राजस्थान में निवेश को पंख: 200 से अधिक प्रवासी राजस्थानियों के साथ राजस्थान फाउंडेशन का वर्चुअल संवाद संपन्न
जयपुर। प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने और प्रवासी निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से मंगलवार को उद्योग भवन (रीको) में एक महत्वपूर्ण वर्चुअल संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रवासी राजस्थानी कार्य विभाग के अधीन कार्यरत 'राजस्थान फाउंडेशन' द्वारा आयोजित इस बैठक में देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बसे 200 से अधिक प्रवासी राजस्थानियों तथा निवेशकों ने हिस्सा लिया।
इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य प्रवासी राजस्थानी संगठनों के साथ सीधा समन्वय स्थापित करना और उन्हें राज्य में उपलब्ध निवेश के सुनहरे अवसरों से अवगत कराना था। कार्यक्रम के दौरान रीको (RIICO) के अधिकारियों ने प्रदेश में औद्योगिक भूमि आवंटन की प्रक्रिया और नई निवेश नीतियों पर विस्तार से जानकारी दी, ताकि प्रवासियों को अपनी 'मातृभूमि' में उद्योग स्थापित करने में कोई तकनीकी बाधा न आए।
बैठक का शुभारंभ मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में देश-विदेश में गठित राजस्थान फाउंडेशन के 14 नए चैप्टर्स के अध्यक्षों को बधाई और शुभकामनाएं देने के साथ हुआ।
इन प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और नीतियों पर हुआ मंथन
संवाद के दौरान रीको के अधिकारियों ने राज्य के औद्योगिक परिदृश्य पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। इसमें विशेष रूप से 'जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र' (JPMIA) और 'राजस्थान पेट्रो जोन' में विकास की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया गया।
इसके अलावा, राज्य में बिना किसी परेशानी के तुरंत उद्योग शुरू करने के लिए 'प्लग एंड प्ले' (Plug and Play) मॉडल, भूमि की लागत वसूली से जुड़े नियमों और निवेशकों की सुविधा के लिए बनाए गए वन-स्टॉप सॉल्यूशन “राज निवेश पोर्टल” की कार्यप्रणाली के बारे में प्रवासियों को गहराई से समझाया गया।
प्रवासियों की शंकाओं का अधिकारियों ने दिया जवाब
कार्यक्रम में एक खुला प्रश्नोत्तर सत्र भी रखा गया, जिससे संवाद पूरी तरह दोतरफा हो सके। इस दौरान प्रवासी निवेशकों द्वारा निवेश सुरक्षा, भूमि आवंटन और सरकारी क्लीयरेंस से जुड़े कई व्यावहारिक सवाल पूछे गए। इन सभी सवालों का रीको, उद्योग विभाग और निवेश संवर्द्धन ब्यूरो (BIP) के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा संतोषजनक और विस्तृत जवाब दिया गया।
'कर्मभूमि से मातृभूमि' अभियान में सूरत चैप्टर का अहम योगदान
राजस्थान फाउंडेशन की आयुक्त डॉ. मनीषा अरोड़ा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि प्रवासी राजस्थानियों से निरंतर संपर्क बनाए रखने के लिए ऐसी वर्चुअल बैठकों का नियमित आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विदेशों और देश के अन्य राज्यों में बसे प्रवासियों में अपनी जड़ों की ओर लौटने और यहां व्यापार विस्तार करने की गहरी इच्छा देखी जा रही है।
डॉ. अरोड़ा ने विशेष रूप से फाउंडेशन के 'सूरत चैप्टर' की प्रशंसा की, जिसने राज्य सरकार के 'कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान' में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इसके साथ ही, 'वंदे गंगा अभियान' और प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में 'शिक्षा भामाशाह' के रूप में भी प्रवासी राजस्थानी समुदाय की भूमिका बेहद सराहनीय रही है।
निष्कर्ष
राजस्थान फाउंडेशन का यह वर्चुअल संवाद प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए एक सकारात्मक और रणनीतिक कदम है। 200 से अधिक प्रवासियों को राज निवेश पोर्टल, पेट्रो जोन और प्लग एंड प्ले मॉडल जैसी आधुनिक सुविधाओं से सीधे अवगत कराने से राज्य में विदेशी निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। प्रवासियों का यह उत्साह दर्शाता है कि वे न केवल सांस्कृतिक रूप से, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी अपनी मातृभूमि के उत्थान में भागीदार बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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