आज का पंचांग (14 मई 2026): गुरु प्रदोष व्रत और मधुसूदन द्वादशी का शुभ संयोग; जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

आज का पंचांग 14 मई 2026: जानिए द्वादशी तिथि, रेवती नक्षत्र और गुरु प्रदोष व्रत का महत्व। आज का राहुकाल, शुभ अभिजीत मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का सटीक समय यहाँ देखें।

May 14, 2026 - 00:58
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आज का पंचांग (14 मई 2026): गुरु प्रदोष व्रत और मधुसूदन द्वादशी का शुभ संयोग; जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय
May 14 2026 Panchang

हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है, जो हमें तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति के आधार पर शुभ-अशुभ समय का ज्ञान कराता है। आज 14 मई 2026, गुरुवार को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। धार्मिक दृष्टि से आज का दिन अत्यंत पावन है क्योंकि आज गुरु प्रदोष व्रत और मधुसूदन द्वादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। रेवती नक्षत्र और प्रीति योग की उपस्थिति इस दिन को आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य और नई शुरुआत के लिए अनुकूल बनाती है।

आज का पंचांग विवरण (14 मई 2026)

खगोलीय गणनाओं और वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज का पंचांग विवरण निम्नलिखित है:

विवरण जानकारी
वार गुरुवार
तिथि द्वादशी (सुबह 11:20 बजे तक), तत्पश्चात त्रयोदशी
नक्षत्र रेवती (रात्रि 10:33 बजे तक), तत्पश्चात अश्विनी
योग प्रीति योग
करण तैतिल (सुबह 11:20 तक), उसके बाद गर
चंद्र राशि मीन
सूर्य राशि वृषभ
विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थी)
शक संवत 1948 (पराभव)

सूर्योदय और चंद्रोदय का समय (अनुमानित - दिल्ली/उत्तर भारत)

  • सूर्योदय: सुबह 05:31 बजे

  • सूर्यास्त: शाम 07:04 बजे

  • चंद्रोदय: सुबह 03:29 बजे (15 मई की सुबह)

  • चंद्रास्त: दोपहर 04:13 बजे

शुभ और अशुभ मुहूर्त (Daily Muhurat)

हिंदू परंपरा में किसी भी मांगलिक कार्य को करने से पहले 'अभिजीत मुहूर्त' को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, जबकि 'राहुकाल' के दौरान शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

  • अभिजीत मुहूर्त (शुभ): दोपहर 11:51 से 12:44 बजे तक। (यह समय किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए सर्वोत्तम है)।

  • राहुकाल (वर्जित): दोपहर 02:01 से 03:41 बजे तक। (मान्यतानुसार इस समय में किए गए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं)।

  • अमृत काल: शाम 07:58 से रात 09:44 बजे तक।

आज का विशेष महत्व: गुरु प्रदोष व्रत

गुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत 'गुरु प्रदोष' कहलाता है। यह व्रत शत्रुओं पर विजय और ज्ञान की प्राप्ति के लिए किया जाता है। आज भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु (मधुसूदन रूप) की पूजा का भी विधान है। रेवती नक्षत्र होने के कारण आज का दिन यात्रा और व्यापारिक चर्चाओं के लिए भी सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह पंचांग विभिन्न ज्योतिषीय गणनाओं और पारंपरिक स्रोतों (जैसे दृक पंचांग) पर आधारित एक सूचनात्मक लेख है। विभिन्न शहरों के अक्षांश और देशांतर के कारण तिथि और मुहूर्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। किसी भी महत्वपूर्ण अनुष्ठान या सटीक गणना के लिए अपने स्थानीय विद्वान पंडित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें। हम इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी लाभ या हानि का दावा नहीं करते हैं।

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