भोपर हादसा: बिजली विभाग की लापरवाही से तीन की मौत, मुआवजे और सरकारी नौकरी पर सहमति के बाद समाप्त हुआ धरना
करौली: टोडाभीम क्षेत्र के भोपर गांव में बिजली विभाग की कथित लापरवाही ने तीन जिंदगियां लील लीं। इस दर्दनाक हादसे में जाटव समाज के तीन लोगों की मृत्यु के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने घटनास्थल पर लंबा धरना दिया। आखिरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रतिनिधियों के बीच हुई मैराथन वार्ता के बाद सहमति बनी, जिसके बाद घटनास्थल पर ही तीनों मृतकों का पोस्टमार्टम करवाया गया।
मुआवजे और सरकारी नौकरी पर बनी सहमति
लंबे गतिरोध को समाप्त करने के लिए प्रशासन और पीड़ित परिवारों के बीच हुए समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं:
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तात्कालिक सहायता: प्रत्येक प्रभावित परिवार को तत्काल 50 हजार रुपये नकद और 5 लाख रुपये का चेक सौंपा गया।
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अतिरिक्त मुआवजा: 15 दिनों के भीतर प्रत्येक परिवार को 7 लाख रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
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सरकारी नौकरी: प्रत्येक पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने पर भी प्रशासन ने सहमति जताई है।
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दोषियों पर कार्रवाई: प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर संबंधित बिजली विभाग के कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
धरने में इन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस पूरे घटनाक्रम और वार्ता के दौरान जिले के कई बड़े अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर डटे रहे। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त जिला कलेक्टर (करौली), उपखंड अधिकारी (टोडाभीम), अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक (करौली) और हिंडौन के डीवाईएसपी (DYSP) मौजूद रहे।
वहीं, जनप्रतिनिधियों और समाज के नेताओं में टोडाभीम विधायक घनश्याम मेहर, हिंडौन विधायक अनीता जाटव, जिला प्रमुख प्रतिनिधि रक्षीलाल बैरवा, जिला जाटव समाज सुधार समिति के अध्यक्ष हट्टीराम ठेकेदार, युवा अध्यक्ष हरिओम ठेकेदार, प्रवक्ता रिंकू खेड़ी हैवत (रिंकू कुमार जाटव), अमरसिंह बाबा, नेमीचंद तेसगांव और प्रेम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
भोपर की इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। क्षेत्रवासियों में भारी रोष है। उन्होंने मांग की है कि निलंबित कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुख्ता और प्रभावी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं।
निष्कर्ष: भोपर हादसा प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही का एक दुखद उदाहरण है। हालांकि प्रशासन ने मुआवजे और नौकरी का वादा कर स्थिति को संभाल लिया है, लेकिन यह घटना इस बात की चेतावनी है कि विभागों को आमजन की सुरक्षा के प्रति अधिक जवाबदेह होने की आवश्यकता है ताकि फिर किसी निर्दोष को अपनी जान न गंवानी पड़े।
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