स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास भारतीय मालवाहक जहाज में लगी आग; 1 की मौत, 4 घायल
Strait of Hormuz Incident: भारतीय मालवाहक जहाज (Dhow) में आग लगने से एक भारतीय की मौत और 4 घायल। दुबई में चल रहा है घायलों का इलाज। भारतीय दूतावास सहायता में जुटा।
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के पास शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हो गया। सामान्य कार्गो ले जा रही एक लकड़ी की नाव (धो) में अचानक आग लग गई और वह पलट गई। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस जहाज पर चालक दल के कुल 18 सदस्य सवार थे, जो सभी भारतीय नागरिक हैं।
हादसे का विवरण और राहत कार्य
आग लगने के बाद जहाज समुद्र में असंतुलित होकर पलट गया। गनीमत रही कि पास से गुजर रहे एक अन्य जहाज ने तत्परता दिखाते हुए चालक दल के सदस्यों को रेस्क्यू कर लिया।
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हताहत: इस घटना में एक भारतीय नागरिक की मृत्यु हो गई है।
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घायल: चार सदस्य आग की चपेट में आने से झुलस गए हैं। सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है कि घायलों का इलाज वर्तमान में दुबई में चल रहा है और वे अब खतरे से बाहर हैं।
भारतीय दूतावास की सक्रियता
घटना की सूचना मिलते ही दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारी सक्रिय हो गए। अधिकारियों ने शुक्रवार रात को ही बचाए गए भारतीय नागरिकों से मुलाकात की और उनकी स्थिति का जायजा लिया। दूतावास वर्तमान में जहाज के मालिक के संपर्क में है और प्रभावित परिवारों व चालक दल को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।
क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा पर विदेश मंत्रालय का बयान
गुरुवार को ही विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने क्षेत्र में भारतीय जहाजों की आवाजाही पर जानकारी साझा की थी। उन्होंने बताया था कि राजनयिक प्रयासों के बाद 11 भारतीय जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर निकल चुके हैं, जबकि 13 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में मौजूद हैं।
भारत सरकार लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है ताकि शेष जहाजों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की जा सके और वे बिना किसी बाधा के भारत पहुंच सकें।
निष्कर्ष
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील क्षेत्र में हुई यह घटना समुद्री सुरक्षा की चुनौतियों को फिर से रेखांकित करती है। वर्तमान में अधिकारी आग लगने के सटीक कारणों की जांच कर रहे हैं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट आधिकारिक सरकारी सूत्रों और समाचार एजेंसी (ANI) के इनपुट्स पर आधारित है। घटना के कारणों की विस्तृत जांच और तकनीकी विवरण संबंधित समुद्री प्राधिकरणों द्वारा जारी किए जाने शेष हैं।
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