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होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: दुनिया भर में सूखने लगी तेल पाइपलाइनें; भारत, जापान समेत इन देशों पर मंडराया ऊर्जा संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल संकट गहराया। भारत, जापान और पाकिस्तान सहित एशियाई देशों में स्टॉक 10 साल के निचले स्तर पर। जानें क्या होगा अगर जून तक नहीं खुला यह समुद्री रास्ता।
द्वारा Bhupendra Singh Sonwal 📅 10 May 2026 👁️ 198 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: दुनिया भर में सूखने लगी तेल पाइपलाइनें; भारत, जापान समेत इन देशों पर मंडराया ऊर्जा संकट

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अवरुद्ध कर दिया है। पिछले दो महीनों से जारी इस नाकेबंदी के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति में एक अरब बैरल से अधिक की कमी आई है। ऊर्जा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह मार्ग एक महीने और बंद रहा, तो दुनिया भर में ईंधन का हाहाकार मच सकता है और कीमतों में अनियंत्रित उछाल देखने को मिल सकता है।

मॉर्गन स्टेनली और आईईए (IEA) के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, 1 मार्च से 25 अप्रैल 2026 के बीच वैश्विक तेल भंडार में प्रतिदिन 48 लाख बैरल की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट वैश्विक तेल इतिहास की किसी भी तिमाही में दर्ज की गई सबसे तेज कमी है।


एशियाई देशों पर सबसे बड़ा खतरा: भारत और जापान की स्थिति नाजुक

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन आयात पर निर्भर एशियाई अर्थव्यवस्थाएं इस संकट के सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं।

  • भारत और जापान: इन दोनों देशों में तेल का स्टॉक पिछले 10 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। जापान के भंडार में 50% और भारत के स्टॉक में 10% की गिरावट आई है। हालांकि भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि रिफाइनरी इन्वेंटरी पर्याप्त है, लेकिन निजी तौर पर रिफाइनर्स आपूर्ति में भारी कमी की बात स्वीकार कर रहे हैं।

  • सबसे संवेदनशील देश: इंडोनेशिया, वियतनाम, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देशों के पास मात्र एक महीने से भी कम का बैकअप बचा है। जून की शुरुआत तक मार्ग नहीं खुला, तो इन देशों में पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत हो सकती है।

वैश्विक भंडार (Oil Buffer) का तेजी से घटना

जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी की नताशा कानेवा ने आगाह किया है कि वैश्विक तेल प्रणालियां 'ऑपरेशनल मिनिमम' स्तर की ओर बढ़ रही हैं।

  • अमेरिका: दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक होने के बावजूद अमेरिका में डिस्टिलेट स्टॉक 2005 के बाद सबसे निचले स्तर पर है।

  • यूरोप: यूरोप में जेट फ्यूल (विमान ईंधन) का संकट सबसे गहरा है। एम्स्टर्डम-रॉटरडैम-एंटवर्प हब में स्टॉक एक तिहाई गिर गया है, जिससे विमानन क्षेत्र पर ब्रेक लग सकता है।


आर्थिक मंदी और महंगाई का बढ़ता जोखिम

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कमी केवल आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगी। इसका सीधा असर वैश्विक महंगाई पर पड़ेगा। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें माल ढुलाई और उत्पादन लागत को बढ़ा देंगी, जिससे वैश्विक आर्थिक मंदी (Global Recession) का खतरा और अधिक वास्तविक हो गया है। चीन की मांग में थोड़ी कमी ने फिलहाल आपूर्ति को पूरी तरह टूटने से बचाया है, लेकिन यह सुरक्षा कवच अधिक समय तक नहीं टिक पाएगा।


अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स (ब्लूमबर्ग, मॉर्गन स्टेनली) और ऊर्जा विश्लेषकों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों पर आधारित है। तेल भंडार और आपूर्ति की स्थिति भू-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। यह जानकारी केवल पाठकों के ज्ञानवर्धन के लिए है।


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संपादक (Editor)

Bhupendra Singh Sonwal

भूपेन्द्र सिंह सोनवाल एक प्रखर डिजिटल पत्रकार और भारतीय समाचार मीडिया कंपनी 'मिशन की आवाज' के संस्थापक हैं। वे मुख्य रूप से राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, और नीतिगत मामलों पर तीखी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। आंकड़ों की तह तक जाना और जमीनी सच को बेबाकी से पेश करना उनकी विशेषता है। तथ्य-आधारित और स्वतंत्र पत्रकारिता के जरिए वे समाज के हर वर्ग तक सही सूचना पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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