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Rupee at All-Time Low: डॉलर के मुकाबले 95.25 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरा रुपया; कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव ने बढ़ाई मुश्किलें

Indian Rupee News: डॉलर के मुकाबले रुपया 95.25 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया संकट ने रुपया को किया कमजोर। जानें अर्थव्यवस्था पर इसका असर।
द्वारा News Room 📅 05 May 2026 👁️ 48 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
Rupee at All-Time Low: डॉलर के मुकाबले 95.25 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरा रुपया; कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव ने बढ़ाई मुश्किलें

भारतीय मुद्रा 'रुपये' की गिरावट का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा। विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2 पैसे और टूटकर 95.25 (अनंतिम) के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू आर्थिक दबावों के कारण निवेशकों की धारणा पर गहरा असर पड़ा है।

बाजार का हाल: इंट्रा-डे में 95.44 तक पहुँचा स्तर

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, मंगलवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 95.30 पर खुला। कारोबार के दौरान यह और फिसलकर 95.44 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक चला गया था। अंत में, यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 2 पैसे की गिरावट के साथ 95.25 पर स्थिर हुआ। गौरतलब है कि सोमवार (4 मई) को भी रुपया 39 पैसे की भारी गिरावट के साथ 95.23 पर बंद हुआ था।

गिरावट के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों ने रुपये में इस ऐतिहासिक गिरावट के लिए तीन मुख्य कारकों को जिम्मेदार ठहराया है:

  1. कच्चे तेल की कीमतें: पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते संकट के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चालू खाता घाटे (CAD) पर दबाव डाल रही है।

  2. विदेशी पूंजी की निकासी: भू-राजनीतिक अस्थिरता के चलते विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पूंजी निकाल रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है।

  3. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुस्ती: एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, मांग में कमी और कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण अप्रैल में विनिर्माण गतिविधियां लगातार दूसरे महीने सुस्त रही हैं।

महंगाई का दोहरा झटका

रुपये की कमजोरी और कच्चे माल की कीमतों (एल्युमीनियम, रसायन, ईंधन और रबर) में उछाल ने इनपुट लागत को बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, समग्र मुद्रास्फीति (Inflation) की दर अगस्त 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है। पेट्रोलियम उत्पादों और बिजली के उपकरणों की कीमतों में वृद्धि का सीधा संबंध पश्चिम एशिया के संघर्ष से बताया जा रहा है।


आगे की राह

यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो रुपये पर दबाव कम होने की उम्मीद कम है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में आरबीआई (RBI) की दखलअंदाजी और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम रुपये की दिशा तय करेंगे।


डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह रिपोर्ट समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) और बाजार के आंकड़ों पर आधारित है। विदेशी मुद्रा बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ या वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है।


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