राजस्थान में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी तेज, ड्राफ्ट के लिए रिटायर्ड जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में कमेटी गठित
जयपुर। राजस्थान में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में भजनलाल शर्मा सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने 'राजस्थान समान नागरिक संहिता, 2026' विधेयक का मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन कर दिया है। इस कानून के लागू होने से प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए एक समान पारिवारिक और नागरिक नियम प्रभावी हो जाएंगे।
सोमवार, 22 जून को शासन सचिवालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री श्री जवाहर सिंह बेढम ने संयुक्त रूप से यह जानकारी दी। मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पूरी पारदर्शिता और समावेशी दृष्टिकोण के साथ इस दिशा में आगे बढ़ रही है।
संवैधानिक मर्यादाओं और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 14 अप्रैल, 2026 को हुई कैबिनेट की बैठक में इस विषय पर ठोस कार्यवाही करने का निर्णय लिया गया था। सरकार ने साफ किया है कि इस नए कानून के दायरे में आदिवासी समुदाय के रीति-रिवाजों और परंपराओं को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा और उन्हें मुकम्मल संवैधानिक संरक्षण दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज संभालेंगी कमेटी की कमान
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने बताया कि यूसीसी विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित इस उच्च स्तरीय समिति की कमान उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है। समिति में विभिन्न क्षेत्रों के तकनीकी और कानूनी विशेषज्ञों को बतौर सदस्य शामिल किया गया है, जिनमें निम्नलिखित नाम हैं:
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सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री शत्रुघ्न सिंह
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राजस्थान उच्च न्यायालय के अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री बसंत सिंह छाबा
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राजकीय विधि महाविद्यालय, श्रीगंगानगर के पूर्व प्राचार्य श्री रामस्वरूप अग्रवाल
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डॉ. शुचि चौहान
इसके अलावा, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) को इस विशेष समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।
जनता और संगठनों से संभाग स्तर पर लिया जाएगा फीडबैक
इस प्रस्तावित कानून को सर्वसमावेशी और व्यावहारिक बनाने के लिए समिति जल्द ही संभाग स्तर पर जाकर आम जनता, सामाजिक संगठनों और विभिन्न हितधारकों से सीधे संवाद की प्रक्रिया शुरू करेगी। इसके साथ ही एक आधिकारिक वेबसाइट भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके माध्यम से राज्य का कोई भी नागरिक सीधे अपने सुझाव या आपत्तियां कमेटी तक ऑनलाइन भेज सकेगा।
क्या-क्या बदल जाएगा इस कानून के आने से?
समान नागरिक संहिता का मुख्य उद्देश्य धर्म, जाति या समुदाय के निजी कानूनों से ऊपर उठकर सभी के लिए विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे सामाजिक मामलों में एक जैसा कानून सुनिश्चित करना है। इसके लागू होने से पर्सनल लॉ में महिलाओं के साथ होने वाले विसंगतिपूर्ण भेदभाव खत्म होंगे और लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा। इसके तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रावधान प्रस्तावित हैं:
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विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण कराना होगा।
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बहुविवाह (Polygamy) की प्रथा पर पूरी तरह से रोक लगेगी।
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लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन करना आवश्यक होगा।
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पैतृक संपत्ति में बेटे और बेटी दोनों को बराबर का कानूनी अधिकार मिलेगा।
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि भारतीय संविधान के भाग 4 में वर्णित राज्य की नीति के निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य सरकार यह कदम उठा रही है, जो देश के समस्त राज्य क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का निर्देश देता है।
निष्कर्ष
राजस्थान में समान नागरिक संहिता (UCC) के लिए हाई-लेवल कमेटी का गठन यह दर्शाता है कि राज्य सरकार इस विधिक प्रक्रिया को लेकर योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई में बनने वाला यह ड्राफ्ट न केवल कानूनी विसंगतियों को दूर करने का प्रयास करेगा, बल्कि पारिवारिक मामलों में महिलाओं के अधिकारों को सुदृढ़ करने में भी मददगार साबित हो सकता है। आदिवासी समुदाय के संरक्षण के वादे के साथ शुरू हुई यह पहल राजस्थान की सामाजिक और कानूनी व्यवस्था को एक नया ढांचा देने की दिशा में अग्रसर है।
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