राजस्थान के शहरों को कचरा-मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी: मुख्य सचिव ने दिए स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 को 'जनआंदोलन' में बदलने के निर्देश
जयपुर, 02 जून 2026
राजस्थान को देश के सामने एक स्वच्छ, आधुनिक और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन (Scientific Waste Management) आधारित मॉडल के रूप में पेश करने के लिए राज्य सरकार ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 की प्रगति का जायजा लिया।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी स्वच्छता अभियान तब तक पूरी तरह सफल नहीं हो सकता, जब तक उसमें जनता की सीधी भागीदारी न हो। इसलिए, इस मिशन को सरकारी फाइलों से बाहर निकालकर धरातल पर एक व्यापक 'जनआंदोलन' का रूप दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में मिशन सुव्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहा है और इसकी पहुंच को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नागरिक सहभागिता (Citizen Participation) को बढ़ाना बेहद जरूरी है।
सतत स्वच्छता और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत राज्य के शहरी क्षेत्रों में केवल साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि अपशिष्ट के स्थायी समाधान पर काम किया जा रहा है। इसके लिए बहुस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF): सूखे कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसके पुनर्चक्रण (Recycling) को आसान बनाना।
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सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट्स: ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीकों से निस्तारण।
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सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP): उपयोग किए जा चुके गंदे जल का उपचार कर उसे पुनः उपयोग के योग्य बनाना।
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बायो-रिमेडिएशन: पुराने जमा कचरे (लीगेसी वेस्ट) को जैविक उपचार के जरिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना साफ करना।
इन तकनीकी घटकों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर जनजागरूकता बढ़ाने के लिए डोर-टू-डोर अभियान, नुक्कड़ नाटक, कार्यशालाओं और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए आम नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है।
वेस्ट-टू-एनर्जी और तकनीकी एकरूपता पर विशेष जोर
मुख्य सचिव ने आगामी 'स्वच्छ सर्वेक्षण' की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को पूरी सजगता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से जयपुर में संचालित 1000 टीपीडी (टन प्रति दिन) क्षमता वाले वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट (कचरे से बिजली बनाने वाले संयंत्र) की कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा करने को कहा, ताकि इसकी पूरी क्षमता का उपयोग किया जा सके।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के सभी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्रों में तकनीकी एकरूपता (Technical Uniformity) सुनिश्चित की जाए। इसके लिए अलग-अलग शहरी निकायों (Urban Local Bodies) को एक मंच पर आकर अपने नवाचारों और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों (Best Practices) को एक-दूसरे के साथ साझा करना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए नियमित रूप से तकनीकी कार्यशालाएं और ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए जाएंगे।
आंकड़ों में समझिए: राजस्थान में मिशन की अब तक की प्रगति
स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव श्री रवि जैन ने बैठक में राज्य में चल रही परियोजनाओं का एक विस्तृत और प्रामाणिक वित्तीय व भौतिक लेखा-जोखा प्रस्तुत किया:
| मुख्य संकेतक (Key Indicators) | वर्तमान स्थिति और प्रगति आंकड़े |
| कुल स्वीकृत बजट | ₹4,804.94 करोड़ |
| संचालित ठोस अपशिष्ट संयंत्र | 27 संयंत्र (कई अन्य निविदा और निर्माण प्रक्रिया में) |
| निस्तारित लीगेसी वेस्ट | 97.43 लाख घनमीटर (वैज्ञानिक तरीके से साफ) |
| पुनः उपयोग योग्य बनाई गई भूमि | लगभग 729.79 एकड़ (कचरा डंपिंग यार्ड से मुक्त) |
सचिव ने बताया कि जयपुर के सफल मॉडल की तर्ज पर अब जोधपुर में भी वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा, राज्य को सिंगल-यूज प्लास्टिक से पूरी तरह मुक्त करने के लिए विशेष अभियान, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की निगरानी और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए 'सफाई सेवा मैराथन' जैसी गतिविधियां लगातार आयोजित की जा रही हैं।
अमृत 2.0 परियोजनाओं को समय पर पूरा करने का लक्ष्य
मुख्य सचिव ने 'अमृत 2.0' (AMRUT 2.0) के तहत चल रहे पेयजल और स्वच्छता के कार्यों की गति बढ़ाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि शहरी क्षेत्रों में जल प्रबंधन और अपशिष्ट निस्तारण सीधे तौर पर आम आदमी के स्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़ा हुआ विषय है। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्थानीय निकायों को निर्देश दिए कि वे अपने स्तर पर भी नए और छोटे आत्मनिर्भर स्वच्छता मॉडल विकसित करें।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक श्री जुइकर प्रतीक चंद्रशेखर, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के मुख्य अभियंता श्री अरुण व्यास सहित विभाग के अधीक्षण अभियंता, अधिशाषी अभियंता और अन्य वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे।
Disclaimer (अस्वीकरण):
यह समाचार लेख स्वायत्त शासन विभाग और मुख्य सचिव कार्यालय, राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित आधिकारिक प्रशासनिक बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों और प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य आम जनता और शोधकर्ताओं तक कचरा प्रबंधन और शहरी विकास से जुड़ी प्रामाणिक सरकारी जानकारियों को पहुंचाना है। स्वच्छ भारत मिशन की योजनाओं, निविदाओं या वित्तीय आवंटन से संबंधित किसी भी नवीनतम और वैधानिक संशोधन की पुष्टि के लिए कृपया स्वायत्त शासन विभाग, राजस्थान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन करें।
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