राजस्थान का जिला आधारित विकास मॉडल गढ़ेगा तरक्की की नई इबारत, नीति आयोग ने भी की राज्य की सराहना
जयपुर। 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में राजस्थान मजबूती से कदम बढ़ा रहा है। प्रदेश की जमीनी और आर्थिक तरक्की को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार अब 'जिला आधारित विकास मॉडल' (District-Based Development Model) पर विशेष जोर दे रही है। सोमवार, 22 जून को मुख्यमंत्री निवास पर नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर के.वी. राजू की गरिमामयी उपस्थिति में 'जिला घरेलू उत्पाद अनुमान' विषय पर एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया।
इस अहम बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य के हर जिले की अपनी एक विशिष्ट पहचान, अलग भौगोलिक परिस्थितियां और प्रचुर स्थानीय संसाधन हैं। इन्हीं मजबूत आर्थिक संभावनाओं को केंद्र में रखकर प्रदेश में विकास की एक नई और व्यावहारिक रूपरेखा तैयार की जा रही है। सरकार का मुख्य उद्देश्य योजनाबद्ध तरीके से काम करते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन, उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों के चलते आज राजस्थान में बड़े पैमाने पर निवेशक आकर्षित हो रहे हैं। राज्य का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है। वर्तमान में 6 हजार से अधिक सक्रिय स्टार्टअप्स प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और नवाचार के नए दरवाजे खोल रहे हैं।
नीति आयोग ने राजस्थान को माना 'अचीवर्स' राज्य
बैठक के दौरान नीति आयोग के सदस्य प्रो. के.वी. राजू ने राज्य सरकार की नीतियों और उनके क्रियान्वयन की जमकर सराहना की। उन्होंने राजस्थान को 'अचीवर्स' (Achievers) श्रेणी का प्रदेश बताते हुए कहा कि यहां ग्रामीण विकास और पेयजल आपूर्ति जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में उत्कृष्ट कार्य हो रहा है।
प्रो. राजू ने सुझाव दिया कि राजस्थान में सौर ऊर्जा, खनन, कृषि और पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। एक उच्च स्तरीय तकनीकी डेटाबेस तैयार करके इन सभी क्षेत्रों के योगदान को राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में बेहतर तरीके से शामिल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने योजनाओं की निरंतर मॉनिटरिंग और असंगठित क्षेत्र के सटीक आकलन के लिए सर्वे का सैंपल साइज बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया।
असंगठित क्षेत्र और स्थानीय उत्पादों को मिल रही नई पहचान
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण और पारंपरिक अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य सरकार असंगठित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण पर बेहद गंभीरता से काम कर रही है। सरकार के प्रयासों से अब चूरू का हस्तशिल्प उद्योग, भरतपुर के सरसों आधारित छोटे कारखाने और बांसवाड़ा व उदयपुर के आदिवासी अंचलों के पारंपरिक उत्पादों को संगठित अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जुड़ने का मौका मिल रहा है।
इन स्थानीय उद्यमों का आर्थिक योगदान अब राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में भी स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। 'पंच गौरव' पहल के तहत जिला स्तर पर उपज, वनस्पति, उत्पाद, पर्यटन और खेलों में नए नवाचार किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों को सीधा लाभ पहुंच रहा है।
भविष्य का खाका: 'मुख्यमंत्री विकसित ग्राम-शहरी वार्ड अभियान'
जिलों से लेकर पंचायत और वार्ड स्तर तक एक समान और संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में 'मुख्यमंत्री विकसित ग्राम-शहरी वार्ड अभियान' की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत जनता के सुझावों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2030, 2035 और 2047 के लिए विकास का एक विजनरी मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' (Vocal for Local) विजन को धरातल पर उतारने के लिए आकांक्षी उपखण्डों का विकास किया जा रहा है। स्थानीय फसलों और उत्पादों को चिन्हित कर उनके भंडारण, प्रसंस्करण और मार्केटिंग के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई गई है, जिससे कुटीर और लघु उद्योगों को भारी मजबूती मिल रही है।
डेटा आधारित नीति और नया 'डिस्ट्रिक्ट डोमेस्टिक प्रोडक्ट पोर्टल'
आर्थिक विकास के सटीक मूल्यांकन के लिए मुख्यमंत्री ने एक सुदृढ़ प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने घोषणा की कि जिला स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और विकास की सटीक निगरानी के लिए जल्द ही एक नया 'डिस्ट्रिक्ट डोमेस्टिक प्रोडक्ट पोर्टल' (District Domestic Product Portal) विकसित किया जाएगा। यह पोर्टल प्राथमिक क्षेत्रों जैसे- कृषि, पशुपालन, डेयरी और खनन से जुड़े आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण करेगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राजस्थान आज देश में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन चुका है, जो ग्रीन इकॉनमी को नई दिशा दे रहा है।
निष्कर्ष
नीति आयोग और राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच हुई यह बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि राजस्थान अब केवल घोषणाओं पर नहीं, बल्कि 'डेटा आधारित नीति निर्माण' और 'जिला स्तर की माइक्रो-प्लानिंग' पर फोकस कर रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में स्थानीय उद्यमों का सशक्तिकरण और निवेश संवर्धन, प्रदेश को तेजी से विकसित राज्य बनने की राह पर ले जा रहा है। बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे, जबकि सभी संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर्स वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए इस मंथन का हिस्सा बने।
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