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राजस्थान

संत हरिंद्रानंद सरस्वती को लेने पहुंचे डांग क्षेत्र के पंच पटेल

द्वारा News Room 📅 15 Jul 2023 👁️ 107 व्यूज़ ⏱️ 1 मिनट रीड
संत हरिंद्रानंद सरस्वती को लेने पहुंचे डांग क्षेत्र के पंच पटेल

बगुला दह स्थान पर हुई ध्रुवघटा भक्त मंडल के सदस्यों की बैठक

सूरौठ, करौली: गांव करसोली के पास स्थित जगर बांध के किनारे बगुला दह स्थान पर सोमवार को ध्रुवघटा भक्त मंडल के सदस्यों की बैठक आयोजित हुई। बैठक में डांग क्षेत्र के 8 गांव मावई, 5 गांव फागुना एवं 84 क्षेत्र मासलपुर के पंच पटेलों सहित सूरौठ, हिंडौन, तिघरिया आदि जगह के भक्तगण मौजूद रहे। संत हरेंद्रानंद सरस्वती के शिष्य प्रमोद तिवाड़ी सूरौठ, राजेंद्र चतुर्वेदी, बहादुर गुर्जर, बृजेश कंपाउंडर आदि ने बताया कि बीते 8 दिन से संत शिरोमणि स्वामी हरेंद्रानंद सरस्वती जी ध्रुवघटा स्थान को छोड़कर गांव करसोली के पास स्थित जगर बांध के किनारे बगुला दह नामक स्थान पर रहने लग गए हैं। संत के ध्रुवघटा स्थान को छोड़कर बगुला दह स्थान पर रहने के मामले की जानकारी जब ध्रुवघटा भक्त मंडल के सदस्यों एवं डांग क्षेत्र के 8 ग्राम मावई, 5 ग्राम फागुना एवं 84 क्षेत्र मासलपुर सहित सूरौठ, हिंडौन, तिघरिया के भक्तों को लगी तो सभी भक्त लोग सोमवार को दोपहर 12:00 बजे बगुला दह स्थान पर पहुंचे।

ध्रुव घटा भक्त मंडल के सदस्यों ने संत हरेंद्रानंद सरस्वती से विशेष आग्रह करते हुए ध्रुवघटा स्थान पर रहने की बात कही। इस पर संत हरेंद्रानंद सरस्वती ने कहां की प्राकृतिक रूप से बगुला दह स्थान बहुत ही मनोरम है। इस पर भक्तों ने कहा कि ध्रुवघटा भी तो मनोरम स्थान है। शिष्यों के अनुनय विनय को देखते हुए संत हरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि अब वे दोनों ही स्थानों की देखरेख करेंगे। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में आए ध्रुव घटा भक्त मंडल के सदस्य संत हरेंद्रानंद सरस्वती जी को रुद्राक्ष की माला पहनाकर एवं जयकारों के साथ गाड़ी में बैठा कर तपोभूमि ध्रुवघटा ले गए। शिष्य प्रमोद तिवाड़ी सूरौठ ने बताया कि करीब 15 वर्ष से संत हरेंद्रानंद सरस्वती जी डांग क्षेत्र की तपोभूमि ध्रुवघटा स्थान पर रह रहे थे। बीते 8 दिन से ही अचानक संत हरेंद्रानंद सरस्वती जी ने अपना स्थान परिवर्तन कर जगर बांध के किनारे स्थित मनोरम स्थान बगुला दह पर पर रह रहे है। ध्रुवघटा भक्त मंडल के सदस्यों का कहना है कि चाहे कुछ भी हो जाए हम स्वामी हरेंद्रानंद सरस्वती जी को तपोभूमि ध्रुवघटा स्थान को छोड़कर कहीं नहीं जाने देंगे।

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