मानसून से पहले अलर्ट पर SDRF: राजस्थान के 35 जिलों में तैनात की गईं 70 रेस्क्यू टीमें, कमान्डेंट सिसोदिया ने दिखाई हरी झंडी
जयपुर। आगामी मानसून सत्र के दौरान भारी बारिश, जलभराव और बाढ़ जैसी किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रतिसाद बल (SDRF) ने पूरी तरह कमर कस ली है। प्रदेशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपदा के जोखिम को कम से कम करने के उद्देश्य से आज 25 जून को एक बड़ा कदम उठाया गया है। SDRF की विभिन्न कंपनियों से गठित कुल 70 अत्याधुनिक रेस्क्यू टीमों को विशेष आपदा राहत और बचाव उपकरणों के साथ राज्य के 35 बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील जिलों के लिए रवाना कर दिया गया है।
जयपुर स्थित SDRF कंट्रोल रूम में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान राज्य आपदा प्रतिसाद बल के कमान्डेंट श्री राजेन्द्र सिंह सिसोदिया ने इन टीमों को हरी झंडी दिखाकर गंतव्य के लिए रवाना किया। जयपुर के अलावा अन्य जिलों में मोर्चा संभालने वाली टीमों को उनके संबंधित कंपनी मुख्यालयों से कंपनी प्रभारियों द्वारा पूरी तैयारियों के साथ विदा किया गया।
आधुनिक उपकरणों से लैस होकर मैदान में उतरे जांबाज
कमान्डेंट राजेन्द्र सिंह सिसोदिया ने बताया कि अत्यधिक वर्षा, बांधों या नदियों से अचानक भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से पैदा होने वाले हालातों में नागरिकों के जीवन की रक्षा करना SDRF की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार सभी 70 रेस्क्यू टीमों को बेहद आधुनिक और उच्च क्षमता वाले उपकरणों से लैस किया गया है।
इन टीमों के पास आपात स्थितियों के लिए निम्नलिखित जीवन रक्षक संसाधन मौजूद रहेंगे:
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जल परिवहन और बचाव: बाढ़ प्रभावित और जलमग्न क्षेत्रों में त्वरित आवाजाही के लिए आधुनिक मोटरबोट।
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व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण: डूबते हुए लोगों को बचाने के लिए भारी मात्रा में लाइफ जैकेट और लाइफ बॉय।
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गहरे पानी में खोज: नदियों या गहरे जलभराव वाले स्थानों में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए 'डीप डाइविंग' (गहरे पानी में गोताखोरी) उपकरण।
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सर्च एंड कम्यूनिकेशन: आपदा के समय नेटवर्क ठप होने की स्थिति से निपटने के लिए आधुनिक खोज-बचाव उपकरण और उन्नत संचार साधन।
ये सभी टीमें धरातल पर पहुंचकर निष्क्रिय नहीं बैठेंगी, बल्कि स्थानीय जिला प्रशासन, राजस्थान पुलिस, चिकित्सा विभाग, सिविल डिफेंस (नागरिक सुरक्षा) और स्थानीय स्वयंसेवी एजेंसियों के साथ मजबूत समन्वय स्थापित करेंगी, ताकि सूचना मिलते ही बिना किसी देरी के त्वरित राहत कार्य शुरू किया जा सके।
पिछले साल का शानदार ट्रैक रिकॉर्ड: 1,237 लोगों को मिला था जीवनदान
SDRF के शानदार सेवा इतिहास और पिछले वर्ष के सफल अभियानों का विवरण साझा करते हुए कमान्डेंट ने बताया कि बल का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद प्रेरणादायक रहा है। गत वर्ष 21 जून 2025 से 11 अक्टूबर 2025 के मानसून सत्र के दौरान, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद SDRF के जांबाजों ने राज्यभर में कुल 333 सफल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए थे। इन ऑपरेशन्स के माध्यम से 1,237 नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालकर नया जीवनदान दिया गया था।
इस बार भी मानसून की दस्तक से पहले ही सभी टीमों को पूरी मुस्तैदी बरतने और स्थापित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत अत्यंत सावधानीपूर्वक और कुशलता से रेस्क्यू ऑपरेशन संपादित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
जिलावार तैनाती: जानिए आपके जिले में कितनी टीमें रहेंगी मुस्तैद
SDRF मुख्यालय द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, राज्य के भौगोलिक परिदृश्य और जलीय संवेदनशीलता के आधार पर टीमों का रणनीतिक नियोजन (Strategic Deployment) किया गया है। राजधानी जयपुर और भरतपुर संभाग में बाढ़ की पुरानी हिस्ट्री को देखते हुए सबसे ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है।
नीचे दी गई तालिका से आप समझ सकते हैं कि किस जिले या क्षेत्र की सुरक्षा के लिए कितनी टीमों को तैनात किया गया है:
| तैनात रेस्क्यू टीमों की संख्या | संबंधित जिले / क्षेत्र |
| 08 टीमें (सर्वाधिक) | जयपुर आयुक्तालय (कमिश्नरेट) |
| 07 टीमें | भरतपुर जिला |
| 06 टीमें | कोटा जिला (हाड़ौती अंचल) |
| 03-03 टीमें | उदयपुर, अजमेर, बीकानेर और जोधपुर |
| 02-02 टीमें | जयपुर ग्रामीण, टोंक, भीलवाड़ा, बारां, झालावाड़, धौलपुर, करौली और सवाईमाधोपुर |
| 01-01 टीम | दौसा, अलवर, डूंगरपुर, राजसमन्द, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, बूंदी, सलूम्बर, ब्यावर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, बाड़मेर, बालोतरा, जालोर, फलोदी, सिरोही, पाली, चूरू, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर |
इस प्रकार राज्य के कुल 35 चिन्हित संवेदनशील जिलों में इन सभी 70 टीमों को 'राउंड द क्लॉक' (24 घंटे) हाई अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मानसून की पहली भारी बारिश के साथ ही सुरक्षा का चक्र पूरी तरह सक्रिय हो सके।
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