शिक्षा के क्षेत्र में मिसाल: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय तिघरिया की सूरत बदलने वाले प्रधानाचार्य गोविंद सिंह गुर्जर की प्रेरणादायी कहानी

जानिए कैसे प्रधानाचार्य गोविंद सिंह गुर्जर ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय तिघरिया की तस्वीर बदली। 100% परिणाम, 97% टॉपर और जनसहयोग से बनी डिजिटल लाइब्रेरी की प्रेरणादायी कहानी।

May 10, 2026 - 09:13
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शिक्षा के क्षेत्र में मिसाल: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय तिघरिया की सूरत बदलने वाले प्रधानाचार्य गोविंद सिंह गुर्जर की प्रेरणादायी कहानी
Principal Govind Singh Gurjar GSSS Tighariya Transformation

करौली (राजस्थान): शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है, लेकिन एक साधारण सरकारी स्कूल को आधुनिक सुविधाओं से लैस उत्कृष्ट संस्थान में बदलना किसी चुनौती से कम नहीं है। राजस्थान के तिघरिया गाँव में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय आज एक ऐसे ही बदलाव का गवाह बना है, और इस बदलाव के पीछे जिस व्यक्ति का विज़न और अटूट परिश्रम है, वह हैं प्रधानाचार्य गोविंद सिंह गुर्जर। उनकी कार्यशैली और दूरदर्शिता ने यह साबित कर दिया है कि यदि एक नेतृत्वकर्ता ठान ले, तो संसाधनों की कमी कभी सफलता के आड़े नहीं आ सकती।

अनुशासन की नई परिभाषा: मिसाल पेश करता नेतृत्व

अक्सर सरकारी संस्थानों में समय की पाबंदी को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन गोविंद सिंह गुर्जर ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। उनका मानना है कि अनुशासन केवल शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में होना चाहिए। वे स्वयं प्रतिदिन विद्यालय के निर्धारित समय से कम से कम 10 मिनट पहले परिसर में पहुँच जाते हैं।

इस छोटी सी दिखने वाली आदत ने स्कूल के पूरे स्टाफ पर गहरा प्रभाव डाला है। जब स्कूल का मुखिया समय से पहले उपस्थित हो, तो शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच समय की अहमियत को लेकर एक स्वतः अनुशासन पैदा हो जाता है। आज इस विद्यालय का स्टाफ न केवल समय का पाबंद है, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों के प्रति पहले से कहीं अधिक निष्ठावान भी है।

शैक्षणिक उत्कृष्टता: 100 प्रतिशत परिणाम और टॉपर्स की खान

किसी भी विद्यालय की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना वहां के विद्यार्थियों का परिणाम होता है। गोविंद सिंह गुर्जर के नेतृत्व में विद्यालय ने शैक्षणिक क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। पिछले कुछ वर्षों से विद्यालय का बोर्ड परीक्षा परिणाम लगातार 100 प्रतिशत रहा है। यह उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी के कारण परिणाम प्रभावित होते हैं।

प्रधानाचार्य गुर्जर के मार्गदर्शन में न केवल सभी छात्र उत्तीर्ण हो रहे हैं, बल्कि वे मेरिट में भी अपनी जगह बना रहे हैं। उनके कार्यकाल में विद्यालय का एक छात्र 97% अंक प्राप्त कर न केवल स्कूल, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर चुका है। यह इस बात का प्रमाण है कि यहां दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता किसी भी निजी नामी संस्थान से कम नहीं है।

जनसहयोग से कायाकल्प: 40 लाख रुपये के विकास कार्य

एक सरकारी विद्यालय को आधुनिक बनाना वित्तीय चुनौतियों से भरा होता है। लेकिन गोविंद सिंह गुर्जर ने केवल सरकारी बजट का इंतजार करने के बजाय समुदाय और भामाशाहों (दानदाताओं) को विद्यालय से जोड़ने का अनूठा प्रयास किया। उन्होंने जन प्रतिनिधियों और स्थानीय समाजसेवियों को शिक्षा के महत्व से अवगत कराया और उनके सहयोग से विद्यालय में अब तक लगभग 40 लाख रुपये के विकास कार्य करवाए जा चुके हैं।

