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राजस्थान

अन्न भंडारण में राजस्थान का डंका: यूपी के दल ने सीखा 'राजस्थान मॉडल', गोदाम निर्माण में देश में प्रथम है प्रदेश

Rajasthan Warehouse Model 2026: राजस्थान बना अन्न भंडारण में देश का नंबर 1 राज्य। उत्तर प्रदेश के दल ने जयपुर पहुँचकर सीखी गोदाम निर्माण की तकनीक और 100% सब्सिडी मॉडल।
द्वारा Bhupendra Singh Sonwal 📅 12 May 2026 👁️ 62 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
अन्न भंडारण में राजस्थान का डंका: यूपी के दल ने सीखा 'राजस्थान मॉडल', गोदाम निर्माण में देश में प्रथम है प्रदेश

जयपुर | 12 मई, 2026

'सहकार से समृद्धि' अभियान के तहत राजस्थान ने विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में देश भर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राजस्थान के इस सफल 'वित्तीय और मॉनिटरिंग मॉडल' को समझने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का एक उच्च स्तरीय दल मंगलवार को जयपुर पहुँचा।

राजस्थान मॉडल की 3 बड़ी खूबियाँ

सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा ने उत्तर प्रदेश के दल को राजस्थान की कार्यप्रणाली के तीन प्रमुख स्तंभ बताए:

  1. न्यूनतम निर्माण लागत: राजस्थान में गोदामों का निर्माण सीधे सहकारी समितियों के माध्यम से कराया जा रहा है। इससे बिचौलियों और एजेंसियों का कमीशन खत्म हो गया है। जहाँ अन्य राज्यों में लागत अधिक है, वहीं राजस्थान में ₹4000 से ₹5500 प्रति मीट्रिक टन की दर से गुणवत्तापूर्ण गोदाम बन रहे हैं।

  2. देश में एकमात्र 100% सब्सिडी वाला राज्य: राजस्थान देश का इकलौता राज्य है जो गोदाम निर्माण के लिए 25 लाख रुपये की शत-प्रतिशत सब्सिडी प्रदान कर रहा है।

  3. मानक और एसओपी (SOP): सभी गोदामों का निर्माण WDRA (Warehouse Development and Regulatory Authority) के कड़े मानकों के अनुरूप हो रहा है। इनके व्यावसायिक उपयोग के लिए विभाग ने विस्तृत एसओपी भी जारी की है।

भंडारण क्षमता का लक्ष्य: 1.25 लाख मीट्रिक टन

प्रदेश सरकार ने ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक चरणबद्ध लक्ष्य निर्धारित किया है:

वित्तीय वर्ष गोदामों का लक्ष्य स्थिति
2024-25 100 गोदाम 98 पूर्ण हो चुके हैं
2025-26 100 गोदाम 91 निर्माणाधीन हैं
2026-27 50 गोदाम चयन प्रक्रिया जारी है
कुल योग 250 गोदाम 1.25 लाख मीट्रिक टन क्षमता

यूपी के दल ने किया फील्ड विजिट

उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल, जिसमें मुख्य अभियंता श्री परीक्षित त्रिपाठी और एफसीआई के एजीएम श्री प्रतीक के. शर्मा शामिल थे, ने केवल फाइलों में ही नहीं बल्कि फील्ड विजिट के जरिए भी कार्यप्रणाली को समझा। दल ने निर्माणाधीन और पूर्ण हो चुके गोदामों का निरीक्षण कर यहाँ की तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की सराहना की।

निष्कर्ष

राजस्थान का यह मॉडल न केवल किसानों की फसल को सुरक्षित रखने में मददगार साबित होगा, बल्कि सहकारी समितियों की आय बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य का राजस्थान से सीख लेना प्रदेश की प्रशासनिक दूरदर्शिता को दर्शाता है।


अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख राजस्थान सहकारिता विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं और शासन सचिव डॉ. समित शर्मा की समीक्षा बैठक के विवरण पर आधारित है।

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संपादक (Editor)

Bhupendra Singh Sonwal

भूपेन्द्र सिंह सोनवाल एक प्रखर डिजिटल पत्रकार और भारतीय समाचार मीडिया कंपनी 'मिशन की आवाज' के संस्थापक हैं। वे मुख्य रूप से राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, और नीतिगत मामलों पर तीखी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। आंकड़ों की तह तक जाना और जमीनी सच को बेबाकी से पेश करना उनकी विशेषता है। तथ्य-आधारित और स्वतंत्र पत्रकारिता के जरिए वे समाज के हर वर्ग तक सही सूचना पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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