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राजस्थान

टेक्सटाइल फ्यूजन: कोटा डोरिया और पूर्वोत्तर के एरी सिल्क का होगा अनूठा संगम; लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिला उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल, जल्द होगा समझौता

राजस्थान के कोटा डोरिया और पूर्वोत्तर के एरी सिल्क को मिलाकर नया प्रीमियम फैब्रिक तैयार किया जाएगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की मौजूदगी में DoNER सचिव ने दी जानकारी।
द्वारा Jyoti Singh 📅 18 May 2026 👁️ 46 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
टेक्सटाइल फ्यूजन: कोटा डोरिया और पूर्वोत्तर के एरी सिल्क का होगा अनूठा संगम; लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिला उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल, जल्द होगा समझौता

कोटा/जयपुर | 17 मई 2026

भारतीय हस्तकरघा (Handloom) उद्योग को वैश्विक पटल पर एक नई ऊंचाई देने और देश के दो अलग-अलग भौगोलिक कोनों की सांस्कृतिक विरासत को एक सूत्र में पिरोने के लिए एक ऐतिहासिक पहल शुरू की गई है। राजस्थान के विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक 'कोटा डोरिया' (Kota Doria) और पूर्वोत्तर भारत (North-East India) के अनूठे 'एरी सिल्क' (Eri Silk) को मिलाकर एक नया प्रीमियम फैब्रिक (वस्त्र) विकसित किया जाएगा।

इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर रविवार, 17 मई 2026 को कोटा स्थित लोकसभा कैंप कार्यालय में केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के सचिव संजय जाजू, फैशन डिजाइनरों और बुनकरों के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर विस्तृत रूपरेखा साझा की।


प्रधानमंत्री के '5F विजन' को गति देगी यह पहल: ओम बिरला

प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस टेक्सटाइल फ्यूजन की सराहना करते हुए कहा:

लोकसभा अध्यक्ष का वक्तव्य: "कोटा डोरिया केवल एक वस्त्र या परिधान नहीं है, बल्कि यह हाड़ौती क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और हमारे स्थानीय बुनकरों की पीढ़ियों की कड़ी मेहनत का जीवंत प्रतीक है। जब कोटा डोरिया के हल्केपन का पूर्वोत्तर के गौरव 'एरी सिल्क' की समृद्धि के साथ मेल होगा, तो यह देश की दो सबसे बेहतरीन हस्तकरघा परंपराओं को एक नई वैश्विक पहचान देगा। यह नवाचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘5F विजन’ (Farm to Fibre, Fibre to Fabric, Fabric to Fashion, Fashion to Foreign) को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।"


कैथून में बुनाई प्रक्रिया का निरीक्षण और एमओयू (MoU) की तैयारी

इस योजना के व्यावहारिक क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय सचिव संजय जाजू ने कोटा के कैथून स्थित कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) का दौरा कर जमीनी हकीकत जानी। इस दौरान उनके साथ कोटा जिला कलक्टर पीयूष समारिया और नॉर्थ ईस्टर्न हैंडीक्राफ्ट्स एंड हैंडलूम्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NEHHDC) के प्रतिनिधि मारा कोचो भी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने कैथून में बुनकरों द्वारा की जाने वाली कोटा डोरिया की पारंपरिक 'चौकड़ीदार' (Khat) बुनाई तकनीक को देखा और उसमें एरी सिल्क के धागों को पिरोने की तकनीकी संभावनाओं पर चर्चा की।

आगामी समझौते के मुख्य बिंदु:

  • शीघ्र होगा एमओयू: इस परियोजना को औपचारिक रूप देने के लिए केंद्रीय संस्था NEHHDC और राजस्थान सरकार के जिला उद्योग केंद्र (DIC) के बीच जल्द ही एक सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

  • संयुक्त डिजाइन और ट्रेनिंग: समझौते के तहत दोनों क्षेत्रों के बुनकरों को उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, नए कंबाइन डिजाइन विकसित किए जाएंगे और तैयार प्रीमियम उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।

  • फैब्रिक की खासियत: नया विकसित होने वाला कपड़ा बेहद खास होगा, जिसमें एरी सिल्क की अपनी मजबूती, पर्यावरण अनुकूल (Eco-friendly) गुण व शानदार बनावट होगी, और साथ ही कोटा डोरिया का पारंपरिक हल्कापन और पारदर्शी बुनावट भी समाहित रहेगी।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल कोटा के स्थानीय फैशन डिजाइनरों ने भी इस नए फ्यूजन फैब्रिक के कमर्शियल उपयोग और डिजाइनिंग को लेकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव अधिकारियों के साथ साझा किए।


डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह वस्त्र उद्योग, हस्तकरघा और क्षेत्रीय विकास संबंधी समाचार रिपोर्ट सार्वजनिक सूचना के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस लेख में शामिल नीतिगत विवरण, विजन और प्रशासनिक बैठक के तथ्य 17 मई 2026 को लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय (कोटा), केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी आधिकारिक बयानों और निरीक्षण गतिविधियों पर आधारित हैं। प्रस्तावित एमओयू (MoU) की शर्तों, फैब्रिक लॉन्च की तारीखों या बुनकर कल्याण योजनाओं की प्रमाणित जानकारी के लिए केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय या राजस्थान उद्योग विभाग के आधिकारिक वेब पोर्टल का अवलोकन करें।

अंग्रेजी (English) में ख़बर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें: missionkiawaaz.com


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ज्योति सिंह एक कुशल पत्रकार, शोध विश्लेषक और प्रमुख डिजिटल समाचार मंच मिशन की आवाज़ की सह-संस्थापक हैं। अपने पति भूपेंद्र सिंह सोनवाल (संस्थापक और मुख्य संपादक) के साथ मिलकर काम करते हुए, ज्योति न केवल पर्दे के पीछे एक सहयोगी हैं, बल्कि मीडिया नेटवर्क के विकास की मुख्य सूत्रधार भी हैं। उनकी जीवन कहानी उच्च जोखिम वाली खोजी पत्रकारिता और गहरे पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाने की एक प्रेरणादायक मिसाल है, जो यह साबित करती है कि एक साझा दृष्टिकोण स्वतंत्र क्षेत्रीय मीडिया में क्रांति ला सकता है।

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