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राजस्थान में नीलाम खानों के जल्द संचालन पर जोर: मुख्य सचिव ने विभागों को दिया 'फेसिलिटेटर' बनने का कड़ा निर्देश

By Jyoti Singh 📅 02 Jun 2026 👁️ 11 Views ⏱️ 1 Min Read
राजस्थान में नीलाम खानों के जल्द संचालन पर जोर: मुख्य सचिव ने विभागों को दिया 'फेसिलिटेटर' बनने का कड़ा निर्देश

जयपुर, 02 जून 2026

राजस्थान में खनन क्षेत्र को अधिक गतिशील, पारदर्शी और राजस्व-उन्मुख बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया है। मंगलवार को सचिवालय के चिंतन कक्ष में आयोजित एक उच्च स्तरीय अंतर-विभागीय बैठक में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने सख्त निर्देश दिए हैं कि ऑक्शन (नीलाम) हो चुकी खानों को जल्द से जल्द परिचालन में लाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों से आह्वान किया है कि वे महज़ एक नियामक (रेगुलेटर) की भूमिका तक सीमित न रहें, बल्कि उद्योगों और निवेशकों के लिए एक 'फेसिलिटेटर' (सुविधा प्रदाता) के रूप में आगे आएं, ताकि अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल और त्वरित किया जा सके।

राजस्व, रोजगार और निवेश में होगी भारी वृद्धि

मुख्य सचिव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नीलाम की गई खदानों के समय पर शुरू होने से राज्य की अर्थव्यवस्था को बहुआयामी लाभ प्राप्त होंगे। ऑक्शन खानों के चालू होने से प्रदेश में बड़े पैमाने पर नया निवेश आएगा, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

इसके साथ ही, राज्य सरकार के राजस्व में भारी वृद्धि होगी। उल्लेखनीय है कि नीलाम खानों को समयबद्ध तरीके से चालू करने पर केंद्र सरकार की ओर से राज्य को विशेष प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) भी प्रदान की जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वैधानिक और वैध खनन को बढ़ावा मिलने से अवैध खनन गतिविधियों पर स्वतः ही अंकुश लगेगा और राज्य के बेशकीमती खनिजों का दोहन एक पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से हो सकेगा। वर्तमान में, राजस्थान 101 मेजर मिनरल ब्लॉकों और माइनर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी के मामले में पूरे देश में एक अग्रणी राज्य बना हुआ है।

पर्यावरण और वन अनुमतियों के लिए तय होगी टाइमलाइन

खदानों को शुरू करने में सबसे बड़ी बाधा आमतौर पर विभिन्न विभागों की एनओसी (NOC) और अनुमतियों में लगने वाला समय होता है। इस बाधा को दूर करने के लिए मुख्य सचिव ने स्टेट लेवल एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA - सीया) को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण स्वीकृति (Environmental Clearance) जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए। इसके लिए एक स्पष्ट टाइमलाइन बननी चाहिए ताकि उद्यमियों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और एक ही बार में सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो जाएं।

वन विभाग को भी निर्देशित किया गया है कि वे वन एनओसी, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और इकोलॉजिकल सेंसिटिव जोन (ESZ) से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को अपने आधिकारिक पोर्टल पर स्पष्ट रूप से अपलोड करें। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और निवेशकों को पहले से ही स्थिति स्पष्ट होगी। बैठक में उपस्थित सीया के अध्यक्ष श्री मुनीश गर्ग ने पूर्ण आश्वासन दिया कि उनके स्तर पर लंबित प्रकरणों के निस्तारण और अनुमतियां देने के कार्य में और अधिक तेजी लाई जाएगी।

सड़क सुरक्षा: डंपरों में अनिवार्य होगा स्पीड गवर्नर और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम

खनन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। मुख्य सचिव ने खनन क्षेत्रों से निकलने वाले डंपर और भारी वाहनों से आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। इन दुर्घटनाओं को रोकने और खनिज परिवहन को सुरक्षित बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि खनिज परिवहन करने वाले सभी वाहनों में 'स्पीड गवर्नर' (गति नियंत्रक) लगाना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा, खनिज के अवैध परिवहन को रोकने और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए वाहनों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) लगाया जाएगा। इस ट्रैकिंग सिस्टम को सीधे खान विभाग और परिवहन विभाग के सर्वर से इंटीग्रेट (जोड़ा) किया जाएगा। प्रमुख सचिव (परिवहन), श्री भवानी सिंह देथा ने बैठक में बताया कि विभाग द्वारा इंटरसेप्टर के माध्यम से तेज गति से चलने वाले वाहनों पर लगातार दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है और गति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

अंतर-विभागीय समन्वय ही है सफलता की कुंजी

अतिरिक्त मुख्य सचिव (माइंस एवं पेट्रोलियम) श्रीमती अपर्णा अरोरा ने बैठक में विभागीय चुनौतियों का विस्तृत खाका पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑक्शन की गई खानों को धरातल पर लाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, क्योंकि इसके लिए राजस्व, वन और पर्यावरण जैसे कई अलग-अलग विभागों से एक साथ अनुमतियां लेनी होती हैं। इनमें होने वाली देरी का सीधा असर निवेश और राज्य के खजाने पर पड़ता है। समय पर सभी अनुमतियां मिलने से ही प्रदेश में रोजगार के द्वार खुलेंगे।

बैठक के दौरान जयपुर और जोधपुर नगर विकास न्यासों (JDA और JODA) के अधिकार क्षेत्र में आने वाली ऑक्शन खानों में भी खनन गतिविधियां जल्द शुरू करने की संभावनाओं पर विस्तार से मंथन किया गया। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (नगरीय विकास) श्री आलोक गुप्ता, विशिष्ट सचिव माइंस श्रीमती नम्रता वृष्णि, वन विभाग के एसएस श्री सुदर्शन, और सीया के सदस्य सचिव श्री विजय एन. सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।


Disclaimer: यह समाचार लेख जनहित और सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें प्रस्तुत तथ्य और आंकड़े राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित प्रशासनिक बैठक की आधिकारिक जानकारी पर आधारित हैं। खनन नीतियों, नियमों या अनुमतियों से संबंधित किसी भी आधिकारिक और कानूनी जानकारी के लिए पाठकों को राजस्थान सरकार के खान एवं भूविज्ञान विभाग (Mines and Geology Department) की आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन करने की सलाह दी जाती है।

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Jyoti Singh

ज्योति सिंह एक कुशल पत्रकार, शोध विश्लेषक और प्रमुख डिजिटल समाचार मंच मिशन की आवाज़ की सह-संस्थापक हैं। अपने पति भूपेंद्र सिंह सोनवाल (संस्थापक और मुख्य संपादक) के साथ मिलकर काम करते हुए, ज्योति न केवल पर्दे के पीछे एक सहयोगी हैं, बल्कि मीडिया नेटवर्क के विकास की मुख्य सूत्रधार भी हैं। उनकी जीवन कहानी उच्च जोखिम वाली खोजी पत्रकारिता और गहरे पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाने की एक प्रेरणादायक मिसाल है, जो यह साबित करती है कि एक साझा दृष्टिकोण स्वतंत्र क्षेत्रीय मीडिया में क्रांति ला सकता है।

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