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Cannes 2026: 'कला और राजनीति को अलग नहीं किया जा सकता'—जूरी अध्यक्ष पार्क चान-वुक का बड़ा बयान

Cannes 2026: जूरी हेड पार्क चान-वुक ने कहा कि कला और राजनीति को विभाजित नहीं किया जाना चाहिए। जानें प्रोपेगेंडा और सिनेमा पर उनके विचार।
द्वारा Bhupendra Singh Sonwal 📅 13 May 2026 👁️ 60 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
Cannes 2026: 'कला और राजनीति को अलग नहीं किया जा सकता'—जूरी अध्यक्ष पार्क चान-वुक का बड़ा बयान

कान्स फिल्म फेस्टिवल के 79वें संस्करण की शुरुआत के साथ ही जूरी अध्यक्ष और दिग्गज फिल्मकार पार्क चान-वुक ने सिनेमा के उद्देश्य और उसकी अभिव्यक्ति पर अपनी बेबाक राय रखी है। फेस्टिवल की ओपनिंग प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि राजनीति और कला एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे एक साथ अस्तित्व में रह सकते हैं।

प्रचार (Propaganda) और सिनेमा के बीच का अंतर

पार्क चान-वुक ने राजनीतिक सिनेमा और प्रचार के बीच एक महीन रेखा खींचते हुए कहा:

  • कलात्मक अभिव्यक्ति: यदि किसी फिल्म में राजनीतिक बयान है, तो उसे कला के विरुद्ध नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही, यदि कोई फिल्म राजनीतिक नहीं है, तो उसे नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।

  • प्रचार बनाम कला: उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर कोई राजनीतिक बयान कलात्मक रूप से व्यक्त नहीं किया गया है, तो वह केवल 'प्रोपेगेंडा' (प्रचार) बनकर रह जाएगा।"

बर्लिन फिल्म फेस्टिवल के विवाद पर पलटवार?

पार्क के इन बयानों को कुछ महीने पहले बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में जूरी अध्यक्ष विम वेंडर्स (Wim Wenders) द्वारा दी गई टिप्पणी के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। वेंडर्स ने कहा था कि फिल्मकारों को राजनीति से दूर रहना चाहिए। पार्क चान-वुक ने इसके उलट अपनी भूमिका को 'बिना किसी पूर्वाग्रह के एक सामान्य दर्शक की नजर' से फिल्में देखने वाला बताया, जो सरप्राइज होने के लिए तैयार है।

डेमी मूर ने भी रखा अपना पक्ष

जूरी सदस्य और मशहूर अभिनेत्री डेमी मूर ने भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर कलाकार खुद को सेंसर करना शुरू कर देंगे, तो वे रचनात्मकता के मूल केंद्र को ही खो देंगे, जहाँ से सच्चाई और जवाब निकलते हैं।

विशेषज्ञ विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है पार्क का यह रुख?

पार्क चान-वुक (Oldboy, Decision to Leave के निर्देशक) अपनी फिल्मों में अक्सर गहरे सामाजिक और मनोवैज्ञानिक विषयों को कलात्मक ढंग से पिरोने के लिए जाने जाते हैं। उनका यह बयान वैश्विक स्तर पर बढ़ते सेंसरशिप के दौर में कलाकारों को अपनी आवाज बुलंद रखने का साहस देता है। 23 मई को फेस्टिवल के समापन पर यह देखना दिलचस्प होगा कि जूरी किन फिल्मों को 'पाम डी'ओर' (Palme d'Or) के लिए चुनती है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख कान्स फिल्म फेस्टिवल की आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। व्यक्त किए गए विचार फिल्मकारों के व्यक्तिगत और पेशेवर दृष्टिकोण हैं।

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संपादक (Editor)

Bhupendra Singh Sonwal

भूपेन्द्र सिंह सोनवाल एक प्रखर डिजिटल पत्रकार और भारतीय समाचार मीडिया कंपनी 'मिशन की आवाज' के संस्थापक हैं। वे मुख्य रूप से राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, और नीतिगत मामलों पर तीखी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। आंकड़ों की तह तक जाना और जमीनी सच को बेबाकी से पेश करना उनकी विशेषता है। तथ्य-आधारित और स्वतंत्र पत्रकारिता के जरिए वे समाज के हर वर्ग तक सही सूचना पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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