अजमेर बनेगा 'झीलों की नगरी', 5.13 करोड़ से होगा चौरसियावास तालाब का कायाकल्प
जयपुर। राजस्थान का ऐतिहासिक शहर अजमेर अब पर्यटन के लिहाज से 'झीलों की नगरी' के रूप में अपनी नई और मजबूत पहचान बना रहा है। सोमवार को इस शहर के समग्र पर्यटन विकास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने अजमेर की तीसरी सबसे बड़ी झील 'चौरसियावास तालाब' के सौंदर्यीकरण कार्य की आधिकारिक रूप से आधारशिला रखी।
इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 5.13 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस सौगात से न केवल शहर के प्राकृतिक सौंदर्य में इजाफा होगा, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।
आधारशिला कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में यह तालाब देशी और विदेशी सैलानियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा। राज्य सरकार अजमेर को एक आदर्श पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने के लिए तेजी से काम कर रही है।
चौरसियावास तालाब के स्वरूप में होंगे ये बड़े बदलाव
प्रशासनिक रूपरेखा के अनुसार, चौरसियावास तालाब के भराव क्षेत्र से सभी प्रकार के अवैध अतिक्रमण पूरी तरह हटाए जाएंगे। पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां एक शानदार पाथवे (Pathway), मनमोहक बगीचा और बेहद आकर्षक लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा पाल की मरम्मत, चैनल व पार्किंग का निर्माण, सघन पौधरोपण और सजावटी पोल लगाने का काम प्रस्तावित है। तालाब के वेस्ट वियर की मरम्मत होने से इसकी जलभराव क्षमता भी बढ़ेगी, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव आसपास के भूजल स्तर पर पड़ेगा।
आनासागर और वरुण सागर में भी विकसित हो रही सुविधाएं
श्री देवनानी ने बताया कि अजमेर की प्रसिद्ध आनासागर झील पर पहले ही 8.5 किलोमीटर लंबा पाथवे, चौपाटी और नौकायन की सुविधा विकसित कर दी गई है, जिसका पर्यटक जमकर लुत्फ उठा रहे हैं। इसी तर्ज पर अब वरुण सागर झील के चारों ओर पाथवे और एक विशाल उद्यान बनाया जा रहा है। यहां वरुण देव की एक भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी और एक सुंदर घाट का निर्माण होगा, जिससे पर्यटक अपना पूरा दिन शांति से यहां बिता सकेंगे।
20 करोड़ से निखरेगा तारागढ़ किला, शुरू होगी लेपर्ड सफारी
अजमेर के ऐतिहासिक महत्व को उभारने के लिए मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने तारागढ़ दुर्ग के विकास के लिए 20 करोड़ रुपये की बड़ी सौगात दी है। महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान के इस ऐतिहासिक किले को नया रूप दिया जाएगा, जहां से ऊंचे पहाड़ों से पूरे अजमेर शहर का विहंगम दृश्य देखा जा सकेगा। इसके साथ ही, वन्यजीव प्रेमियों के लिए शहर में 'लेपर्ड सफारी' विकसित की जा रही है। यहां तेंदुए और हिरण जैसे जानवरों के साथ-साथ पृथ्वीराज चौहान के काल के ऐतिहासिक प्रतीक चिन्ह भी प्रदर्शित किए जाएंगे।
शहर के समग्र विकास पर फोकस
अजमेर में शिक्षा और खेल जगत को गति देने के लिए एक नया साइंस पार्क, एक विशाल स्टेडियम और एक भव्य कन्वेंशन सेंटर भी बनाया जाएगा। शहर के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर अंबेडकर सर्किल तक कई किलोमीटर लंबी सड़क का आकर्षक तरीके से सौंदर्यीकरण किया जा रहा है।
निष्कर्ष: अजमेर में झीलों, किलों और सफारी के विकास से यह स्पष्ट है कि शहर अब एक आधुनिक पर्यटन हब बनने की ओर अग्रसर है। इन पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से होटल, रिसॉर्ट, ट्रांसपोर्ट और खान-पान के व्यापार को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर मिलेंगे, जो अजमेर के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
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