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राजस्थान

पाली के किसान का कमाल: बंजर जमीन पर उगाए खजूर, 270 पौधों से सालाना 10 लाख की बंपर कमाई

राजस्थान के पाली में ड्रिप सिंचाई और प्राकृतिक खाद से किसान ने मरुभूमि में उगाए खजूर। 270 पौधों से सालाना 10 लाख की कमाई कर पेश की नई मिसाल।
द्वारा Bhupendra Singh Sonwal 📅 18 Jun 2026 👁️ 27 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
पाली के किसान का कमाल: बंजर जमीन पर उगाए खजूर, 270 पौधों से सालाना 10 लाख की बंपर कमाई

पाली: राजस्थान के पाली जिले में एक प्रगतिशील किसान ने मरुभूमि में खजूर की सफल खेती कर कृषि क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश की है। सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के खैरोफड़ा गांव में जैविक खाद और बूंद-बूंद सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) तकनीक का इस्तेमाल कर यह किसान सालाना 10 लाख रुपये का मुनाफा कमा रहा है। बुधवार को सूबे के पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने इस शानदार खजूर के बाग का दौरा किया और इस उन्नत कृषि मॉडल की जमकर सराहना करते हुए इसे प्रदेश के अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन प्रेरणा स्रोत बताया।

इस खबर की मुख्य बातें:

  • 5 साल की मेहनत का फल: किसान ने करीब 5 साल पहले खेत में खजूर के 270 पौधे लगाए थे, जो अब बंपर पैदावार दे रहे हैं।

  • शानदार आमदनी: इस प्राकृतिक और उन्नत खेती की बदौलत किसान को हर साल लगभग 10 लाख रुपये की आय हो रही है।

  • पानी की बचत: सिंचाई के लिए ड्रिप तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो मरुस्थलीय इलाकों के लिए बेहद कारगर है।

  • जीरो बजट फार्मिंग का शानदार मॉडल: रासायनिक उर्वरकों की जगह पूरी तरह से प्राकृतिक और जैविक खाद का प्रयोग किया गया है।

5 साल के धैर्य ने बदली तकदीर बाग के निरीक्षण के दौरान किसान ने कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत को अपनी सफलता की कहानी बताई। किसान ने बताया कि उसने करीब 5 साल पहले प्रयोग के तौर पर अपने खेत में खजूर के 270 पौधे रोपे थे। वैज्ञानिक तरीके से सही प्रबंधन और लगातार उचित देखभाल के चलते आज ये सभी पौधे पूरी तरह से बड़े हो चुके हैं और फल देने लगे हैं। खजूर की इस शानदार पैदावार से उसे हर साल 10 लाख रुपये तक की कमाई हो रही है। मंत्री कुमावत ने किसान के इस अभिनव प्रयास की जमकर पीठ थपथपाई।

जैविक खाद और ड्रिप इरिगेशन का जादुई असर इस खजूर के बाग की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) होना है। पानी की कमी वाले इस मारवाड़ क्षेत्र में किसान ने 'बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति' को अपनाया है। इससे पानी की बर्बादी पूरी तरह रुक गई है और हर पौधे को जरूरत के हिसाब से पानी मिल रहा है। इसके साथ ही, पैदावार बढ़ाने के लिए यूरिया या अन्य केमिकल वाले खाद की जगह सिर्फ जैविक और प्राकृतिक खाद का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक से जहां खेत की उपजाऊ क्षमता बरकरार है, वहीं खेती में आने वाला खर्च भी काफी कम हो गया है।

प्रदेश के किसानों के लिए बना 'रोल मॉडल' पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने किसान की तारीफ करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों और कम पानी में खजूर की ऐसी लहलहाती खेती मरुभूमि के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। प्राकृतिक जल संरक्षण और सटीक कृषि प्रबंधन का यह मॉडल राज्य सरकार के 'किसानों की आय दोगुनी करने' के संकल्प को सीधा साकार कर रहा है। मंत्री ने मौके पर मौजूद कृषि विभाग के आला अधिकारियों और आसपास के किसानों से आह्वान किया कि वे इस जीरो बजट प्राकृतिक खेती के मॉडल से सीखें और अपने इलाकों में बागवानी को बढ़ावा दें।

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संपादक (Editor)

Bhupendra Singh Sonwal

भूपेन्द्र सिंह सोनवाल एक प्रखर डिजिटल पत्रकार और भारतीय समाचार मीडिया कंपनी 'मिशन की आवाज' के संस्थापक हैं। वे मुख्य रूप से राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, और नीतिगत मामलों पर तीखी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। आंकड़ों की तह तक जाना और जमीनी सच को बेबाकी से पेश करना उनकी विशेषता है। तथ्य-आधारित और स्वतंत्र पत्रकारिता के जरिए वे समाज के हर वर्ग तक सही सूचना पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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