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तकनीकी

फर्जी MMS और वायरल वीडियो लिंक के जाल में न फंसें, बैंकिंग जानकारी हो सकती है चोरी

'इंडियन भाभी MMS' के नाम से फैल रहे फर्जी लिंक से सावधान रहें। यह साइबर ठगों का जाल है जो आपके फोन में वायरस भेजकर बैंक खाता खाली कर रहे हैं। सतर्क रहें और सुरक्षित रहें।
द्वारा Bhupendra Singh Sonwal 📅 16 Jun 2026 👁️ 7 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
फर्जी MMS और वायरल वीडियो लिंक के जाल में न फंसें, बैंकिंग जानकारी हो सकती है चोरी

नई दिल्ली/मुंबई: इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में साइबर अपराधी निर्दोष नागरिकों को ठगने के लिए लगातार नए और घातक तरीके अपना रहे हैं। ताजा मामला 'इंडियन भाभी एमएमएस लीक' (Indian Bhabhi MMS) के नाम से वायरल हो रहे फर्जी लिंक्स का है, जो व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल रहे हैं। इन आपत्तिजनक लिंक्स के पीछे साइबर ठगों का एक बड़ा षड्यंत्र छिपा है, जिसका उद्देश्य जिज्ञासावश लिंक खोलने वाले यूजर्स के बैंक खातों को पूरी तरह खाली करना है।

इस खबर की मुख्य बातें:

  • जिज्ञासा का गलत फायदा: साइबर अपराधी "MMS लीक" या "वायरल वीडियो" जैसे आकर्षक लेकिन आपत्तिजनक शीर्षक वाले मैसेज भेजकर लोगों को लुभाते हैं।

  • चुपके से मालवेयर इंस्टॉलेशन: लिंक पर क्लिक करते ही यूजर के फोन में बैकग्राउंड में एक खतरनाक मालवेयर (वायरस) या अज्ञात APK फाइल डाउनलोड हो जाती है।

  • OTP और डेटा की चोरी: यह वायरस न केवल फोन की गैलरी और मैसेजों का एक्सेस लेता है, बल्कि बैंकिंग ट्रांजेक्शन के दौरान आने वाले ओटीपी (OTP) को भी ठगों को फॉरवर्ड कर देता है।

  • वित्तीय धोखाधड़ी: फोन का नियंत्रण मिलते ही साइबर अपराधी मिनटों के भीतर यूजर के बैंक खाते से सारा पैसा निकाल लेते हैं।

कैसे काम करता है यह खतरनाक जाल?

जांच एजेंसियों के अनुसार, अपराधी मानवीय मनोविज्ञान का सहारा लेते हैं। जैसे ही कोई यूजर किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करता है, उसे कोई वीडियो दिखने के बजाय फोन में एक अज्ञात फाइल इंस्टॉल करने का सुझाव दिया जाता है। एक बार जब यह मालवेयर फोन में सक्रिय हो जाता है, तो यह यूजर की हर डिजिटल गतिविधि पर नजर रखने लगता है।

विशेष रूप से जब यूजर नेट बैंकिंग या यूपीआई (UPI) के जरिए भुगतान करता है, तो यह वायरस की-लॉग्स (Key-logs) के जरिए पासवर्ड और पिन चुरा लेता है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह बैंक से प्राप्त होने वाले वन-टाइम पासवर्ड (OTP) को यूजर के इनबॉक्स से सीधे अपराधियों तक पहुंचा देता है, जिससे पीड़ित को धोखाधड़ी की भनक तक नहीं लगती और खाता साफ हो जाता है।

बचाव के लिए क्या करें?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस प्रकार के फ्रॉड से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश साझा किए हैं:

  1. सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर आने वाले किसी भी अनजान या संदेहास्पद लिंक पर कभी क्लिक न करें।

  2. हमेशा आधिकारिक ऐप स्टोर (Google Play Store या Apple App Store) से ही ऐप्स डाउनलोड करें।

  3. अपने बैंकिंग विवरण, पासवर्ड या ओटीपी की जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

  4. यदि गलती से किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक हो जाए, तो तुरंत फोन का इंटरनेट बंद करें, डेटा बैकअप लें और फोन को फैक्ट्री रीसेट (Format) करें।

  5. साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल 'नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल' (National Cyber Crime Portal) पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

Disclaimer: यह लेख केवल जन-जागरूकता और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी ऑनलाइन गतिविधि के दौरान सतर्कता बरतें। साइबर अपराध से संबंधित आधिकारिक सहायता के लिए केवल अधिकृत सरकारी वेबसाइटों (जैसे cybercrime.gov.in) का ही उपयोग करें।

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संपादक (Editor)

Bhupendra Singh Sonwal

भूपेन्द्र सिंह सोनवाल एक प्रखर डिजिटल पत्रकार और भारतीय समाचार मीडिया कंपनी 'मिशन की आवाज' के संस्थापक हैं। वे मुख्य रूप से राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, और नीतिगत मामलों पर तीखी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। आंकड़ों की तह तक जाना और जमीनी सच को बेबाकी से पेश करना उनकी विशेषता है। तथ्य-आधारित और स्वतंत्र पत्रकारिता के जरिए वे समाज के हर वर्ग तक सही सूचना पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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