यूपी चुनाव 2027: 2007 का इतिहास दोहराने की तैयारी में मायावती, OBC समाज को दिया 'सत्ता की मास्टर चाबी' हासिल करने का मंत्र
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अभी से कमर कस ली है। मंगलवार (16 जून 2026) को लखनऊ में पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों में उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समाज पर अपना विशेष फोकस स्पष्ट कर दिया है। मायावती का मुख्य लक्ष्य 2007 की तरह यूपी में फिर से बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना है। इसके लिए उन्होंने पदाधिकारियों को जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज करने और जनाधार बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए हैं।
इस खबर की मुख्य बातें:
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2027 की तैयारी: बसपा प्रमुख का 2007 जैसी पूर्ण बहुमत सरकार बनाने पर जोर, जमीनी स्तर पर जनाधार बढ़ाने के निर्देश।
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विपक्ष पर सीधा प्रहार: मायावती का आरोप- विरोधी दलों ने मंडल आयोग (27% आरक्षण) का विरोध किया और अब इसे निष्क्रिय कर रहे हैं।
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बसपा का दावा: ओबीसी और दलितों का वास्तविक कल्याण केवल बहुजन समाज पार्टी की 'आयरन लेडी' सरकार में ही सुरक्षित है।
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मास्टर चाबी का मंत्र: समाज से रोना-धोना छोड़कर सत्ता की 'मास्टर चाबी' अपने हाथों में लेने और शासक वर्ग बनने की अपील।
विरोधी दलों पर संकीर्ण और जातिवादी होने का आरोप
बैठक के दौरान मायावती ने विपक्षी पार्टियों और मौजूदा सरकारों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए विरोधी दल भले ही किसी एक व्यक्ति को आगे कर दें, लेकिन ओबीसी समाज के समग्र विकास को लेकर उनका रवैया हमेशा संकीर्ण और जातिवादी रहा है। मायावती ने याद दिलाया कि सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 27 फीसदी आरक्षण देने वाली 'मंडल आयोग' की रिपोर्ट को लागू करने का इन्हीं विरोधी दलों ने तीखा विरोध किया था और आज भी वे इस आरक्षण को अंदरखाने बेअसर करने में लगे हुए हैं।
बसपा के ऐतिहासिक कार्यों की दिलाई याद
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि जब उनकी सरकार बनी, तो उन्होंने न केवल मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करवाया, बल्कि सदियों से उपेक्षित रहे ओबीसी समाज के संतों, गुरुओं और महापुरुषों को उचित सम्मान भी दिया। सामाजिक परिवर्तन के प्रणेता महात्मा ज्योतिबा फुले, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज और श्री नारायणा गुरु को पूरा आदर देकर बसपा ने पिछड़े वर्गों के स्वाभिमान को जगाया। इसके अलावा, देश में पहली बार बसपा सरकार ने ही दलित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए अलग से मंत्रालय, मंत्री और विशेष आयोग का गठन किया था।
'कागजों तक सीमित हैं मौजूदा सरकार के काम'
वर्तमान सरकारों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मायावती ने कहा कि आजकल जनहित और जनकल्याण के काम असलियत में नहीं, बल्कि सिर्फ कागजों पर हो रहे हैं। उन्होंने सरकारों की नीयत और नीति दोनों में खोट बताते हुए कहा कि इसी वजह से ओबीसी समाज की स्थिति सुधर नहीं पा रही है।
अंत में मायावती ने एक मजबूत संदेश देते हुए कहा कि अपनी समस्याओं का रोना रोते रहने से कुछ हासिल नहीं होगा। इसका एकमात्र समाधान यही है कि शोषित समाज बसपा के साथ जुड़े और सत्ता की 'मास्टर चाबी' अपने हाथ में लेकर खुद शासक वर्ग बने।
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