अलवर में चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर का औचक निरीक्षण: स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर सख्त, मरीजों से लिया सीधा फीडबैक
अलवर/जयपुर। आमजन को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना किसी भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इसी उद्देश्य को धरातल पर सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने गुरुवार, 25 जून 2026 को अलवर जिले के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों का सघन और औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न केवल अस्पतालों की आंतरिक व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया, बल्कि मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधा संवाद स्थापित कर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का फीडबैक भी प्राप्त किया।
अलवर के प्रमुख अस्पतालों में व्यवस्थाओं की पड़ताल
स्वास्थ्य मंत्री ने अलवर शहर के सामान्य चिकित्सालय (General Hospital), जनाना (Women's Hospital) एवं शिशु चिकित्सालयों का अचानक दौरा कर वहां हड़कंप मचा दिया। उन्होंने सामान्य चिकित्सालय में रामाश्रय, सामान्य वार्ड, क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU), गहन चिकित्सा इकाई (ICU) और ऑपरेशन थियेटर (OT) का सघन निरीक्षण किया।
इसके पश्चात, मंत्री खींवसर ने जनाना व शिशु चिकित्सालय का भी रुख किया। वहां उन्होंने मदर मिल्क बैंक, लेबर रूम, पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड और शिशु ऑपरेशन थियेटर की व्यवस्थाओं को देखा। मदर मिल्क बैंक के निरीक्षण के दौरान उन्होंने मिल्क स्टोरेज की प्रक्रिया और स्वच्छता मानकों की विस्तार से जानकारी ली और नवजात शिशुओं के लिए इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मरीजों से सीधा संवाद और अधिकारियों को निर्देश
अपने इस औचक दौरे के दौरान चिकित्सा मंत्री केवल अधिकारियों के दावों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने वार्डों में जाकर भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की। मरीजों से उन्हें मिल रहे इलाज, दवाइयों की उपलब्धता और अस्पताल के स्टाफ के व्यवहार के बारे में सीधा फीडबैक लिया। श्री खींवसर ने मौके पर मौजूद चिकित्सा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि संसाधनों का अधिकतम और कुशलतम उपयोग करते हुए आपसी समन्वय स्थापित करें, ताकि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पूरी तरह से दुरुस्त रखा जा सके और किसी भी मरीज को परेशानी का सामना न करना पड़े।
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में लापरवाही पर सख्त एक्शन
शहर के बड़े अस्पतालों के अलावा, स्वास्थ्य मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों की चिकित्सा व्यवस्थाओं को भी अपनी रडार पर रखा। उन्होंने गोविन्दगढ़ उपखण्ड के अंतर्गत आने वाले बड़ौदामेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और रामगढ़ उपखण्ड के बगडमेव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का भी औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आई। बड़ौदामेव सीएचसी में तैनात 4 में से 2 कार्मिक बिना किसी पूर्व सूचना या उचित कारण के अवकाश पर पाए गए। इसी प्रकार, बगडमेव पीएचसी में भी नर्सिंग स्टाफ नदारद मिला। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने संबंधित चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी स्तर पर खिलवाड़ या ड्यूटी में कोताही को राज्य सरकार द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत समीक्षा और फायर सेफ्टी पर जोर
अस्पतालों के दौरों के बाद चिकित्सा मंत्री ने जिले के शीर्ष चिकित्सा अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा और निर्देश दिए गए:
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ओपीडी और दवाइयां: अस्पतालों में प्रतिदिन आने वाले मरीजों (OPD) की स्थिति और मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत जीवनरक्षक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता की समीक्षा की गई।
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संस्थागत प्रसव और एम्बुलेंस: सुरक्षित डिलीवरी, मातृ-शिशु मृत्यु दर (Mortality Rate) को कम करने के उपाय और आपातकालीन एम्बुलेंस सेवाओं के रिस्पांस टाइम को सुधारने पर जोर दिया गया।
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फायर सेफ्टी (अग्नि सुरक्षा): गर्मी के मौसम और हाल ही में देश के विभिन्न अस्पतालों में हुई अग्नि दुर्घटनाओं को देखते हुए मंत्री ने फायर सेफ्टी व्यवस्था की कड़ी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सुरक्षा के दृष्टिगत सभी चिकित्सा संस्थानों में नियमित अंतराल पर मॉक ड्रिल (Mock Drill) आयोजित की जाए।
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सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन: मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना और 'मां वाउचर योजना' जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति का फीडबैक लिया गया। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करें और यह सुनिश्चित करें कि समाज के अंतिम छोर पर बैठे पात्र व्यक्ति को इनका शत-प्रतिशत लाभ मिले।
प्रमुख अधिकारियों की रही मौजूदगी इस सघन निरीक्षण और समीक्षा बैठक के दौरान अलवर स्वास्थ्य विभाग का पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद रहा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. योगेन्द्र शर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (PMO) डॉ. प्रवीण शर्मा, डॉ. मनोज गर्ग, डॉ. केसरी सिंह, डॉ. जालम सिंह राठौड़ के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज की कार्यवाहक प्रिंसिपल डॉ. इन्दू सूद, डॉ. दिनेश सूद, नर्सिंग कॉलेज के प्रिंसिपल श्री राजपाल यादव, और नर्सिंग अधीक्षक श्रीमती सुशीला वर्मा व श्रीमती सरला शर्मा उपस्थित रहीं।
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