एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण पर कड़ी सख्ती, 175 जगहों पर विशेष निरीक्षण अभियान
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण की समस्या लंबे समय से गंभीर बनी हुई है। सर्दियों से लेकर गर्मियों तक हवा में मौजूद धूल, धुआं और बारीक कण लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करते हैं। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों ने हाल ही में 175 स्थानों पर बड़े पैमाने पर निरीक्षण अभियान चलाया। यह अभियान निर्माण स्थलों, औद्योगिक इकाइयों, सड़क धूल वाले क्षेत्रों और डीजल जेनरेटर (डीजी) सेट संचालन जैसे प्रमुख स्रोतों पर केंद्रित था।
लगातार बढ़ते प्रदूषण स्तर की वजह से यह निरीक्षण बिल्कुल आवश्यक माना जा रहा था। निरीक्षण में उड़न दस्तों ने यह जांचा कि निर्माण और औद्योगिक गतिविधियां निर्धारित पर्यावरण नियमों के अनुसार चल रही हैं या नहीं। कई स्थानों पर नियमों का पालन नहीं पाया गया, जिसके कारण अधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई की। 10 औद्योगिक इकाइयों को तुरंत बंद करने का आदेश दिया गया, जबकि 27 डीजी सेट सील कर दिए गए। इसके अलावा 8 इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और एक इकाई पर पर्यावरणीय मुआवजा प्रस्तावित किया गया।
निरीक्षण में सबसे अधिक उल्लंघन मेरठ और फरीदाबाद जैसे क्षेत्रों में पाए गए, जहां कुल 140 उल्लंघन दर्ज किए गए। यह स्थिति बताती है कि इन क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत है। कई स्थानों पर निर्माण कार्य के दौरान धूल नियंत्रण उपाय नहीं अपनाए जा रहे थे और कई औद्योगिक इकाइयों में उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था।
इस अभियान के दौरान पिछले निरीक्षणों की समीक्षा भी की गई। अब तक पूरे एनसीआर में 26,000 से अधिक इकाइयों और परियोजनाओं का निरीक्षण किया जा चुका है। इनमें से लगभग 1,755 इकाइयों को नियमों का उल्लंघन करने पर बंद करने के आदेश जारी किए गए थे। अच्छी बात यह रही कि नियमों में सुधार करने के बाद लगभग 1,330 इकाइयों को दोबारा संचालन की अनुमति मिल चुकी है। यह दर्शाता है कि यदि सख्ती से पालन कराया जाए तो सुधार संभव है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एनसीआर की हवा लगातार बिगड़ती जा रही है और इससे लोगों में दमा, एलर्जी, फेफड़ों के संक्रमण जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियमित निगरानी, सख्त कार्रवाई और जनजागरूकता जरूरी है। भवन निर्माण कंपनियों, फैक्ट्रियों और स्थानीय निकायों को धूल नियंत्रण और कचरा प्रबंधन जैसे नियमों का पालन अनिवार्य रूप से करना चाहिए।
सरकार द्वारा चलाया गया यह व्यापक निरीक्षण अभियान एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। यदि इसी तरह की सख्ती लगातार जारी रहे, तो एनसीआर की हवा में आने वाले महीनों में सुधार देखा जा सकता है। हालांकि, इसके लिए प्रशासन के साथ-साथ उद्योगों, निर्माण कंपनियों और नागरिकों का सहयोग भी उतना ही आवश्यक है।
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