हंगरी में नए युग का आगाज: पीटर मग्यार ने ली प्रधानमंत्री पद की शपथ; विक्टर ओर्बन के 16 साल के शासन का अंत
हंगरी में पीटर मग्यार ने नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, जिससे विक्टर ओर्बन का 16 साल का शासन खत्म हो गया। जानें मग्यार की जीत और यूरोपीय संघ के साथ उनके नए रिश्तों की योजना।
हंगरी की राजनीति में शनिवार को वह ऐतिहासिक पल आया जब 45 वर्षीय वकील पीटर मग्यार ने संसद भवन में शपथ ग्रहण की। मग्यार की पार्टी 'तिस्ज़ा' ने विक्टर ओर्बन की राष्ट्रवादी-लोकलुभावन 'फिडेज़' (Fidesz) पार्टी को करारी शिकस्त दी है। यह जीत हंगरी के पोस्ट-कम्युनिस्ट काल में अब तक की सबसे बड़ी चुनावी जीत मानी जा रही है।
संसद का नया समीकरण
नवनिर्वाचित संसद में अब शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल चुका है:
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तिस्ज़ा पार्टी: संसद की कुल 199 सीटों में से 141 सीटों पर कब्जा कर पूर्ण बहुमत हासिल किया है।
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फिडेज़-केडीएनपी (ओर्बन की पार्टी): इनकी सीटें 135 से घटकर अब मात्र 52 रह गई हैं।
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एमआई हज़ानक (Mi Hazánk): इस दक्षिणपंथी दल के पास 6 सीटें हैं।
यह 1990 के बाद पहली बार है जब विक्टर ओर्बन संसद के सत्र में हिस्सा नहीं लेंगे। ओर्बन ने हार स्वीकार करते हुए अब अपनी राजनीतिक जमीन को फिर से तैयार करने की बात कही है।
भ्रष्टाचार मुक्त हंगरी और आर्थिक सुधार का वादा
पीटर मग्यार, जो पहले ओर्बन की पार्टी का ही हिस्सा थे, ने अब अपनी अलग राह चुनी है। उन्होंने शपथ ग्रहण के बाद जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता सरकारी भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करना है। मग्यार के अनुसार, भ्रष्टाचार ने हंगरी के नागरिकों के आर्थिक अवसरों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
यूरोपीय संघ (EU) के साथ सुधरेंगे संबंध
विक्टर ओर्बन के कार्यकाल में हंगरी और यूरोपीय संघ के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई थी, जिसका मुख्य कारण ओर्बन का रूस के प्रति झुकाव था। प्रधानमंत्री मग्यार ने इसे सुधारने का संकल्प लिया है:
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यूरोपीय फंड: मग्यार का लक्ष्य उन 17 बिलियन यूरो (करीब $20 बिलियन) के फंड को अनब्लॉक करना है, जिन्हें ईयू ने नियम-कानून और भ्रष्टाचार की चिंताओं के कारण फ्रीज कर दिया था।
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प्रतीकात्मक बदलाव: ओर्बन सरकार द्वारा 2014 में हटाए गए यूरोपीय संघ के झंडे को एक बार फिर संसद भवन पर सम्मान के साथ फहराने का निर्णय लिया गया है।
जनता का जश्न और 'शासन-परिवर्तन' समारोह
मग्यार ने इस बदलाव को 'शासन-परिवर्तन' (Regime Change) का नाम दिया है और बुडापेस्ट की सड़कों पर जनता को जश्न मनाने के लिए आमंत्रित किया है। बुडापेस्ट के मेयर गेरगेली कराचसोनी ने भी इस बदलाव का स्वागत करते हुए कहा कि अंततः हंगरी ने एक दमनकारी युग को पीछे छोड़ दिया है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसी (AP) और हंगरी के आधिकारिक घटनाक्रमों पर आधारित है। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें व्यक्त किए गए राजनीतिक विचार संबंधित पार्टियों और नेताओं के हैं।
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