राजस्थान में मौसमी बीमारियों पर अलर्ट: स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने दिए पुख्ता तैयारियों के निर्देश, अस्पतालों का होगा फायर-इलेक्ट्रिकल ऑडिट
जयपुर। राजस्थान में बारिश के मौसम की शुरुआत के साथ ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। जलजनित और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम को लेकर मंगलवार, 23 जून को जयपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने की।
बैठक के दौरान राज्य में डेंगू, मलेरिया, स्क्रब टाइफस और वायरल बुखार जैसी मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए विभाग की मौजूदा तैयारियों का गहन विश्लेषण किया गया। साथ ही, मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में इलेक्ट्रिकल तथा फायर ऑडिट की स्थिति पर भी संभागवार चर्चा की गई।
चिकित्सा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्थानीय निकायों के साथ मिलकर प्रदेशभर में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने और जल भराव रोकने पर विशेष जोर दिया।
दवाओं और जांच किट की पर्याप्त उपलब्धता के निर्देश
बैठक में श्री खींवसर ने कहा कि सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में दवाइयों, जांच किट, बेड, मेडिकल ऑक्सीजन और आवश्यक जीवन रक्षक उपकरणों का पर्याप्त स्टॉक होना चाहिए। साथ ही मेडिकल स्टाफ की 24 घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। जिला स्तर पर बनाए गए कंट्रोल रूम को और अधिक सक्रिय करने तथा आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्यवाही (त्वरित प्रतिक्रिया) के लिए विशेष टीमों को अलर्ट रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इन जिलों में रहेगी विशेष निगरानी
स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेश के कुछ चुनिंदा जिलों में बीमारियों के ट्रेंड को देखते हुए विशेष निगरानी रखने को कहा है:
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डेंगू के लिए अलर्ट: जयपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर और सवाई माधोपुर।
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मलेरिया के लिए अलर्ट: प्रतापगढ़, सलूम्बर, बाड़मेर, उदयपुर और बांसवाड़ा।
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स्क्रब टाइफस के लिए अलर्ट: कोटा, बूंदी, बारां, जयपुर और झालावाड़।
प्रशासन को इन संवेदनशील क्षेत्रों में साफ-सफाई, फॉगिंग, एंटी-लार्वा गतिविधियों और पीने के पानी की शुद्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि: नियमित हों फायर और इलेक्ट्रिकल ऑडिट
मौसमी बीमारियों के अलावा, स्वास्थ्य ढांचे की सुरक्षा भी इस बैठक का प्रमुख एजेंडा रही। चिकित्सा मंत्री ने कहा कि अस्पतालों में शॉर्ट सर्किट या आगजनी जैसी घटनाओं से बचने के लिए विद्युत उपकरणों, वायरिंग और पैनल बोर्ड की नियमित जांच (इलेक्ट्रिकल ऑडिट) बेहद जरूरी है।
उन्होंने सभी अस्पतालों में फायर अलार्म, अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher), इमरजेंसी एग्जिट और हाइड्रेंट सिस्टम को चालू हालत में रखने के निर्देश दिए। इसके अलावा, आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए अस्पतालों में समय-समय पर कर्मचारियों के साथ 'मॉक ड्रिल' आयोजित करने को भी अनिवार्य किया गया है। अधिकारियों को ऑडिट में मिली कमियों को प्राथमिकता से दूर कर अनुपालना रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
निष्कर्ष: चिकित्सा मंत्री द्वारा ली गई यह उच्च स्तरीय बैठक इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार मानसून के दौरान जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। बीमारियों की रोकथाम के लिए जहां जमीनी स्तर पर फॉगिंग और दवाओं की व्यवस्था सुदृढ़ की जा रही है, वहीं अस्पतालों को किसी भी दुर्घटना से बचाने के लिए फायर और इलेक्ट्रिकल ऑडिट की अनिवार्यता सुनिश्चित की गई है।
(इस बैठक में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त श्री बाबूलाल गोयल, एनएचएम की अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी. शुभमंगला, जनस्वास्थ्य निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, आरसीएच निदेशक डॉ. मधु रतेश्वर के साथ-साथ वीसी के माध्यम से सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य उपस्थित रहे।)
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