29वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन: डिजिटल शासन से आया प्रभाव, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित विकास
जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में बुधवार, 1 जुलाई को 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसका उद्घाटन करते हुए डिजिटल तकनीक को केवल सुविधा का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन और जनकल्याण का सबसे सशक्त माध्यम बताया।
कार्यक्रम के दौरान लॉन्च की गई प्रमुख पहलें
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के लिए कई अत्याधुनिक ई-गवर्नेंस सुविधाओं की शुरुआत की:
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राजस्थान लैंग्वेज मॉडल ट्रेनिंग हैकाथॉन
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स्मार्ट राजस्थान: स्वचालित नागरिक सेवा प्रदायगी मंच
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राजस्थान इनोवेशन चैलेंज
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ई-मित्र व्हाट्सएप सेवा
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'डिजिटल राजस्थान' कॉफी टेबल बुक का विमोचन
मुख्यमंत्री के संबोधन की मुख्य बातें
बिचौलियों का अंत और सीधे लाभ का हस्तांतरण मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप डीबीटी (DBT), जन-धन, आधार और मोबाइल की पहल से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों के खाते में पहुंच रहा है, जिससे बिचौलियों का पूरी तरह दखल खत्म हो गया है। आज यूपीआई (UPI) लेनदेन का सबसे आसान जरिया बन चुका है।
जन-अभियोग निवारण में 'राजस्थान संपर्क' की सफलता शासन को नागरिक-केंद्रित बनाने में 'राजस्थान संपर्क' एक प्रभावी मंच साबित हुआ है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से हर महीने 2.5 से 3 लाख शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे स्वयं भी इस पोर्टल पर शिकायतों के समाधान की निगरानी करते हैं।
तकनीक और रोजगार के लिए नई नीतियां
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राजस्थान एआई-एमएल (AI-ML) पॉलिसी 2026: प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लागू।
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एवीजीसी एंड एक्सआर (AVGC & XR) पॉलिसी: एनिमेशन, गेमिंग और डिजिटल तकनीक में युवाओं के लिए नए रोजगार सृजन हेतु लागू।
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राज्य सरकार द्वारा एआई एवं क्वांटम कम्प्यूटिंग मिशन की भी शुरुआत की गई है।
स्टार्टअप्स और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में लंबी छलांग
राजस्थान देश के अग्रणी स्टार्टअप हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। पिछले दो वर्षों में राज्य ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं:
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स्टार्टअप्स की संख्या: 4,000 से बढ़कर 8,500 के पार।
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निवेश और रोजगार: निवेश 250 करोड़ से बढ़कर 1,000 करोड़ रुपये हुआ, वहीं रोजगार सृजन 22,000 से बढ़कर 47,000 से अधिक हो गया है।
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इन्क्यूबेशन और नवाचार: 9 इन्क्यूबेशन सेंटर और 65 आई-स्टार्ट लॉन्चपैड स्थापित किए गए हैं, जिनसे 1 लाख 28 हजार से अधिक विद्यार्थी जुड़े हैं।
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डिजिटल विस्तार: 1,686 किमी ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाया गया है। 3,200 से अधिक ग्राम पंचायतों में 12,500 हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन दिए गए हैं।
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ई-मित्र सेवाएं: 79 हजार ई-मित्र कियोस्कों के जरिए 900 से अधिक सेवाएं आमजन तक पहुंचाई जा रही हैं।
सुरक्षा और पारदर्शिता पर विशेष जोर
भर्ती परीक्षाओं और नागरिक सुरक्षा को डिजिटल रूप से मजबूत करने के लिए सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं:
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परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए एआई आधारित फोटो सत्यापन और ई-केवाईसी (e-KYC) की व्यवस्था।
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ऑनलाइन धोखाधड़ी से निपटने के लिए आधुनिक साइबर लैब और साइबर रेंज प्लेटफॉर्म की स्थापना।
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सार्वजनिक व शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं और नागरिकों की सुरक्षा के लिए 25 हजार से अधिक निगरानी (CCTV) कैमरे लगाए गए।
'तेज सेवा, ज्यादा सेवा और बेहतर सेवा'
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि एआई और ई-गवर्नेंस का मुख्य उद्देश्य आमजन को सबसे तेज और बेहतरीन सेवाएं देना है। उन्होंने बताया कि 'जेम ट्रिनिटी' (JAM Trinity) की बदौलत आज भारत पूरी दुनिया में यूपीआई के माध्यम से सबसे ज्यादा कैशलेस ट्रांजेक्शन करने वाला देश बन गया है।
सम्मेलन में इनकी रही उपस्थिति: इस ऐतिहासिक अवसर पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी सचिव एस. कृष्णन, प्रशासनिक सुधार सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा, आईटी सचिव रवि कुमार सुरपुर सहित देश भर से आए विशेषज्ञ, स्टार्टअप प्रोफेशनल्स और बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे।
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