राजस्थान को स्वच्छता में देश का नंबर-1 राज्य बनाने का लक्ष्य: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 पर विशेष समीक्षा बैठक
जयपुर, 24 जून। राजस्थान को स्वच्छता के क्षेत्र में देश का सिरमौर बनाने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। बुधवार को शासन सचिवालय स्थित पंचायती राज सभागार में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम-2026 एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
पंचायती राज मंत्री श्री मदन दिलावर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और ग्राम पंचायतों के सशक्तिकरण को लेकर कई कड़े निर्देश दिए गए और महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए गए।
मुख्य लक्ष्य एवं डेडलाइन
ग्राम पंचायतों को कचरा मुक्त बनाने और स्वच्छता को एक जनआंदोलन का रूप देने के लिए मंत्री श्री मदन दिलावर ने अधिकारियों को निम्नलिखित समयबद्ध लक्ष्य दिए हैं:
| निर्धारित तिथि | मुख्य लक्ष्य / कार्ययोजना |
| 31 मार्च (आगामी) | राजस्थान को स्वच्छता के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर लाना। |
| 31 जुलाई | 4,000 ग्राम पंचायतों में बर्तन बैंक की स्थापना और ग्रामीण क्षेत्रों से सभी 'लिगेसी वेस्ट' (पुराने कचरे के ढेर) का खात्मा। |
| 31 अक्टूबर | 1,600 ग्राम पंचायतों में चार-स्तरीय कचरा पृथक्करण (Four-tier waste segregation) एवं समग्र स्वच्छता व्यवस्था लागू करना। |
| 31 मार्च 2029 | ग्रामीण क्षेत्रों में 100% स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लक्ष्यों की पूर्ण प्राप्ति। |
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और ग्राम पंचायतों का निरीक्षण
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कचरा मुक्त पंचायतें: मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी ग्राम पंचायत में कचरे का ढेर नजर नहीं आना चाहिए। नालियों में पानी का सुचारु प्रवाह, जैविक कचरे से खाद बनाना और कचरे का सही निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
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अक्टूबर के बाद ग्राउंड जीरो पर निरीक्षण: 31 अक्टूबर के बाद स्वयं मंत्री श्री मदन दिलावर, शासन सचिव और विभागीय अधिकारियों की टीम के साथ चयनित ग्राम पंचायतों का दौरा कर जमीनी हकीकत परखेंगे। इससे पूर्व जिला स्तर के अधिकारी भी नियमित भ्रमण करेंगे।
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स्वच्छता समितियां: सभी ग्राम पंचायतों में स्वच्छता समितियों की मासिक बैठकें अनिवार्य रूप से होंगी और उनकी रिपोर्ट समय पर विभाग को भेजी जाएगी।
विलायती बबूल उन्मूलन: ग्राम पंचायतों को मिलेगा राजस्व
पर्यावरण के लिए नुकसानदायक माने जाने वाले 'विलायती बबूल' के उन्मूलन के लिए एक समन्वित कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया गया:
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संयुक्त अभियान: वन, राजस्व और पंचायती राज विभाग संयुक्त रूप से एक समेकित आदेश जारी कर इस अभियान को चलाएंगे ताकि नियमों में कोई भ्रम न रहे।
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अतिरिक्त आय: विलायती बबूल को हटाने के बाद प्राप्त होने वाली लकड़ी और चारकोल की बिक्री से होने वाली आय संबंधित ग्राम पंचायतों को दी जाएगी। इस फंड का उपयोग स्थानीय विकास कार्यों में होगा।
'मिशन हरियालो राजस्थान' बनेगा जन आंदोलन
अभियान की सफलता के लिए इसे केवल सरकारी कार्यक्रम न रखकर जन आंदोलन बनाने के निर्देश दिए गए हैं:
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पौधारोपण लक्ष्य: प्रति सप्ताह प्रत्येक सरकारी कार्मिक द्वारा 10 पौधे और प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा 5 पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। निजी विद्यालयों को भी इससे जोड़ा जाएगा।
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उपयुक्त प्रजातियों का चयन: स्थानीय जलवायु के अनुकूल नीम, पीपल, बरगद आदि के पौधे लगाए जाएंगे ताकि उनके जीवित रहने की दर अधिक हो।
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मॉनिटरिंग और जियो-टैगिंग: पिछले वर्ष लगाए गए पौधों की वर्तमान स्थिति का आकलन करने और उनकी री-जियो टैगिंग (Re-Geo Tagging) कराने के निर्देश दिए गए हैं। 'हरियालो ऐप' का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
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प्रोत्साहन: पौधारोपण व पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और पंचायतों को सम्मानित करने के लिए एक विशेष योजना तैयार की जाएगी।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी:
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में पंचायती राज राज्य मंत्री श्री ओटाराम देवासी, पंचायती राज के शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगाराम, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की निदेशक सुश्री शशि सलोनी खेमका, वाटरशेड निदेशक श्रीमती कल्पना अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के आला अधिकारी मौजूद रहे।
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