राजस्थान CID इंटेलिजेंस का बड़ा एक्शन: ISI का फंडिंग एजेंट गिरफ्तार, देश विरोधी नेटवर्क का भंडाफोड़
जयपुर: राजस्थान पुलिस की सीआईडी (इंटेलिजेंस) विंग को आतंकवाद और जासूसी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी मिली है। जांच एजेंसी ने पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' (ISI) के लिए भारत में फंडिंग नेटवर्क चलाने वाले एक मुख्य एजेंट को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी भारतीय सेना की गोपनीय जानकारी लीक करने वाले जासूसों को पाकिस्तानी आकाओं के इशारे पर पैसे मुहैया करवाता था। इस गिरफ्तारी के साथ ही जांच एजेंसी ने एक बड़े देशद्रोही और जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है।
इस खबर की मुख्य बातें:
-
बड़ी गिरफ्तारी: राजस्थान CID इंटेलिजेंस ने ISI के फंडिंग एजेंट रफीक चांद शेख को गिरफ्तार किया है।
-
पाकिस्तानी कनेक्शन: आरोपी पिछले करीब चार सालों से सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में था।
-
जासूसों को करता था फंडिंग: जनवरी में पकड़े गए जासूसों (झबरा राम और सुमित कुमार) को जासूसी के एवज में इसी एजेंट ने पैसे भेजे थे।
-
फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल: ISI के इशारे पर यह एजेंट अलग-अलग लोगों के नाम से बैंक खाते खुलवाकर देश विरोधी गतिविधियों के लिए पैसों का लेन-देन करता था।
जनवरी में पकड़े गए जासूसों से जुड़े हैं तार अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (इंटेलिजेंस) श्री प्रफुल्ल कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि इस पूरे नेटवर्क के तार इसी साल जनवरी में की गई एक कार्रवाई से जुड़े हैं। उस वक्त खुफिया विभाग ने 'शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923' के तहत जैसलमेर निवासी झबरा राम और असम के डिब्रूगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात एमटीएस कर्मचारी सुमित कुमार को दबोचा था। इन दोनों पर भारतीय सेना से जुड़ी बेहद संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के हैंडलरों तक पहुंचाने का गंभीर आरोप था।
पूछताछ में खुला फंडिंग का राज जब जांच एजेंसियों ने जासूसी के आरोप में पकड़े गए झबरा राम और सुमित कुमार से गहन पूछताछ की और उनके वित्तीय लेन-देन खंगाले, तो एक चौंकाने वाला सच सामने आया। पता चला कि देश से गद्दारी करने के एवज में इन दोनों को जो धनराशि मिल रही थी, वह महाराष्ट्र के औरंगाबाद (हर्सुल) के रहने वाले 41 वर्षीय रफीक चांद शेख (पुत्र चांद मियां शेख) के माध्यम से भेजी जा रही थी।
4 साल से ISI के संपर्क में था आरोपी सुराग मिलने के बाद सीआईडी इंटेलिजेंस ने रफीक चांद शेख पर शिकंजा कसा और उससे कड़ी पूछताछ की। जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि रफीक पिछले 4 साल से सोशल मीडिया के माध्यम से ISI के एक हैंडलर के संपर्क में था। वह पाकिस्तानी आकाओं के निर्देश पर अपने और अन्य अनजान व्यक्तियों के नाम से फर्जी बैंक खाते खुलवाता था। इन्हीं खातों का इस्तेमाल जासूसी गतिविधियों में शामिल लोगों तक पैसा पहुंचाने के लिए किया जाता था।
आगे की जांच जारी ठोस सबूतों और पूछताछ में जुर्म प्रमाणित होने के बाद सीआईडी (इंटेलिजेंस) राजस्थान ने 30 जून को रफीक चांद शेख को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसी का कहना है कि आईएसआई के इस वित्तीय नेटवर्क की अभी और गहराई से जांच की जा रही है। इस लेन-देन में शामिल अन्य संदिग्धों की भी तलाश जारी है।
टिप्पणियां (0)
अपनी राय दें