विश्व शांति के लिए भारतीय दर्शन रामबाण, युद्ध और आतंकवाद के युग में 'वसुधैव कुटुम्बकम्' ही एकमात्र मार्ग: विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी
लेह/जयपुर। वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध, धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद के इस दौर में भारतीय जीवन दर्शन ही पूरी दुनिया को शांति और सौहार्द का नया मार्ग दिखा सकता है। यह विचार राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने लद्दाख में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में व्यक्त किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 21वीं सदी को सही मायनों में मानवता की सदी बनाना है, तो विश्व समुदाय को विस्तारवाद की होड़ छोड़कर करुणा, सह-अस्तित्व और विश्वबंधुत्व के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा।
लद्दाख विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी: भारतीय दर्शन पर मंथन
लेह स्थित लद्दाख विश्वविद्यालय में 'विश्व शांति और भारतीय दर्शन: विश्व शांति में भारत की भूमिका और सांस्कृतिक मूल्य' विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (हिसार, हरियाणा), लद्दाख विश्वविद्यालय, हिमालय परिवार और सिंधु दर्शन यात्रा समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया मानवीय मूल्यों में गिरावट, मानसिक तनाव, सामाजिक विषमताओं और पर्यावरणीय संकट जैसी अभूतपूर्व चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे संकट के समय में भारत का सनातन विचार ही स्थायी विकास और शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
भारतीय संस्कृति: जीवन जीने की एक समग्र दृष्टि
श्री देवनानी ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति की खूबियों को रेखांकित किया:
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वसुधैव कुटुम्बकम्: भारत ने हमेशा पूरी दुनिया को एक परिवार माना है। सिंधु नदी के तट पर रचे गए वेदों से लेकर आज तक, हमारी चेतना में सभी के सुखी और स्वस्थ होने की कामना शामिल है।
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समन्वयवादी दृष्टिकोण: भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्वीकार्यता है, जिसने विभिन्न विचारों और परंपराओं को खुद में समेटकर हमेशा वैश्विक कल्याण की बात की है, कभी विस्तारवाद या वर्चस्व का सहारा नहीं लिया।
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ऋषि-मुनि थे प्राचीन वैज्ञानिक: उन्होंने भारतीय ऋषियों को 'रिसर्च स्कॉलर' और वैज्ञानिक का दर्जा देते हुए कहा कि हजारों साल पहले प्रकृति, ब्रह्मांड और मानव जीवन पर जो शोध हमारे मनीषियों ने किए थे, वे आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और योग की वैश्विक स्वीकार्यता
दुनियां में बढ़ते आतंकवाद पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा है। इसे खत्म करने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और आपसी भरोसे की जरूरत है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के 1893 के ऐतिहासिक शिकागो भाषण का स्मरण कराते हुए कहा कि "भाइयों और बहनों" का उनका संबोधन वास्तव में वैश्विक भाईचारे का ही शंखनाद था।
इसके साथ ही उन्होंने 'योग' को भारत की ओर से दुनिया को दिया गया एक अमूल्य उपहार बताया। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 177 से अधिक देशों के समर्थन के साथ 21 जून को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' घोषित किया था, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर मिली बहुत बड़ी मान्यता है।
संगोष्ठी में कई शीर्ष हस्तियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के मंच पर देश के कई वरिष्ठ शिक्षाविद् और राजनेता मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:
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श्री कविंदर गुप्ता (हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल)
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श्री इन्द्रेश कुमार (संरक्षक - हिमालय परिवार व सिंधु दर्शन यात्रा समिति)
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प्रो. नरसी राम बिश्नोई (कुलपति - गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार)
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प्रो. साकेत कुशवाहा (कुलपति - लद्दाख विश्वविद्यालय)
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श्री के.सी. शर्मा (अध्यक्ष - हरियाणा उच्च शिक्षा परिषद)
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इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों के वाइस-चांसलर, प्रोफेसर्स और बड़ी संख्या में रिसर्च स्कॉलर्स व छात्र मौजूद थे।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना से शिष्टाचार भेंट
लद्दाख प्रवास के दौरान राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने लोक भवन पहुंचकर लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) विनय कुमार सक्सेना से सौजन्य मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान श्री देवनानी ने उपराज्यपाल को 'सनातन संस्कृति की अटल दृष्टि' नामक पुस्तक भेंट स्वरूप दी।
विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक चर्चा: दोनों नेताओं के बीच देश के सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास, सुशासन (Good Governance), पर्यटन को बढ़ावा देने, उच्च शिक्षा में सुधार और देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। श्री देवनानी ने लद्दाख में चल रहे प्रशासनिक नवाचारों और विकास कार्यों की सराहना की।
ऐतिहासिक 'लेह पैलेस' की वास्तुकला की सराहना
अपनी यात्रा के दौरान स्पीकर वासुदेव देवनानी ने विख्यात ऐतिहासिक धरोहर 'लेह पैलेस' का भी विस्तृत अवलोकन किया। उन्होंने इस भव्य महल के स्थापत्य, समृद्ध इतिहास और लद्दाख की संस्कृति में इसके महत्व की जानकारी ली।
महल की भव्यता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि 17वीं शताब्दी में निर्मित यह 9 मंजिला इमारत हिमालयी और तिब्बती स्थापत्य कला का एक बेजोड़ उदाहरण है। यह महल हमारी प्राचीन धरोहरों का जीवंत प्रतीक है जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में लद्दाख के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में हुए कार्यों के चलते आज यह क्षेत्र वैश्विक पर्यटन के नक्शे पर एक बड़े केंद्र के रूप में उभरा है।
Disclaimer: यह लेख आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया एक पुनर्गठित समाचार लेख है। इसका उद्देश्य पाठकों तक सूचनात्मक और तथ्यात्मक जानकारी को स्वतंत्र पत्रकारिता के मानकों के अनुरूप पहुंचाना है।
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