राजस्थान: श्रमिक योजनाओं में लापरवाही पर करौली के दो श्रम निरीक्षक निलंबित, विभागीय जांच शुरू
जयपुर। राजस्थान के करौली जिले में सरकारी योजनाओं के संचालन में बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। श्रम विभाग ने कर्तव्य के प्रति उदासीनता और अनियमितता बरतने के आरोप में करौली में तैनात दो श्रम निरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। निलंबन के साथ ही दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
यह कड़ी कार्रवाई श्रम आयुक्त श्रीमती पूजा कुमारी पार्थ के निर्देशों पर की गई है। विभाग को शिकायतें मिल रही थीं कि श्रमिक कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण आवेदनों का समय पर निस्तारण नहीं किया जा रहा है, जिससे पात्र लाभार्थियों को समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब उच्च स्तर पर जांच कराई गई, तो प्रथमदृष्टया कार्य में लापरवाही और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रियाओं की अवहेलना की पुष्टि हुई। इसके बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए निलंबन के आदेश जारी किए।
निलंबित अधिकारियों के नाम और पद
श्रम विभाग से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, निलंबित किए गए अधिकारियों में कार्यालय श्रम कल्याण अधिकारी, करौली में पदस्थापित श्रम निरीक्षक श्री राजेश कुमार मीणा और श्रम निरीक्षक श्री बलदेव सिंह शामिल हैं। इन दोनों ही निरीक्षकों पर अपने कार्य क्षेत्र में आ रहे मामलों को ठंडे बस्ते में डालने और समय सीमा के भीतर काम न करने का गंभीर आरोप है।
इस योजना के क्रियान्वयन में पाई गई गंभीर अनियमितता
यह पूरा मामला 'राजस्थान भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक मण्डल' द्वारा संचालित 'श्रमिक शिक्षा एवं कौशल योजना' से जुड़ा हुआ है। यह योजना पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके बच्चों के शैक्षणिक व कौशल विकास के लिए चलाई जाती है।
जांच में सामने आया कि दोनों श्रम निरीक्षकों के पास इस योजना के तहत कई आवेदन लंबित पड़े थे, जिनका निपटारा नियमानुसार और तय समय सीमा में किया जाना अनिवार्य था। इन प्रकरणों के निस्तारण में बरती गई शिथिलता को विभाग ने गंभीर माना है।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी सरकार: श्रम आयुक्त
मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए श्रम आयुक्त श्रीमती पूजा कुमारी पार्थ ने स्पष्ट किया कि विभाग श्रमिकों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक तय समय में पहुंचना चाहिए।
"योजनाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या कार्य में ढिलाई को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में भी कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोरतम अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।" — श्रीमती पूजा कुमारी पार्थ, श्रम आयुक्त
निष्कर्ष
करौली में दो श्रम निरीक्षकों का निलंबन इस बात का साफ संकेत है कि राजस्थान का श्रम विभाग अब योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर पूरी तरह जवाबदेह रुख अपना रहा है। इस कार्रवाई से न केवल अटके हुए मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी, बल्कि सरकारी तंत्र में अनुशासन भी मजबूत होगा ताकि गरीब और जरूरतमंद श्रमिकों को उनके हक का लाभ समय पर मिल सके।
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