पाली: 80 लाख से बनी सिंदरू की हाईटेक नर्सरी का मंत्री कुमावत ने किया निरीक्षण, मानसून में मिलेंगे 1 लाख पौधे
जयपुर, 24 जून: राजस्थान के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री और पाली विधायक जोराराम कुमावत ने पाली विधानसभा क्षेत्र के सिंदरू गांव का दौरा किया। यहां उन्होंने वन विभाग द्वारा स्थापित की गई नई हाईटेक नर्सरी का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान मंत्री ने अत्याधुनिक सुविधाओं और वहां तैयार किए जा रहे पौधों की बारीकी से जांच की।
मंत्री कुमावत ने बताया कि पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से यह नर्सरी बेहद जर्जर और बदहाल स्थिति में थी। क्षेत्र में हरियाली और विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इसका पूरी तरह से कायाकल्प करने का निर्णय लिया। अब यह एक अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी के रूप में विकसित हो चुकी है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय किसानों और पर्यावरण को मिलेगा।
80 लाख की लागत से हुआ कायाकल्प, 3 हेक्टेयर तक बढ़ा दायरा
निरीक्षण के दौरान कैबिनेट मंत्री ने जानकारी दी कि इस पूरी नर्सरी को आधुनिक रूप देने में करीब 80 लाख रुपये का बजट खर्च किया गया है। इसके तहत परिसर में हाईटेक पॉली हाउस, पक्के बेड, मजदूरों के लिए शेड और सिंचाई की सुचारू व्यवस्था के लिए फार्म पोंड (खेत तलाई) का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, क्षेत्र में पौधों की भारी मांग को ध्यान में रखते हुए नर्सरी का दायरा तीन गुना कर दिया गया है। पहले यह केवल 1 हेक्टेयर में सीमित थी, जिसे अब बढ़ाकर 3 हेक्टेयर कर दिया गया है।
मानसून में रियायती दर पर वितरित होंगे एक लाख पौधे
पर्यावरण संरक्षण को राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए श्री कुमावत ने कहा कि आगामी मानसून सत्र में इस नर्सरी का पूरा लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा। ग्रामीणों को बेहद रियायती दरों पर नीम, शहतूत, देशी बबूल, जामुन, बेर और अमलतास की उन्नत प्रजातियों के लगभग एक लाख पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि पौधों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
निष्कर्ष
सिंदरू में इस स्तर की अत्याधुनिक नर्सरी की शुरुआत क्षेत्र के किसानों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक बड़ी सौगात है। पॉली हाउस में हाईटेक तरीके से तैयार किए जा रहे ये पौधे कम पानी में भी तेजी से पनपने में सक्षम होंगे। इससे वृक्षारोपण अभियान को गति मिलेगी और आम जनता को अब उच्च गुणवत्ता वाले पौधे अपने ही स्तर पर आसानी से सुलभ हो सकेंगे।
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