कोटा: डांग योजना के तहत 20 करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी, मंत्री मदन दिलावर के अधिकारियों को सख्त निर्देश
कोटा: राजस्थान के कोटा जिले में बुनियादी ढांचे और ग्रामीण विकास को रफ्तार देने के लिए बुधवार को डांग क्षेत्रीय विकास योजना की एक अहम बैठक आयोजित हुई। जिला कलेक्ट्रेट सभागार में शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर और जिला कलक्टर पीयूष समारिया की अध्यक्षता में वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना को सर्वसम्मति से हरी झंडी दे दी गई। इस योजना के तहत जिले के पिछड़े गांवों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए करोड़ों रुपये के प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया है।
इस खबर की मुख्य बातें:
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296 प्रोजेक्ट्स मंजूर: कोटा जिले में करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से 296 विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार की गई है।
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237 गांवों की बदलेगी तस्वीर: इटावा, सुल्तानपुर, खैराबाद और लाडपुरा ब्लॉक की 47 ग्राम पंचायतों के 237 गांवों में बुनियादी सुविधाएं विकसित होंगी।
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फोकस एरिया: स्कूलों का जीर्णोद्धार, इंटरलॉकिंग सड़कें, पक्की नालियां, मुक्तिधाम और धार्मिक स्थलों का विकास।
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मंत्री की सख्त हिदायत: सफाई के लिए आवंटित फंड का इस्तेमाल सिर्फ स्वच्छता में हो, उखड़ी सड़कों की तुरंत मरम्मत की जाए।
20 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का खाका तैयार समिति की बैठक में प्रस्तावित कार्यों को जरूरत के हिसाब से दो श्रेणियों में बांटा गया है। पहली प्राथमिकता के तहत 8 करोड़ रुपये से अधिक के 127 कार्य शामिल किए गए हैं। वहीं, दूसरी प्राथमिकता में 12 करोड़ रुपये से अधिक बजट के 169 विकास कार्यों को रखा गया है। इन प्रस्तावों में मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में स्कूलों के नए कक्षों का निर्माण, नालियों के साथ इंटरलॉकिंग सड़कें, सुरक्षा दीवार, श्मशान घाट और धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार शामिल है। जिला स्तर पर अनुमोदन के बाद अब इस प्रस्ताव को राज्य सरकार और डांग क्षेत्रीय विकास बोर्ड को भेजा जाएगा, जहां से फंड का आवंटन होगा।
जलभराव रोकने और सड़कों की मरम्मत पर जोर बैठक के दौरान पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि ठेकेदार इंटरलॉकिंग सड़कों के साथ पक्की नालियों का निर्माण भी अनिवार्य रूप से करें। उन्होंने कहा कि पक्की नालियां न होने के कारण गांवों में जलभराव और कीचड़ की समस्या पैदा होती है, जिससे बीमारियां फैलने का डर रहता है। इसके साथ ही उन्होंने सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि जिले में जहां भी सड़कें जर्जर या उखड़ी हुई हैं, उनकी मरम्मत तय समय सीमा के भीतर की जाए।
सफाई व्यवस्था से कोई समझौता नहीं ग्रामीण स्वच्छता को लेकर शिक्षा मंत्री दिलावर ने पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गांवों की साफ-सफाई में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार द्वारा जो पैसा विशेष रूप से स्वच्छता के लिए दिया जा रहा है, उसका 100% उपयोग सिर्फ सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ही किया जाना चाहिए।
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