अलीगढ़ का किसान अमानत शरण नौ दिनों से धरने पर, अब तक नहीं मिली सुनवाई
अलीगढ़ के गरीब किसान अमानत शरण 29 सितंबर से भू-माफियाओं के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। नौ दिन बीतने के बावजूद प्रशासन ने कोई सुनवाई नहीं की।
अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश): गरीब किसान अमानत शरण बीते नौ दिनों से जिला मुख्यालय पर धरने पर बैठे हैं। यह धरना उन्होंने अपने पुश्तैनी खेत की जमीन को भू-माफियाओं से बचाने के लिए शुरू किया है। अमानत शरण का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोग उनकी जमीन पर जबरन कब्जा करना चाहते हैं और प्रशासन उनकी कोई मदद नहीं कर रहा।
धरने की शुरुआत 29 सितंबर को हुई थी। तब से लेकर अब तक अमानत शरण लगातार मुख्यालय के बाहर बैठे हैं—बिना किसी प्रशासनिक अधिकारी की ओर से आश्वासन या कार्रवाई के।
बारिश हो या तेज धूप, भूख हो या मच्छरों का आतंक—अमानत शरण का हौसला अब तक नहीं टूटा। स्थानीय लोग बताते हैं कि कई बार उन्होंने प्रशासन का ध्यान इस ओर खींचने की कोशिश की, लेकिन अभी तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
धरने के दौरान अमानत शरण की तबीयत भी बिगड़ने लगी है, लेकिन उनका कहना है कि वे तब तक नहीं उठेंगे जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता। "मेरी जमीन मेरी मां की तरह है। मैं आखिरी दम तक इसकी हिफाजत करूंगा," अमानत ने रोते हुए कहा।
किस बात का है विवाद?
अमानत शरण का कहना है कि उनके पास जमीन के कागज़ात पूरे हैं, लेकिन कुछ स्थानीय दबंगों ने कागजात में गड़बड़ी करवाकर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की। शिकायतें करने के बावजूद पुलिस और प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।
प्रशासन की चुप्पी:
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक बात यह है कि नौ दिन गुजरने के बावजूद किसी प्रशासनिक अधिकारी ने उनसे मिलने की कोशिश नहीं की है। न तो कोई जांच समिति बनाई गई और न ही कोई सुनवाई हुई।
अब क्या उम्मीद?
धरने का आज नौवां दिन है। किसान अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद अब कोई अधिकारी उनकी बात सुनेगा, शायद अब उन्हें इंसाफ मिलेगा। सवाल यह है कि क्या इस उम्मीद का कोई अंत होगा या फिर एक और गरीब किसान अपनी जमीन के साथ-साथ अपनी उम्मीद भी खो देगा?
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