चांदी आसमान छू रही है, वहीं सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखी जा रही है। 24 कैरेट सोना अब ₹1,46,360 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है, जो कि पिछले महीने के अपने उच्चतम स्तर से करीब ₹20,000 कम है।
चांदी की बेतहाशा तेजी के पीछे का गणित चांदी की इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे केवल युद्ध का डर नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा आर्थिक तर्क है। चांदी एक ऐसी धातु है जिसका उपयोग केवल गहनों में ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और रक्षा उपकरणों में भी बड़े पैमाने पर होता है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और चिप मैन्युफैक्चरिंग में चांदी का कोई विकल्प नहीं है। ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई चेन के टूटने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर चांदी की 'शॉर्टेज' होने की आशंका है। यही वजह है कि बड़े निवेशक और औद्योगिक घराने भारी मात्रा में चांदी जमा कर रहे हैं, जिससे इसके दाम बेकाबू हो गए हैं।
सोना क्यों हो रहा है सस्ता? आमतौर पर युद्ध के समय सोने के दाम बढ़ते हैं, लेकिन 2026 का यह युद्ध कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने सोने की चमक को फीका कर दिया है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में निवेशक सोने के बजाय डॉलर में निवेश करना सुरक्षित मान रहे हैं। इसके अलावा, ऊंचे भाव पर बड़े फंड्स ने 'प्रॉफिट बुकिंग' (मुनाफा वसूली) शुरू कर दी है, जिससे सोने के दाम नीचे आ रहे हैं। राजस्थान के जयपुर जैसे बड़े सराफा केंद्रों में आज सोने की मांग में थोड़ी तेजी देखी गई है क्योंकि शादी-ब्याह के सीजन के लिए खरीदार इस गिरावट का फायदा उठाना चाहते हैं।
आम आदमी और निवेशकों के लिए सलाह बाजार के जानकारों का मानना है कि सोने में आई यह गिरावट एक "खिड़की" की तरह है, जहां भविष्य के लिए निवेश किया जा सकता है। वहीं चांदी के मामले में सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि यह अपने "ओवरबॉट" (अत्यधिक खरीद) क्षेत्र में है। अगर युद्ध की स्थिति में थोड़ा भी सुधार होता है, तो चांदी में तेज गिरावट आ सकती है। फिलहाल, बाजार पूरी तरह से युद्ध की खबरों पर निर्भर है। आने वाले कुछ दिनों में सोने और चांदी के भाव में ₹5,000 से ₹10,000 तक का उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।
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