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ज्योतिष

आज का पंचांग (16 मई 2026): शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का महासंयोग; जानें अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त

आज का पंचांग 16 मई 2026: शनि जयंती, वट सावित्री व्रत और ज्येष्ठ अमावस्या का शुभ संयोग। जानें आज की तिथि, भरणी नक्षत्र, राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का सटीक समय।
द्वारा News Room 📅 14 May 2026 👁️ 59 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
आज का पंचांग (16 मई 2026): शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का महासंयोग; जानें अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त

आज 16 मई 2026, शनिवार का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। आज का दिन शनि जयंती, वट सावित्री व्रत और दर्श अमावस्या के त्रिवेणी संगम के रूप में मनाया जा रहा है। भरणी नक्षत्र की ऊर्जा साहस और उत्तरदायित्व का बोध कराती है, जो पितृ तर्पण और शनि देव की आराधना के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है।

आज का पंचांग विवरण (16 मई 2026)

वैदिक ज्योतिष और खगोलीय गणनाओं के आधार पर आज के मुख्य घटक निम्नलिखित हैं:

विवरण जानकारी
वार शनिवार
तिथि अमावस्या (रात्रि 01:30 बजे तक, 17 मई की सुबह)
नक्षत्र भरणी (शाम 05:30 बजे तक), तत्पश्चात कृत्तिका
योग सौभाग्य / शोभन
करण चतुष्पाद (दोपहर तक), तत्पश्चात नाग
चंद्र राशि मेष
सूर्य राशि वृषभ
विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थी)
शक संवत 1948 (पराभव)

सूर्योदय और चंद्रोदय का समय (अनुमानित - दिल्ली/NCR)

  • सूर्योदय: सुबह 05:35 बजे

  • सूर्यास्त: शाम 07:05 बजे

  • चंद्रोदय: सुबह 04:50 बजे

  • चंद्रास्त: शाम 06:40 बजे

शुभ और अशुभ मुहूर्त (Daily Muhurat)

हिंदू धर्म में समय की शुद्धता का विशेष महत्व है। किसी भी शुभ कार्य के लिए 'अभिजीत मुहूर्त' का चयन करें और 'राहुकाल' के दौरान महत्वपूर्ण निर्णयों से बचें।

  • अभिजीत मुहूर्त (शुभ): दोपहर 11:51 से 12:44 बजे तक। (यह समय पूजा और नई शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ है)।

  • राहुकाल (वर्जित): सुबह 09:00 से 10:40 बजे तक। (परंपरागत रूप से इस समय में मांगलिक कार्य टालने की सलाह दी जाती है)।

  • अमृत काल: दोपहर 12:15 से 01:58 बजे तक।

आज का विशेष महत्व: शनि जयंती एवं वट सावित्री व्रत

  1. शनि जयंती: न्याय के देवता शनि देव का जन्मोत्सव आज मनाया जा रहा है। इस दिन शनि मंदिर में दीप दान और दान-पुण्य करने से साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

  2. वट सावित्री व्रत: सुहागिन महिलाएं आज वट वृक्ष (बरगद) की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।

  3. दर्श अमावस्या: पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण के लिए आज का दिन विशेष फलदायी है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह पंचांग विवरण विभिन्न विश्वसनीय ज्योतिषीय गणनाओं और पारंपरिक कैलेंडर (जैसे दृक पंचांग) पर आधारित एक सूचनात्मक रिपोर्ट है। स्थानीय अक्षांशों और देशांतरों के कारण विभिन्न शहरों (जैसे दिल्ली, उज्जैन, वाराणसी) में तिथि और मुहूर्त के समय में 5 से 10 मिनट का अंतर हो सकता है। किसी भी बड़े धार्मिक अनुष्ठान, व्रत या पूजा से पहले अपने स्थानीय पुरोहित या प्रमाणित पंचांग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। हम इस जानकारी की पूर्ण सटीकता की गारंटी नहीं देते हैं।

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