इन विकास कार्यों के माध्यम से विद्यालय के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है। स्कूल की दीवारों पर ज्ञानवर्धक पेंटिंग्स, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, और सुंदर बगीचों ने विद्यालय के सौंदर्यकरण में चार चाँद लगा दिए हैं। एक सुंदर वातावरण विद्यार्थियों के मानसिक विकास और पढ़ाई में रुचि बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक होता है।

डिजिटल क्रांति: गांव में मिली एसी और वाई-फाई वाली लाइब्रेरी

गोविंद सिंह गुर्जर की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी उपलब्धि है—विद्यालय में एक आधुनिक लाइब्रेरी का निर्माण। ग्रामीण परिवेश के बच्चों के लिए जहाँ पढ़ाई के लिए शांत कोना मिलना भी मुश्किल होता है, वहाँ इस स्कूल में एयर-कंडीशनर (AC) और हाई-स्पीड वाई-फाई (Wi-Fi) जैसी सुविधाओं से युक्त डिजिटल लाइब्रेरी तैयार की गई है।

यह लाइब्रेरी न केवल इस विद्यालय के छात्रों के लिए, बल्कि गांव के अन्य जरूरतमंद बच्चों के लिए भी पूरी तरह निःशुल्क है। यहाँ बैठकर छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं और इंटरनेट के माध्यम से दुनिया भर की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह कदम गांव के बच्चों को सीधे डिजिटल इंडिया की मुख्यधारा से जोड़ता है।

सर्वांगीण विकास पर जोर: केवल पढ़ाई ही नहीं, संस्कार भी

प्रधानाचार्य गुर्जर का दर्शन स्पष्ट है—शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। वे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास (Holistic Development) पर जोर देते हैं। विद्यालय में खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियां और नैतिक शिक्षा के सत्र नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। उनका मानना है कि एक सफल विद्यार्थी वह है जो अकादमिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ एक जिम्मेदार और अनुशासित नागरिक भी बने।

वे विद्यार्थियों के साथ एक मार्गदर्शक (Mentor) की तरह पेश आते हैं और उनके सपनों को दिशा देने के लिए करियर काउंसलिंग सत्रों पर भी ध्यान देते हैं। उनकी मेहनत और समर्पण का ही परिणाम है कि आज तिघरिया विद्यालय क्षेत्र के अन्य सरकारी स्कूलों के लिए एक 'रोल मॉडल' बन गया है।

निष्कर्ष: एक सच्चे शिक्षा नायक का सफर

गोविंद सिंह गुर्जर ने अपने कार्यों से यह सिद्ध कर दिया है कि एक प्रधानाचार्य केवल स्कूल का प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि समाज का निर्माता होता है। उनकी दूरदर्शिता, अनुशासन और सामुदायिक भागीदारी ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय तिघरिया की तस्वीर को सुनहरा बना दिया है। वे आज के दौर में उन सभी शिक्षकों और प्रशासकों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, जो शिक्षा के क्षेत्र में कुछ बड़ा और सार्थक करना चाहते हैं।


Disclaimer: यह लेख प्रधानाचार्य गोविंद सिंह गुर्जर के शैक्षणिक योगदान और राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय तिघरिया में हुए विकास कार्यों पर आधारित एक प्रेरणादायक फीचर रिपोर्ट है। लेख में उल्लिखित आंकड़े और उपलब्धियां उपलब्ध सूचनाओं और विद्यालय की प्रगति रिपोर्ट के आधार पर दी गई हैं। किसी भी तथ्यात्मक पुष्टि के लिए शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड का संदर्भ लिया जा सकता है।


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Bhupendra Singh Sonwal Bhupendra Singh Sonwal is a senior journalist and writer, he is also the founder of Mission Ki Awaaz, Bhupendra Singh Sonwal was born on 07 June 1997 in village Kanchroli, located near tehsil Hindaun City of Karauli district of Rajasthan.