'ग्लोरी' रिव्यू: रिंग की रंजिश और रिश्तों का रहस्य; क्या पुलकित-दिव्येंदु की जोड़ी ने मारा नॉकआउट पंच?
'ग्लोरी' वेब सीरीज रिव्यू: पुलकित सम्राट और दिव्येंदु की धमाकेदार एक्टिंग से सजी यह मर्डर मिस्ट्री और स्पोर्ट्स ड्रामा की कहानी आपको अंत तक बांधे रखेगी। जानें क्या यह सीरीज नेटफ्लिक्स पर आपकी उम्मीदों पर खरी उतरती है।
नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज 'ग्लोरी' (Glory) खेलों की दुनिया को अपराध की काली गलियों से जोड़ने का एक साहसिक प्रयास है। हरियाणा की सोंधी मिट्टी और अखाड़ों की पृष्ठभूमि पर आधारित यह शो केवल बॉक्सिंग रिंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह एक गहरी मर्डर मिस्ट्री और पारिवारिक प्रतिशोध की दास्तां के रूप में उभरता है। करण अंशुमन और वैभव विशाल के निर्देशन में बनी यह सीरीज एक स्पोर्ट्स ड्रामा होने के साथ-साथ एक भावनात्मक और सस्पेंस से भरी यात्रा भी है।
कहानी का ताना-बाना: प्यार, खेल और प्रतिशोध
कहानी की शुरुआत हरियाणा के एक उभरते हुए मुक्केबाज और उसके कोच की बेटी के बीच पनपते प्रेम से होती है। यह प्रेम कहानी तब एक भयानक मोड़ लेती है जब दोनों की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है। इस हत्याकांड का रहस्य सुलझाने के लिए कोच के दो बेटे, आर्यन (पुलकित सम्राट) और वीर (दिव्येंदु), सालों बाद अपने गांव लौटते हैं।
7 एपिसोड के सफर में यह सीरीज न केवल कातिल की तलाश करती है, बल्कि उन पुरानी कड़वाहटों को भी कुरेदती है जिनकी वजह से दोनों भाइयों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। क्या वे अपनी बहन को इंसाफ दिला पाएंगे? यही इस सीरीज का मुख्य आकर्षण है।
अभिनय का पावर-पैक प्रदर्शन
इस सीरीज की सबसे बड़ी जान इसके कलाकार हैं:
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पुलकित सम्राट: पुलकित ने अपनी 'चॉकलेट बॉय' वाली छवि को पूरी तरह तोड़ दिया है। उनका अभिनय बेहद संयमित और गंभीर है। उनके चेहरे के भाव एक ऐसे व्यक्ति का दर्द बयां करते हैं जो अपनी जड़ों से कट चुका है।
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दिव्येंदु: दिव्येंदु ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे केवल कॉमेडी तक सीमित नहीं हैं। एक आक्रामक, जिद्दी और भावुक भाई के रूप में उनका अभिनय सीरीज को एक अलग ऊर्जा और तीव्रता देता है।
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सुविंदर विक्की: एक कड़क कोच और लाचार पिता के रूप में सुविंदर विक्की ने बेहतरीन काम किया है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस कहानी को एक वजन (Gravitas) प्रदान करती है।
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सह-कलाकार: आशुतोष राणा की छोटी लेकिन प्रभावी भूमिका, जन्नत जुबैर और सयानी गुप्ता का सधा हुआ अभिनय कहानी के अलग-अलग पहलुओं को मजबूती से पेश करता है।
तकनीकी पक्ष: निर्देशन और पटकथा
सीरीज का परिवेश बेहद वास्तविक है। हरियाणा की बोली, रहन-सहन और मुक्केबाजी के अखाड़ों का चित्रण इतना जीवंत है कि दर्शक खुद को कहानी का हिस्सा महसूस करने लगते हैं। निर्देशन की बात करें तो करण अंशुमन और वैभव विशाल ने थ्रिलर और इमोशन का अच्छा तालमेल बिठाया है।
हालांकि, पटकथा में बीच के कुछ एपिसोड में दोहराव महसूस होता है और कहानी थोड़ी धीमी पड़ जाती है, लेकिन आखिरी दो एपिसोड की रफ्तार और चौंकाने वाला क्लाइमेक्स दर्शकों को अंत तक बांधे रखने में सफल रहता है।
क्यों देखें यह सीरीज? (विशेषज्ञ राय)
अगर आप केवल 'रॉकी' जैसी पारंपरिक स्पोर्ट्स फिल्म की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह शो उससे कहीं ज्यादा गहरा है। यह एक 'रूटेड' (Rooted) कहानी है जो भारत के छोटे शहरों की राजनीति, इज्जत के नाम पर होने वाले अपराध और खेल के बीच के संघर्ष को दिखाती है। संवाद तीखे हैं जो कहानी के तनाव को और बढ़ा देते हैं।
निष्कर्ष
'ग्लोरी' कुछ जगहों पर थोड़ी डगमगाती जरूर है, लेकिन अपने शानदार अभिनय और प्रभावशाली अंत के कारण यह एक 'मस्ट-वॉच' (Must-Watch) सीरीज बन जाती है। यह नेटफ्लिक्स इंडिया के लिए एक ठोस कदम है जो दर्शकों को एक नई तरह की 'देसी' क्राइम-स्पोर्ट्स कहानी परोसता है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सूचनात्मक और समीक्षा के उद्देश्य से लिखा गया है। इस समीक्षा में व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विश्लेषण पर आधारित हैं। इस सीरीज में दिखाए गए पात्र, घटनाएँ और चित्रण काल्पनिक हो सकते हैं। दर्शकों को सलाह दी जाती है कि वे सीरीज की उम्र संबंधी रेटिंग (Age Rating) और कंटेंट चेतावनी को ध्यान में रखते हुए ही इसे देखें। यह लेख किसी भी प्रकार के कॉपीराइट उल्लंघन का समर्थन नहीं करता है।
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