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राजस्थान

राजस्थान की आंगनबाड़ियों में खुलेगा "खिलौना बैंक": बच्चों के दाखिले के लिए 24 जून से विशेष अभियान शुरू

राजस्थान के आंगनबाड़ी केंद्रों पर 24 जून से 1 जुलाई तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत खिलौना बैंक की स्थापना, प्रवेशोत्सव और पौधारोपण कार्यक्रम होंगे।
द्वारा Bhupendra Singh Sonwal 📅 24 Jun 2026 👁️ 5 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
राजस्थान की आंगनबाड़ियों में खुलेगा "खिलौना बैंक": बच्चों के दाखिले के लिए 24 जून से विशेष अभियान शुरू

जयपुर। राजस्थान में नौनिहालों के भविष्य को संवारने और उन्हें खेल-खेल में प्रारंभिक शिक्षा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने एक और अनूठी पहल की है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए एक विशेष अभियान का आगाज किया गया है। यह अभियान 24 जून से शुरू होकर 1 जुलाई 2026 तक संचालित किया जाएगा, जिसके तहत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शाला पूर्व शिक्षा (Pre-school Education) सुनिश्चित की जाएगी।

समेकित बाल विकास सेवाएं (ICDS) के निदेशक वासुदेव मालावत ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि बुधवार से आरंभ हुए इस देशज और कल्याणकारी अभियान का मुख्य आकर्षण "खिलौना बैंक" (Toy Bank) की स्थापना है। इसके साथ ही केंद्रों पर बच्चों के स्वागत के लिए "प्रवेशोत्सव" और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए "पौधारोपण" कार्यक्रम भी वृहद स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं। इस कदम से आंगनबाड़ी केंद्रों की सूरत बदलने और बच्चों के नामांकन में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

जनसहभागिता से सजेगा 'खिलौना बैंक'

इस अभियान की सफलता को पूरी तरह जनसहभागिता पर केंद्रित किया गया है। आईसीडीएस निदेशक के अनुसार, 24 से 30 जून तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपने-अपने क्षेत्रों में सघन गृह संपर्क (डोर-टू-डोर सर्वे) करेंगी। इस गृह संपर्क के दौरान वे स्थानीय समुदाय और अभिभावकों को "खिलौना बैंक" की अवधारणा और आंगनबाड़ी में बच्चों के नामांकन की प्रक्रिया से अवगत कराएंगी।

इस सात दिवसीय गृह संपर्क कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के उन सभी 3 से 6 वर्ष के बच्चों की पहचान (चिन्हीकरण) की जाएगी, जो अब तक आंगनबाड़ी केंद्रों से नहीं जुड़ पाए हैं। कार्यकर्ता उनके माता-पिता को समझाकर उन्हें 1 जुलाई को आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम के लिए आमंत्रित करेंगी।

अभियान का एक मुख्य उद्देश्य पुराने लेकिन सुरक्षित खिलौनों का पुनर्चक्रण (Recycle) करना भी है। ऐसे परिवार जिनके बच्चे अब बड़े हो चुके हैं और उनके खिलौने अब घरों में अनुपयोगी पड़े हैं, उनसे ये खिलौने स्वेच्छा से दान करने की अपील की जाएगी। एकत्रित किए गए ये खिलौने आंगनबाड़ी के छोटे बच्चों के शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विभाग ने प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर कम से कम 10 से 20 सुरक्षित और ज्ञानवर्धक खिलौने एकत्र करने का एक व्यावहारिक लक्ष्य निर्धारित किया है।

1 जुलाई को मनेगा उत्सव, मिलेगा "धन्यवाद-पत्र"

इस विशेष अभियान का मुख्य और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 1 जुलाई 2026 को देखने को मिलेगा। इस दिन सुबह ठीक 9 बजे राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक साथ "खिलौना बैंक" का भव्य शुभारम्भ किया जाएगा। इसी के साथ आयोजित होने वाले "प्रवेशोत्सव" कार्यक्रम के जरिए 3 से 6 आयुवर्ग के नए बच्चों का आंगनबाड़ी केंद्रों में विधिवत पंजीकरण किया जाएगा, ताकि वे अपनी प्रारंभिक शिक्षा की शुरुआत कर सकें।

इस उत्सव को सामुदायिक स्तर पर बड़ा रूप देने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों, पंचायती राज प्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) के साथ-साथ प्रबुद्ध नागरिकों, अभिभावकों और बच्चों को भी आमंत्रित किया गया है।

शासन की इस मुहिम में सहयोग करने वाले भामाशाहों और नागरिकों के उत्साहवर्धन के लिए विभाग ने एक अनूठी व्यवस्था की है। जो भी नागरिक आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए खिलौने भेंट करेंगे, उन्हें विभाग की ओर से एक आधिकारिक "धन्यवाद-पत्र" देकर सम्मानित किया जाएगा। मुख्य कार्यक्रम के समापन के तुरंत बाद सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के परिसरों और उनके निकटवर्ती सार्वजनिक स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा, जिससे बच्चों को बचपन से ही पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जा सके।

बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए मील का पत्थर

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रारंभिक बाल्यावस्था में बच्चों का मानसिक विकास बहुत तेजी से होता है। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाली खेल-कूद और प्रारंभिक शिक्षा उनके भविष्य की नींव रखती है। "खिलौना बैंक" जैसी अभिनव पहल से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि वाले बच्चों को भी आधुनिक और रचनात्मक खिलौनों से खेलने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ेगी, बल्कि ड्रॉप-アウト (Drop-out) दर में भी भारी कमी आएगी।

निष्कर्ष

महिला एवं बाल विकास विभाग का यह बहुआयामी अभियान राजस्थान में जमीनी स्तर पर बाल कल्याण और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम है। समाज के सहयोग से खिलौना बैंक की स्थापना और नए बच्चों का पंजीकरण निश्चित रूप से सरकारी आंगनबाड़ियों को निजी प्ले-स्कूलों के समकक्ष खड़ा करने में मददगार साबित होगा। पौधारोपण के साथ इस अभियान का समापन भविष्य की एक हरित और शिक्षित पीढ़ी के निर्माण की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

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संपादक (Editor)

Bhupendra Singh Sonwal

भूपेन्द्र सिंह सोनवाल एक प्रखर डिजिटल पत्रकार और भारतीय समाचार मीडिया कंपनी 'मिशन की आवाज' के संस्थापक हैं। वे मुख्य रूप से राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, और नीतिगत मामलों पर तीखी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। आंकड़ों की तह तक जाना और जमीनी सच को बेबाकी से पेश करना उनकी विशेषता है। तथ्य-आधारित और स्वतंत्र पत्रकारिता के जरिए वे समाज के हर वर्ग तक सही सूचना पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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