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राजस्थान

राजस्थान पल्स पोलियो अभियान: 1.04 करोड़ बच्चों को पिलाई जाएगी दवा, 59 हजार बूथ तैयार

राजस्थान में 28 से 30 जून 2026 तक राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान चलेगा। 5 साल तक के 1.04 करोड़ से ज्यादा बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। जानें अभियान की पूरी जानकारी।
द्वारा Bhupendra Singh Sonwal 📅 27 Jun 2026 👁️ 23 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
राजस्थान पल्स पोलियो अभियान: 1.04 करोड़ बच्चों को पिलाई जाएगी दवा, 59 हजार बूथ तैयार

राजस्थान में नौनिहालों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रदेश में 28 जून से 30 जून तक 'राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान' का आयोजन किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय महाभियान का मुख्य लक्ष्य राज्य के पांच वर्ष तक के 1.04 करोड़ से अधिक बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाना है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर रूपरेखा तैयार की है। तय रणनीति के अनुसार, अभियान के पहले दिन (28 जून) बच्चों को निर्धारित बूथों पर दवा पिलाई जाएगी। इसके बाद अगले दो दिनों तक स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करेंगी कि कोई भी बच्चा इस सुरक्षा चक्र से बाहर न रहे।

अभियान के लिए 75 हजार से ज्यादा टीमों का गठन

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बताया कि बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के लिए पूरे प्रदेश में 59,217 पोलियो बूथ स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा 75,232 विशेष टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों में 1.38 लाख से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी और अन्य विभागों के कर्मचारी अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। यात्रा कर रहे बच्चों को ध्यान में रखते हुए 7,011 ट्रांजिट और 9,004 मोबाइल टीमें भी मुस्तैद रहेंगी।

रेलवे स्टेशन से लेकर ईंट-भट्टों तक पहुंचेगी टीम

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अभियान के पहले दिन ही अपने बच्चों को बूथ पर ले जाकर खुराक जरूर दिलाएं। इस कार्य में एएनएम, आशा सहयोगिनी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रहेगी।

वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के निदेशक डॉ. जोगाराम ने स्पष्ट किया कि मोबाइल और ट्रांजिट टीमें रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य प्रमुख आवागमन वाले स्थानों पर मौजूद रहेंगी। विशेष रूप से घुमंतू परिवारों, ईंट-भट्टों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चों और दुर्गम इलाकों तक पहुंचने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि टीकाकरण का दायरा शत-प्रतिशत रहे।

भारत का पोलियो मुक्त सफर और वर्तमान वैश्विक स्थिति

देश में पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत साल 1995 में हुई थी। इसके निरंतर और सघन प्रयासों का ही नतीजा है कि जनवरी 2011 के बाद से भारत में पोलियो का एक भी नया मामला सामने नहीं आया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 27 मार्च 2014 को भारत को आधिकारिक तौर पर पल्स पोलियो मुक्त होने का प्रमाण पत्र भी दिया जा चुका है। हालांकि, साल 2026 में पड़ोसी देश पाकिस्तान में 3 और अफगानिस्तान में 4 पोलियो के मामले दर्ज किए गए हैं, जिसे देखते हुए देश में निरंतर सतर्कता बरती जा रही है।

निष्कर्ष: राजस्थान सरकार का यह पल्स पोलियो अभियान बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और भविष्य की दिशा में एक अहम कदम है। 28 से 30 जून तक चलने वाले इस अभियान में आमजन की भागीदारी और स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी ही इसे पूरी तरह सफल बनाएगी, जिससे आने वाली पीढ़ियां हमेशा के लिए पोलियो के खतरे से महफूज रह सकें।

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संपादक (Editor)

Bhupendra Singh Sonwal

भूपेन्द्र सिंह सोनवाल एक प्रखर डिजिटल पत्रकार और भारतीय समाचार मीडिया कंपनी 'मिशन की आवाज' के संस्थापक हैं। वे मुख्य रूप से राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, और नीतिगत मामलों पर तीखी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। आंकड़ों की तह तक जाना और जमीनी सच को बेबाकी से पेश करना उनकी विशेषता है। तथ्य-आधारित और स्वतंत्र पत्रकारिता के जरिए वे समाज के हर वर्ग तक सही सूचना पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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