🕒 30 June 2026, Tuesday
राजस्थान

भोपर हादसा: बिजली विभाग की लापरवाही से तीन की मौत, मुआवजे और सरकारी नौकरी पर सहमति के बाद समाप्त हुआ धरना

टोडाभीम के भोपर गांव में बिजली विभाग की लापरवाही से हुए हादसे में तीन लोगों की मौत। लंबे गतिरोध के बाद प्रशासन और ग्रामीणों के बीच 12.50 लाख रुपये के मुआवजे और सरकारी नौकरी पर बनी सहमति।
द्वारा Bhupendra Singh Sonwal 📅 30 Jun 2026 👁️ 75 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
भोपर हादसा: बिजली विभाग की लापरवाही से तीन की मौत, मुआवजे और सरकारी नौकरी पर सहमति के बाद समाप्त हुआ धरना

करौली: टोडाभीम क्षेत्र के भोपर गांव में बिजली विभाग की कथित लापरवाही ने तीन जिंदगियां लील लीं। इस दर्दनाक हादसे में जाटव समाज के तीन लोगों की मृत्यु के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने घटनास्थल पर लंबा धरना दिया। आखिरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रतिनिधियों के बीच हुई मैराथन वार्ता के बाद सहमति बनी, जिसके बाद घटनास्थल पर ही तीनों मृतकों का पोस्टमार्टम करवाया गया।

मुआवजे और सरकारी नौकरी पर बनी सहमति

लंबे गतिरोध को समाप्त करने के लिए प्रशासन और पीड़ित परिवारों के बीच हुए समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं:

धरने में इन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी

इस पूरे घटनाक्रम और वार्ता के दौरान जिले के कई बड़े अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर डटे रहे। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त जिला कलेक्टर (करौली), उपखंड अधिकारी (टोडाभीम), अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक (करौली) और हिंडौन के डीवाईएसपी (DYSP) मौजूद रहे।

वहीं, जनप्रतिनिधियों और समाज के नेताओं में टोडाभीम विधायक घनश्याम मेहर, हिंडौन विधायक अनीता जाटव, जिला प्रमुख प्रतिनिधि रक्षीलाल बैरवा, जिला जाटव समाज सुधार समिति के अध्यक्ष हट्टीराम ठेकेदार, युवा अध्यक्ष हरिओम ठेकेदार, प्रवक्ता रिंकू खेड़ी हैवत (रिंकू कुमार जाटव), अमरसिंह बाबा, नेमीचंद तेसगांव और प्रेम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

भोपर की इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। क्षेत्रवासियों में भारी रोष है। उन्होंने मांग की है कि निलंबित कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुख्ता और प्रभावी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

निष्कर्ष: भोपर हादसा प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही का एक दुखद उदाहरण है। हालांकि प्रशासन ने मुआवजे और नौकरी का वादा कर स्थिति को संभाल लिया है, लेकिन यह घटना इस बात की चेतावनी है कि विभागों को आमजन की सुरक्षा के प्रति अधिक जवाबदेह होने की आवश्यकता है ताकि फिर किसी निर्दोष को अपनी जान न गंवानी पड़े।

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संपादक (Editor)

Bhupendra Singh Sonwal

भूपेन्द्र सिंह सोनवाल एक प्रखर डिजिटल पत्रकार और भारतीय समाचार मीडिया कंपनी 'मिशन की आवाज' के संस्थापक हैं। वे मुख्य रूप से राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, और नीतिगत मामलों पर तीखी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। आंकड़ों की तह तक जाना और जमीनी सच को बेबाकी से पेश करना उनकी विशेषता है। तथ्य-आधारित और स्वतंत्र पत्रकारिता के जरिए वे समाज के हर वर्ग तक सही सूचना पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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